गाजरघास से कम्पोस्ट बनाने की विधि

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गाजरघास से कम्पोस्ट बनाएं, एक साथ दो लाभ कमायें

सघन कृषि प्रणाली के चलते रसायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग करने से, मानव स्वास्थ्य एवं पर्यावरण पर होने वाले घातक परिणाम किसी से छिपे नहीं हैं। भूमि की उर्वराशक्ति में लगातार गिरावट आती जा रही है। रसायनिक खादों द्वारा पर्यावरण एवं मानव पर होने वाले दुष्प्रभावों को देखते हुए जैविक खादों का महत्व बढ़ रहा है। गाजरघास से जैविक खाद बनाकर हम पर्यावरण सुरक्षा करते हुए धनोपार्जन भी कर सकते हैं। निंदाई कर हम जहां एक तरफ खेतों से गाजरघास एवं अन्य खरपतवारों को निकाल कर फसल की सुरक्षा करते हैं, वहीं इन उखाड़ी हुई खरपतवारों से वैज्ञानिक विधि अपनाकर अच्छा जैविक खाद प्राप्त कर सकते हैं जिसे फसलों में डालकर पैदावार बढ़ाई जा सकती है।

क्यों लगता है कृषकों को गाजरघास से कम्पोस्ट बनाने में डर

सर्वेक्षण में पाया गया है कि गाजरघास से कम्पोस्ट बनाने में इसलिए डरते हैं कि अगर गाजरघास कम्पोस्ट का प्रयोग करेंगे तो खेतों में और अधिक गाजरघास हो जाएगी। कुछ किसानों के गाजरघास से अवैज्ञानिक तरीकों से कम्पोस्ट बनाने के कारण यह भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो गई है। सर्वेक्षण में पाया गया कि जब कुछ कृषकों ने फूलों युक्त गाजरघास से 'नाडेप विधिÓ द्वारा कम्पोस्ट बना कर उपयोग की तो उनके खेतों में अधिक गाजरघास हो गई। गांवों में गोबर से खाद खुले हुए टांकों या गड्ढों में बनाते हैं। जब फूलों युक्त गाजरघास को खुले गड्ढों में गोबर के साथ डाला गया तो भी इस खाद का उपयोग करने पर खेतों में अधिक गाजरघास का प्रकोप हो गया। अनुसंधानों में पाया गया कि 'नाडेप' या खुले गड्ढों या टांकों में फूलों युक्त गाजरघास से खाद बनाने पर इसके अतिसूक्ष्म बीज नष्ट नहीं हो पाते हैं। एक अध्ययन में 'नाडेप विधिÓ द्वारा गाजरघास से बनी हुई केवल 300 ग्राम खाद में ही 500 तक गाजरघास के पौधे अंकुरित होना पाए गए। इन्हीं कारणों से कृषक भाई गाजरघास से कम्पोस्ट बनाने से डरते हैं। पर अगर वैज्ञानिक विधि से गाजरघास से कम्पोस्ट बनाई जाए तो यह एक सुरक्षित कम्पोस्ट है।

कम्पोस्ट की छनाई

5 से 6 माह बाद भी गड्ढे से कम्पोस्ट निकालने पर आपको प्रतीत हो सकता है कि बड़े मोटे तनों वाली गाजरघास अच्छी प्रकार से गली नहीं है। पर वास्तव में यह गल चुकी होती है। इस कम्पोस्ट को गड्ढे से बाहर निकालकर छायादार जगह में फैलाकर सुखा लें। हवा लगते ही यह नम एवं गीली कम्पोस्ट शीघ्र सूखने लगती है। थोड़ा सूख जाने पर इसका ढेर कर लें। यदि अभी भी गाजरघास के रेशे युक्त तने मिलते है तो इसके ढेर को लाठी या मुगदर से पीट दें। जिन किसान भाईयों के पास बैल या ट्रैक्टर हैं, वे इन्हें इसके ढेर पर थोड़ी देर चला दें। ऐसा करने पर तने टूट कर बारीक हो जायेंगे जिससे और अधिक कम्पोस्ट प्राप्त होगी।

इस कम्पोस्ट को 2-2 सेमी छिद्रों वाली जाली से छान लें। जाली के ऊपर बचे ठूंठों के कचड़े को अलग कर दें। कृषक द्वारा स्वयं के उपयोग के लिए बनाए कम्पोस्ट को बिना छाने भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इस प्रकार प्राप्त कम्पोस्ट को छाया में सुखाकर प्लास्टिक, जूट या अन्य प्रकार के बड़े या छोटे थैलों में भरकर पैकिंग कर दें। व्यक्ति/$कृषक गाजरघास के कम्पोस्ट बनाने को व्यवसायिक रूप में करना चाहते हैं तो किचिन गार्डन उपयोग के लिए 1,2,3,5 किलो के पैकेट और व्यवसायिक सब्जियों, फसलों या बागवानी में उपयोग के लिए 25 से 50 किग्रा. के बड़े पैकेट बना सकते हैं।

गाजरघास को कांग्रेस घास, चटक चांदनी, कड़वी घास आदि नामों से भी जाना जाता है। आज भारत में यह खरपतवार न केवल किसानों के लिए अपितु मानव, पशुओं, पर्यावरण एवं जैव-विविधता के लिए एक बड़ा खतरा बनती जा रही है। इसका वैज्ञानिक नाम पार्थेनियम हिस्टेरोफोरस है। पहले गाजरघास को केवल अकृषित क्षेत्रों की ही खरपतवार माना जाता था पर अब यह हर प्रकार की फसलों, उद्यानों एवं वनों की भी एक भीषण समस्या है।

गाजरघास कम्पोस्ट में पोषक तत्व

तुलनात्मक अध्ययन में यह पाया गया कि गाजरघास से बनी कम्पोस्ट में मुख्य पोषक तत्वों की मात्रा गोबर से दुगनी और केंचुआ खाद के लगभग होती है। 

जैविक खाद का प्रकार
प्रतिशत में
  N P K Ca Mg
गाजरघास खाद 1.05 0.84 1.11 0.9 0.55
केंचुआ खाद 1.61 0.68 1.31 0.65 0.43
गोबर खाद 0.45 0.3 0.54 0.59 0.28

सावधानियां

गाजरघास से कम्पोस्ट तैयार करते समय निम्न बातों पर विशेष ध्यान देना चाहिए-

  • गड्ढा छायादार, ऊँचे और खुली हवा में जहां पानी की भी व्यवस्था हो बनाएं।
  • गाजरघास को हर हाल में फूल आने से पहले ही उखाडऩा चाहिए। उस समय पत्तियां अधिक होती हैं और तने कम रेशे वाले होते हैं अत: खाद उत्पाद अधिक होता है खाद जल्दी बन जाती है।
  • गड्ढे को अच्छी प्रकार से मिट्टी, गोबर एवं भूसे के मिश्रण के लेप से बंद करें। अच्छे से बंद न होने पर ऊपरी परतों में गाजरघास के बीज मर नहीं पाएंगे।
  • प्राय: गड्ढे के पास जहां कम्पोस्ट बनाने के लिए गाजरघास इक_ा करते हैं। वहां 20-25 दिनों में ही गाजरघास अंकुरित हो जाती है। ऐसा गाजरघास के फूलों से पके बीज गिरने के कारण होता है। यदि आपने अधिक फूलों वाली गाजरघास का कम्पोस्ट बनाने में उपयोग किया होगा तो उस अनुपात में वहां गाजरघास का अंकुरण अधिक पाएंगे। इन नए अंकुरित गाजरघास को फूल आने से पहले अवश्य जड़ से उखाड़ दें अन्यथा इन्ही पौधों के सूक्ष्म बीज आपके कम्पोस्ट को संक्रमित कर देंगे।
  • एक माह बाद आवश्यकतानुसार गड्ढे पर पानी का छिड़काव करते रहें। अधिक सूखा महसूस होने पर ऊपरी परत पर सब्बल आदि की सहायता से छेदकर पानी अंदर भी दाल दें। पानी डालने के बाद छिद्रों को बंद कर दें।

लाभ

  • गाजरघास कम्पोस्ट एक ऐसी जैविक खाद है, जिसके प्रयोग से फसलों मनुष्यों और पशुओं पर कोई भी प्रभाव नहीं पड़ता है।
  • कम्पोस्ट बनाने पर गाजरघास की जीवित अवस्था में पाया जाने वाले विषाक्त रसायन पार्थेनिन का पूर्णत: विघटन हो जाता है।
  • गाजरघास कम्पोस्ट एक संतुलित खाद है जिसमें नाइट्रोजन, फास्फोरस तथा पोटाश तत्वों की मात्रा गोबर खाद से अधिक होती है। इन मुख्य पोषक तत्वों के अलावा गाजरघास कम्पोस्ट में सूक्ष्म पोषक तत्व भी होते हैं।
  • जैविक खाद होने के कारण यह पर्यावरण मित्र है।
  • यह बहुत कम लागत में भूमि की उर्वरा शक्ति को बढ़ाती है।
  • गाजरघास से जैविक खाद बनाने के लिए एक तरफ गाजरघास की निंदाई कर कृषक भाई अपनी गाजरघास से ग्रसित फसलों की उत्पादकता बढ़ा सकते हैं वहीं दूसरी तरह इस खाद का फसलों में इस्तेमाल कर या इसे बेचकर अधिक धनोपार्जन कर सकते हैं। यानि की लाभ ही लाभ।

प्रयोग की मात्रा

  • खेत की तैयारी के समय बेसल ड्रेसिंग के रूप में 2.5 से 3.0 टन/हेक्टेयर।
  • सब्जियों में 4-5 टन प्रति हेक्टेयर पौध रोपण या बीज बोते समय।
  • गाजरघास कम्पोस्ट के प्रयोग की मात्रा अन्य जैविक खादों के अनुसार ही करें।

गाजरघास से कम्पोस्ट बनाने की विधि

गाजरघास से सर्दी-नरमी के प्रति असंवेदनशील बीजों में शषुप्तावस्था न होने के कारण एक ही समय में फूल युक्त और फूल विहीन गाजरघास के पौधे खेतों में दृष्टिगोचर होते हैं। अत: निंदाई करते समय फूलयुक्त पौधों का उखाडऩा भी अपरिहार्य हो जाता है। फिर भी किसान भाईयों को गाजरघास को कम्पोस्ट बनाने में उपयोग करने के लिए हर संभव प्रयास करने चाहिए कि वो उसे ऐसे समय उखाडं़े जब फूलों की मात्रा कम हो। जितनी छोटी अवस्था में गाजरघास को उखाड़ेंगे उतना ही अधिक अच्छा कम्पोस्ट बनेगा और उतनी ही फसल की उत्पादकता बढ़ेगी। निम्नलिखित विधि द्वारा गाजरघास से कम्पोस्ट बनाई जा सकती है।

  • अपने खेत या भूमि पर एक उपयुक्त थोड़ी ऊँचाई वाले स्थान पर जहां पानी का जमाव न होने पावे, एक 3&6&10 फीट (गहराई& चौड़ाई&लम्बाई) आकार का गड्ढा बना लें। 
  • अगर संभव हो सके तो गड्ढे की सतह पर और साइड की दीवारों पर पत्थर की चीपें इस प्रकार लगाएं कि कच्ची जमीन का गड्ढा एक पक्का टांका बन जाए। इसका लाभ यह होगा कि कम्पोस्ट के पोषक तत्व गड्ढे की जमीन नहीं सोख पाएगी।
  • अगर चीपों का प्रबंध न हो पाए तो गड्ढे के फर्श और दीवार की सतह को मुगदर से अच्छी प्रकार से पीटकर समतल कर लें।
  • अपने खेतों की फसलों के बीच से, मेढ़ों से और आस-पास के स्थानों से गाजरघास को जड़ समेत उखाड़कर गड्ढे के समीप इक_ा कर लें।
  • गड्ढे के पास 75 से 100 किग्रा. कच्चा गोबर, 5-10 किग्रा. यूरिया या रॉक फास्फेस की बोरी, भुरभुरी या कापू मिट्टी (एक या दो क्विंटल) और एक पानी के ड्रम की व्यवस्था कर लें।
  • लगभग 50 किग्रा. गाजरघास को गड्ढे की पूरी लम्बाई-चौड़ाई में सतह पर फैला दें।
  • 5-7 किग्रा. गोबर को 20 लीटर पानी में घोल बनाकर उसका गाजरघास की परत पर छिड़काव करें।
  • इसके ऊपर 500 ग्राम यूरिया या 3 किग्रा. रॉक फास्फेट का छिड़काव करें। जैवकीय खेती में खाद को उपयोग करना हो तो यूरिया न डालें।
  • उपलब्ध होने पर ट्राइकोडरमा विरीडी अथवा ट्राइकोडरमा हारजानिया नामक कवक के कल्चर पाउडर को 50 ग्राम प्रति परत के हिसाब से डालें। इस कवक कल्चर को डालने से गाजरघास के बड़े पौधों का अपघटन भी तेजी से हो जाता है एवं कम्पोस्ट शीघ्र बनती है। चूंकि दूर-दराज के गांव-देहातों में इस कल्चर का मिलना कठिन होता है। अत: इस कारक का प्रयोग इसकी उपलब्धि पर निर्भर है।
  • इसी प्रकार एक परत के ऊपर दूसरी-तीसरी और अन्य परतें तब तक बनाते जाएं जब तक गड्ढा ऊपरी सतह से एक फीट ऊपर तक न भर जाए। ऊपरी सतह की परत इस प्रकार दबाएं कि सतह डोम के आकर की हो जाए। परत जमाते समय गाजरघास को पैरों से अच्छी प्रकार दबाते रहें।
  • यहां पर गाजरघास को जड़ से उखाड़कर परत बनाने के निर्देश दिए गए हैं। जड़ से उखाड़ते समय जड़ों के साथ ही काफी मिट्टी आ जाती है। अत: परत के ऊपर भुरभुरी मिट्टी डालने का विकल्प खुला है। अगर आप महसूस करते हैं कि जड़ों में मिट्टी अधिक नहीं है तो 10-12 किग्रा. भुरभुरी मिट्टी प्रति परत की दर से डालें।
  • अब इस प्रकार भरे गड्ढे को गोबर, मिट्टी आदि के मिश्रण लेप से अच्छी प्रकार बंद कर दे 5-6 माह बाद गड्ढा खोलने पर अच्छी कम्पोस्ट प्राप्त होती है।
  • उपरोक्त वर्णित गड्ढे में 37 से 42 क्विंटल ताजी उखड़ी गाजरघास आ जाती है जिससे 37 से 45 प्रतिशत तक कम्पोस्ट प्राप्त हो जाती है।
  • राजेंद्र कुमार
  • पवन कुमार 
  • प्रो. ए. आर. नकवी

कीट विज्ञान विभाग, कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर, एसकेआरयू, बीकानेर

  • अमर चंद विद्यावाचस्पति शोधार्थी एसकेएनयू जोबनेर, जयपुर

entoamar@gmail.com

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