धान की सीधी बुआई से बड़ी बचत

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खेत की तैयारी

बीज के बेहतर जमाव के लिए किसान पहले अपने खेतों को समतल कर लें। हो सके तो लेजर लैंड लेवलर मशीन का उपयोग करें, अन्यथा जुताई के बाद परंपरागत विधि से पाटा लगाकर खेत को समतल कर लें।

बुआई समय

अच्छी पैदावार लेने के लिए सिंचित अवस्था में वर्षा आरम्भ होने से कम से कम एक सप्ताह पूर्व बुआई करना श्रेयस्कर होता है। वर्षाश्रित क्षेत्रों में भी अच्छी वर्षा से पूर्व बुआई कर लेें। जहां जल जमाव होता है वहां जमाव से एक माह पहले बुआई कर लें। 

बीजोपचार

कई बार कीटों से धान के बीज को बुआई के बाद क्षति पहुंचाई जाती है। ऐसे में बीजों को कीटनाशी क्लोरोपाइरीफॉस 2.5 मिली/किलो ग्राम बीज एवं फफूंदीनाशक कार्बेन्डाजिम 2 ग्राम/किलो ग्राम बीज की दर से बीज उपचार करें। इसके साथ-साथ जैव उर्वरकों यथा एजोस्पाइरिलम एवं पीएसबी (200 ग्राम/10 किग्राम बीज) से भी बीज उपचार करना अच्छा रहता है । 

किस्मों का चयन

धान की सीधी बुवाई के लिए किस्मों का चयन महत्वपूर्ण है जिसमे शुरुआती बढ़वार तेज, अधिक वानस्पतिक बढ़वार, खरपतवार प्रतिस्पर्धी और जिनकी जड़ गहराई तक जाये तथा जिन किस्मों की जल मांग कम हो।  इसके साथ यह भी ध्यान रखने की जरुरत है कि सीधी बुवाई करते समय किस्मों का चयन जल की उपलब्धता के अनुसार किया जाना चाहिए तथा जहां जल का जमाव होता हो वहां लम्बी अवधि और जहां पानी काम रुकता हो वहां छोटी अवधि की किस्मों का चयन करना उचित होता है।  

धान खरीफ की प्रमुख फसलों में से एक है। मध्यप्रदेश में भी बहुत से किसान धान की खेती करते हैं। इसमें मात्रा एक तिहाई जमीन ही सिंचित है जबकि दो तिहाई में धान की खेती नहरों के पानी एवं वर्षा जल पर आधारित है। असिंचित क्षेत्र में वर्षा का पानी समय पर न मिलने से किसान धान की रोपा पद्धति के लिए समय पर खेत में पानी की कमी के कारण कीचड़ नहीं कर पाते हैं जिससे धान की रोपणी में विलम्ब हो जाता है। इससे पैदावार में कमी के साथ-साथ रबी फसल जैसे गेहंू की बुवाई में भी देरी हो जाती है जिसके कारण रबी की फसल की उपज भी घट जाती है। इस समस्या का समाधान धान की सीधी बुवाई एक सही विकल्प है।

खरपतवार मुक्त खेत में बुआई

खेत में यदि दूब, मोथा जैसे बहुवर्षीय खरपतवार हो तो उनका नियंत्रण ग्लाईफोसेट 1 किलो ग्राम (सक्रिय तत्व) अथवा ग्लाईफोसेट 1 किलो ग्राम (सक्रिय तत्व)  2,4-डी 0.125 किलो ग्राम (सक्रिय तत्व) के मिश्रण के प्रयोग से खरपतवारों को नियंत्रित किया जा सकता है। खेत में मौसमी खरपतवार रहने की दशा में पेराक्वाट 0.5 किलो ग्राम प्रति हे. की दर से उपयोग कर खरपतवार को नियंत्रित किया जा सकता है। बुआई के समय यदि खेत में खरपतवार है, तो उनके नियंत्रण के बिना सीधी बुआई वाले धान की फसल लेना संभव नहीं है।

धान की सीधी बुआई पद्धति के फायदे

रोपणी धान की तुलना में कम जल की आवश्यकता: धान उत्पादन के लिए आवश्यक कुल जल की मात्रा (1400-1800 मिमी) का 30 प्रतिशत दवा और रोपाई में उपयोग होता है। जल की इस मात्रा को धान की इस वैकल्पिक विधि, सीधी बुआई के द्वारा बचाया जा सकता है।

कम श्रम की आवश्यकता: धान की रोपाई विधि में श्रम की अत्यधिक आवश्यकता होती है। सरकार की विभिन्न योजनाओं जैसे-मनरेगा आदि से तथा युवा पीढ़ी द्वारा अन्य रोजगार की ओर उन्मुख होने के फलस्वरूप कृषि कार्य हेतु श्रमिकों की उपलब्धता कम हुई है। इस कमी के दुष्प्रभाव से बचने के लिए और धान की समय से रोपाई हेतु धान की सीधी बुआई विधि को प्रोत्साहित किया जा सकता है।

ऊर्जा व ईंधन की बचत: धान की रोपाई विधि में खेत तैयार करने (कदवा) में ईधन एवं ऊर्जा का उपयोग ज्यादा होता है। जबकि सीधी बुआई में इस कार्य को नहीं करें

उत्पादन के कुल खर्चे में बचत: जल, मजदूरी एवं ईंधन में बचत के कारण सीधी बुआई में लागत कम आती है।

किसान के शुद्ध लाभ में बढ़ोतरी: इस विधि में लागत कम होने के कारण किसान का शुद्ध लाभ बढ़ जाता है।

मृदा की भौतिक गुणवत्ता में सुधार: सीधी बुआई में मिट्टी की भौतिक गुणवत्ता बनी रहती है क्योंकि मिट्टी में कदवा करने की जरूरत नहीं होती है।

अगली फसल की पैदावार में बढ़ोतरी: कदवा न करने से मिट्टी की संरचना में हुये सुधार से मिट्टी की भौतिक गुणवत्ता बनी रहती है और अगली फसल की पैदावार में अच्छा परिणाम मिलता है।

फसल की परिपक्वता अवधि में कमी: रोपाई विधि की अपेक्षा सीधी बुआई विधि अपनाने से धान की फसल पकने में 7 से 10 दिन कम लगते हैं। अत: धान के बाद लगने वाली फसलों को समय पर लगाकर अधिक पैदावार लेना संभव है।

  • दीपक चौहान 

    (वैज्ञानिक-कृषि अभियांत्रिकी) 

  • डॉ. मृगेन्द्र सिंह 

    (वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख)

  • पी. एन. त्रिपाठी (वैज्ञानिक) 
  • अल्पना शर्मा (वैज्ञानिक) 
  • भागवत प्रसाद पंद्रे (कार्यक्रम सहायक)

    कृषि विज्ञान केन्द्र शहडोल, जवाहरलाल     नेहरू कृषि विश्व विद्यालय, जबलपुर
    deepakchouhan22@gmail.com

 

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