धान की उन्नत उत्पादन तकनीक

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आज के समय में धान की उत्पादकता बढ़ाने की आवश्यकता है, यह तभी सम्भव हो सकता है जब धान उत्पादन हेतु उन्नत उत्पादन तकनीक अपनायी जाये। 

भूमि की तैयारी

धान की फसल के लिए पहली जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से तथा 2-3 जुताइयां कल्टीवेटर से करके खेत तैयार करें।  साथ ही खेत की मजबूत मेड़बन्दी कर दें जिससे कि वर्षा का पानी अधिक समय तक संचित किया जा सके। रोपाई से पूर्व खेत में पानी भरकर जुताई कर दें, साथ ही जुताई के समय खेत को समतल कर लें।

बीजोपचार व बीज अंकुरित करने की विधि

बीज को भिगोने के लिए एक बड़ा बर्तन लें जिसमें पूरा बीज आसानी से भीग जाए। जिन क्षेत्रों में जीवाणु झुलसा या जीवाणुधारी रोग की समस्या हो वहां 25 किग्रा बीज के लिए 4 ग्राम स्ट्रेप्टोसाइक्लीन या 40 ग्राम प्लान्टोमाइसीन को मिलाकर पानी में रात भर के लिए बीज को भिगों दें। दूसरे दिन छाया में सुखाकर नर्सरी डालें। फफूंद जनित रोगों से बचाव हेतु 25 किग्रा बीज को रातभर पानी में भिगोने के बाद दूसरे दिन निकालकर अतिरिक्त पानी निकल जाने के बाद 50 ग्राम कार्बेन्डाजिम अथवा 75 ग्राम थीरम की 8-10 लीटर पानी में घोलकर बीज में मिला दें तथा बीज को टाट के बोरे से ढककर अंकुरित होने पर नर्सरी डालें । 

बीज की मात्रा

एक हेक्टेयर क्षेत्र में रोपाई हेतु साधारण भूमि में 30 किग्रा महीन धान का बीज, 35 किग्रा मध्यम धान का बीज तथा 40 किग्रा मोटे धान का बीज पौध तैयार करने हेतु पर्याप्त होता है। ऊसर भूमि में बीज की मात्रा सवागुनी अधिक लगती है।  

नर्सरी का क्षेत्रफल

सामान्य परिस्थिति में एक हेक्टेयर क्षेत्र की रोपाई हेतु 800-1000 वर्गमीटर क्षेत्र की नर्सरी पर्याप्त होती है।  

रोपाई हेतु पौधे की आयु

धान की रोपाई हेतु 3-4 सप्ताह क पौध लगाना अच्छा रहता है।  इस आयु तक पौध में 4-5 पत्तियां निकल आती हैं। लम्बे जीवनकाल हेतु एक सप्ताह की पौध लगायें।  इस प्रकार 90-100 दिन की प्रजातियों हेतु 3-4 सप्ताह तथा 150 दिन की प्रजातियों हेतु एक माह की पौध लगाना श्रेयष्कर होता है। 

उचित गहराई व दूरी पर रोपाई

बौनी प्रजातियों की पौध की रोपाई 3-4 सेमी से अधिक की गहराई पर नहीं करें अन्यथा कल्ले कम निकलते हैं और उपज प्रभावित होती है। साधारण मृदाओं में पंक्ति से पंक्ति व पौधे से पौधे की दूरी 20310 सेमी तक उर्वर मृदा में 20315 सेमी रखें।  एक स्थान पर 2-3 पौधे लगायें।  यदि रोपाई में देर हो जाए तो एक स्थान पर 3-4 पौध लगायें तथा पंक्ति से पंक्ति की दूरी 5 सेमी कम कर दें।  इस बात का अवश्य ध्यान रखें कि प्रतिवर्ग मीटर क्षेत्रफल में 50 टिल अवश्य हो, ऊसर तथा देर से रोपाई की स्थिति में 65-70 टिल हो।  

खाद एवं उर्वरक

खाद एवं उर्वरक का प्रयोग मृदा परीक्षण की संस्तुतियों के आधार पर ही करें। अच्छी उपज प्राप्त करने के लिए कम्पोस्ट खाद 10-15 टन प्रति हेक्टेयर प्रयोग करें।  धान की फसल में हरी खाद के रूप में ढैंचा तथा सनई का प्रयोग काफी लाभकारी पाया गया है।  सिंचित दशा में अधिक उपज देने वाली प्रजातियों के लिए 120 किग्रा नाइट्रोजन 60 किग्रा. फास्फोरस तथा 60 किग्रा पोटाश प्रति हेक्टेयर की दर से प्रयोग करें।  देशी प्रजातियों के लिए 60 किग्रा नाइट्रोजन, 30 किग्रा फास्फोरस एवं 30 किग्रा पोटाश प्रति हेक्टेयर की दर से प्रयोग करें। अन्य तत्वों की पूर्ति के लिए 30-40 किग्रा गन्धक एवं 20-25 किग्रा जिंक सल्फेट तथा सूक्ष्म पोषक तत्व मिश्रण 20-25 किग्रा प्रति हेक्टेयर प्रयोग करें। 

खाद एवं उर्वरक प्रयोग करने की विधि

नाइट्रोजन की आधी मात्रा फास्फोरस एवं पोटाश की पूरी मात्रा रोपाई से पूर्व तथा नाइट्रोजन की शेष मात्रा बराबर-बराबर दो भागों में कल्ले फूटते समय तथा बाली बनने की अवस्था में टापड्रेसिंग के रूप में प्रयोग करें। 

जल प्रबंधन

सिंचाई की पर्याप्त सविधा रहने पर रोपाई के एक सप्ताह तक कल्ले फूटते समय, बाली निकलते समय, फूल खिलते समय तथा दाना भरते समय खेत में 4-5 सेमी पानी रहना लाभकारी रहता है। फूल खिलने की अवस्था पानी के लिए अति संवेदनशील है। कल्ले निकलते समय अंतिम 4-5 दिनों के लिए खेत से पानी निकाल देना उचित रहता है। अनुसंधानों के आधार पर यह पाया गया है कि धान की अधिक उपज पाने के लिए लगातार खेत में पानी भरा रहना आवश्यक नहीं है इसके लिए खेत की सतह से पानी अदृश्य होने के एक दिन बाद 5-7 सेमी सिंचाई करना उपयुक्त होता है ।  

खरपतवार नियंत्रण

रोपाई के 4-5 दिनों के अन्दर प्रति हेक्टेयर ब्यूटाक्लोर 50 प्रतिशत ई.सी. 2.5 लीटर अथवा प्रिटलाक्लोर 50 प्रतिशत ई.सी. 1.25 लीटर का प्रयोग 3-4 सेमी खेत में भरे पानी की अवस्था में प्रयोग करें।

रोपाई के 15-20 दिन बाद खरपतवार नियंत्रण हेतु विसपायरी बैक सोडियम 10 प्रतिशत एस.सी. 0.20 लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से खेत में नमी की स्थिति में 500 लीटर पानी में घोलकर फ्लेटफेन नॉजिल से छिड़काव करें।

नर्सरी तैयार करना

धान की एक हेक्टेयर क्षेत्र की रोपाई हेतु 800-1000 वर्ग मीटर क्षेत्र की आवश्यकता होती है। समय से नर्सरी में बीज डालें और नर्सरी में 8-10 किग्रा नाइट्रोजन, 4-5 किग्रा फास्फोरस प्रति 800-1000 वर्गमीटर क्षेत्र में प्रयोग करें। ट्राइकोडर्मा का एक छिड़काव नर्सरी डालने के 10 दिन के अन्दर कर दें।  बुवाई के 15 दिन बाद एक सुरक्षात्मक छिड़काव रोगों एवं कीटों से बचाव हेतु करें। खैरा रोग के नियंत्रण हेतु एक सुरक्षात्मक छिड़काव, 500 ग्राम जिंक सल्फेट का 2 किग्रा यूरिया या 250 ग्राम बुझे चूने के साथ 100 लीटर पानी में घोल बनाकर 1000 वर्ग मीटर क्षेत्र में छिड़काव करें।  

 

  • डॉ. शिशिर कुमार

    विषय वस्तु विशेषज्ञ (शस्य विज्ञान)
    प्रसार निदेशालय, सैम हिग्गिनबाटम यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर, टेक्नालॉजी एंड सांइसेज, इलाहाबाद
    shishir.agro@gmail.com

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