फर्टिलाइजर की कीमतें नहीं बढ़ेंगी

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(निमिष गंगराड़े)

नई दिल्ली। उर्वरक सब्सिडी में कटौती करने का सरकार का कोई इरादा नहीं है। केन्द्रीय उर्वरक मंत्री श्री डीवी सदानंद गौड़ा ने गत सप्ताह राज्य सभा में यह स्पष्ट कर दिया। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यूरिया की सब्सिडी दर को फिक्स नहीं किया जाएगा। केन्द्र सरकार किसी भी स्थिति में फर्टिलाइजर को खुले बाजार के भरोसे नहीं छोड़ेगी। यह किसानों के हित में नहीं होगा।

राज्यसभा में प्रश्नों के लिखित उत्तर में केन्द्रीय उर्वरक मंत्री श्री सदानंद गौड़ा ने बताया कि वर्ष 2017-18 में जहां फर्टिलाइजर सब्सिडी 69,197 करोड़ रुपए थी वहीं वर्ष 2018-19 में बढ़कर 73,435 करोड़ रुपए हो गई। पोटाश और फॉस्फेट की न्यूट्रिएंट बेस्ड सब्सिडी की योजना 1 अप्रैल 2010 से शुरू की गई थी। इसके तहत प्रति किलो अनुसार नाइट्रोजन, फॉस्फेट, पोटाश और सल्फर पर सालाना सब्सिडी की गणना की जाती है। श्री गौड़ा ने बताया कि किसानों को उर्वरक एमआरपी (अधिकतम खुदरा कीमत) पर उपलब्ध कराई जाती है। यूरिया का एमआरपी फिलहाल 242 रुपए प्रति 45 किलोग्राम है। इसमें नीम कोटिंग और टैक्स अलग है। यूरिया किसान द्वारा क्रय करने के बाद ही यूरिया पर सब्सिडी का भुगतान यूरिया कारखाने को किया जाता है।

वहीं उर्वरक मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक सरकारी और निजी उर्वरक कंपनियों को 1 लाख 12 हजार करोड़ की सब्सिडी की जरूरत है। चालू वित्त वर्ष के लिए लगभग 80 हजार करोड़ रु. की जरूरत है वहीं गत वर्ष का 32 हजार करोड़ भी बकाया है।
 

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