कृषि कॉलेजों में छात्रों का विरोध प्रदर्शन जारी

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इंदौर। प्रदेश के सरकारी कृषि कॉलेजों में स्नातकोत्तर में प्रवेश के लिए प्रवेश परीक्षा में इस बार निजी कृषि कॉलेजों के छात्रों को भी शामिल किए जाने का कृषि कॉलेज के छात्र विरोध कर रहे हैं। ज्ञापन, मुंडन, तालाबंदी, अर्धनग्न प्रदर्शन  के बाद भी सरकार कोई सुनवाई नहीं कर रही है। इसलिए छात्रों का विरोध प्रदर्शन जारी है।

इस बारे में इंदौर से एम. एससी (एजी) उत्तीर्ण छात्र श्री रामकुमार मीणा ने कहा कि पीजी में प्रवेश के लिए कृषि कॉलेजों में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् के मापदंडों का पालन होना अनिवार्य है, जबकि निजी कृषि कॉलेजों में स्नातक में प्रवेश के लिए न तो कोई परीक्षा होती है। न लैब है और योग्य प्रोफेसर भी नहीं रहते है। यहां छात्रों का 6 माह का व्यवहारिक प्रशिक्षण भी पर्याप्त नहीं होता है, वहीं सरकारी कृषि कॉलेजों में स्नातक में प्रवेश के लिए पीएटी परीक्षा पास करनी पड़ती है। ऐसे में निजी कॉलेजों के छात्रों को पीजी की प्रवेश परीक्षा में शामिल किए जाने से सरकारी कॉलेजों के छात्रों का नुकसान होगा।

उल्लेखनीय है कि इसी विषय को लेकर प्रदेश के सरकारी कृषि कॉलेजों के छात्र करीब दो सप्ताह से इंदौर, खंडवा आदि कॉलेजों में विरोध प्रदर्शन कर रहे है। जिसके तहत सरकार को ज्ञापन देकर इसे रद्द करने की मांग की है। विरोध के लिए खंडवा के छात्र मुंडन और कॉलेज की तालाबंदी भी कर चुके हैं, जबकि इंदौर के छात्रों ने अर्धनग्न होकर भी प्रदर्शन किया है। इसके बावजूद इन छात्रों की सुनवाई नहीं हो रही है। कहा जा रहा है कि पीजी में प्रवेश के लिए दो काउंसलिंग में सरकारी कृषि कॉलेजों के स्नातकों को मौका मिलेगा, जबकि तीसरी काउंसलिंग में निजी कॉलेजों के छात्रों को अवसर दिया जाएगा।  

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