खेती को बनाया लाभ का धंधा

Share On :

turning-farming-into-profitable-business

कॉमर्स से पोस्ट ग्रेजुएट

विदिशा। समय परिवर्तनशील है, यह प्रकृति का नियम है। वर्षों पहले खेती पेट भरने का साधन होती थी। कृषि विज्ञान ने समय के साथ चलते खेती को समृद्ध जीवन यापन का साधन बना दिया है। यह बात सिद्ध की है मध्य प्रदेश के गंजबासौदा विदिशा जिले के तहसील से 6 कि.मी. दूर ग्राम कुरावद के 40 वर्षीय एम.कॉम. की डिग्री प्राप्त युवा कृषक श्री दिलीप पिता श्री सत्यराम शर्मा ने, जिन्होंने सब्जी उत्पादन को कम लागत में अधिक मुनाफा कमाने का विकल्प बना दिया है। दो भाई दोनों उच्च शिक्षित किन्तु पिता अपने पुत्रों से पुश्तैनी 100 बीघा भूमि संभालने की प्रेरणा देते हैं। पहले भूमि पर पारम्परिक फसलें गेहूं, चना, मसूर, सोयाबीन, मूंग, उड़द की खेती पिताजी की सलाह पर करते थे। उपज में लम्बा समय, मौसम की मार, भाव में कमी, कीट व्याधियों का प्रकोप से जैसे-तैसे फसल तैयार होती थी तो कभी-कभी लागत निकालना भी मुश्किल होता था। 5 वर्ष पूर्व श्री दिलीप शर्मा एवं उनके बड़े भाई ने खेती में परिवर्तन की ठानी और 40 बीघा में अक्टूबर माह में आलू लगाया जिसका रिकॉर्ड 1 बीघा में 70 क्विंटल उत्पादन हुआ जो कि अच्छे दामों पर विक्रय हुआ। आलू की बंपर सफलता से उत्साहित श्री दिलीप के मस्तिष्क में गर्मियों में खाली खेत देखकर सब्जी उत्पादन का विचार आया। 1-2 बीघा क्षेत्र में गिलकी, लौकी, ककड़ी लगाई। 3 माह में तैयार सब्जियों को स्थानीय गंजबासौदा मंडी में विक्रय किया। विक्रय में आसानी से कम लागत, कम समय में अधिक मुनाफा मिलने से उत्साहित श्री दिलीप ने इस वर्ष 10 हजार रु. में तरबूज एवं खरबूज बीज 1-1 बीघा में 20 हजार मजदूरी एवं अन्य व्यय कर लगाया। जिसका विक्रय प्रारंभ है। अभी तक 25 हजार का विक्रय कर चुके हैं। लगभग डेढ़ से 2 लाख रुपए का और विक्रय होगा। साथ ही ककड़ी, गिलकी, लौकी फसलों का भी विक्रय किया जा रहा है। सब्जी उत्पादन फसल चक्र अपनाकर करने से आय का अतिरिक्त साधन कम लागत और कम समय में मिलता है।

मुनाफे का फसल चक्र

श्री दिलीप शर्मा सब्जियों के बाद जुलाई में मूंग बोयेंगे। जिसको अक्टूबर में काटकर आलू बो दिया जायेगा। 15 फरवरी तक आलू निकालकर सब्जी फसलें लगा दी जायेंगी जो कि जून तक विक्रय होती हैं। आलू का बीज दो वर्ष में बदल देते हैं। दिलीप आगरा (उ.प्र.) से बीज लाते हैं और अन्य कृषकों को भी आलू का बीज उपलब्ध कराते हैं। श्री शर्मा के कृषि कार्यों में सफलता से ग्रामवासी प्रभावित होकर सब्जी उत्पादन तकनीक समझ रहे हैं। खेती में 5 पशुओं एवं उन्नत कृषि यंत्रों का भी उपयोग करते हैं। भविष्य में तरबूज- खरबूज एवं अन्य सब्जी फसलों पर ड्रिप, मल्चिंग पद्धति का उपयोग करेंगे। इस वर्ष मक्का फसल का रकबा बढ़ायेंगे साथ ही सोयाबीन की खेती खरीफ सीजन में करते हैं। रबी सीजन में गेहूं, चना, मसूर का भी उत्पादन लिया जाता है। कृषक जगत के पाठकगण सब्जी उत्पादन की अन्य लाभकारी जानकारी के लिये श्री दिलीप शर्मा के मो. 9993162737 पर सम्पर्क कर सकते हैं।
 

Share On :

Follow us on

Subscribe Here

For More Articles

Releated Articles