सुला वाईनयार्ड्स ने इस साल 9000 टन अंगूरों का उपयोग किया

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510 किसानों के साथ बायबैक

भारत की सबसे बड़ी वाईनरी

भारत की अग्रणी वाईन निर्माता, सुला वाईनयार्ड्स ने वित्त वर्ष 2019-20 में 9000 टन से ज्यादा अंगूरों का उपयोग किया, जो गत वर्ष के मुकाबले लगभग 50 फीसदी ज्यादा है। यह अच्छे मानसून और उसके बाद वाईन के लिए उगाए जाने वाले अंगूरों की खेती के लिए अनुकूल मौसम के चलते संभव हुआ। इन आंकड़ों से सुला को 2018 की सेल्स का अपना खुद का रिकॉर्ड तोडऩे में मदद मिलेगी। इस अवधि में सुला ने पूरी दुनिया में 1 मिलियन से ज्यादा केस बेचे थे।

500 से ज्यादा किसानों का जुड़ाव

सुला महाराष्ट्र और कर्नाटक में अतिरिक्त भूमि पर खेती कर रहा है और कृषि सेक्टर को बढ़ावा दे रहा है। सुला ने 2018 में 360 एकड़ जमीन पर वृक्ष लगाए और यह 2019 में अतिरिक्त 340 वृक्ष लगाएगा। इस प्रकार वाईन ग्रेप प्लांटेशन के तहत कुल 3000 एकड़ का इलाका कवर होगा, जो ग्रामीण रोजगार की संख्या बढ़ाएगा। आज महाराष्ट्र और कर्नाटक के लगभग 510 किसान निश्चित बायबैक अनुबंधों के साथ सुला के साथ काम कर रहे हैं।

आमतौर पर महाराष्ट्र में अंगूरों की बहुत अच्छी फसल देखने को मिली। भारत में अंगूर क्षेत्र के केन्द्र, नासिक में अंगूर की फसल 1.43 लाख टन को पार कर गई। इनमें से लगभग 2 प्रतिशत अंगूर वाईन ग्रेप्स हैं। हालांकि 2017 के अलावा, जब हाईवे पर शराब बेचने पर प्रतिबंध लगा, उसके बाद भारतीय वाईन उद्योग ने सीएजीआर में स्थिर वृद्धि दर्ज की, जिसका मतलब है कि ज्यादा से ज्यादा भारतीय शराब से दूरी बनाकर वाईन लेना ज्यादा पसंद कर रहे हैं।

सुला वाईनयार्ड्स के फाउंडर एवं सीईओ, राजीव सामंत ने कहा, 'वाईन बनाने की कला बहुत पुरानी है। इसके लिए चुनौती मौसम की होती है। हमारा ग्रह खतरे में है और पर्यावरण पर हमारा प्रभाव, हमारी पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। उत्पादन एवं क्रशिंग की पारंपरिक प्रक्रिया में काफी कचरा निकलता है। इसकी जगह हम बीज से लेकर स्किन तक अंगूर के हर हिस्से का उपयोग करते हैं। जब अंगूर का रस निकल जाता है, तब हम उसके बीजों से ग्रेपसीड ऑयल बनाते हैं तथा बची हुई शेष सामग्री का उपयोग अपनी वाईस के लिए कंपोस्ट के रूप में करते हैं।' सुला वाईनयाडर््स ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाकर भविष्य के लिए भारत की सुरक्षा करने के लिए समर्पित है।

 

चीफ वाईन निर्माता एवं सीनियर वाईस प्रेसीडेंट - वाईनयार्ड एवं वाईनरी ऑपरेशंस, करन वसानी ने कहा, 'इस साल विविध किस्मों के बीज वितरण में 55 फीसदी लाल अंगूर की किस्मों और 45 फीसदी व्हाईट अंगूर की किस्मों का उपयोग किया गया। ज्यादातर अंगूरों का रस निकालने और प्रोसेसिंग का काम नासिक एवं महाराष्ट्र के दक्षिणी हिस्सों में किया जाता है, यद्यपि कुछ काम कर्नाटक में भी उन वाईन के लिए किया जाता है, जो सुला वाईनयार्ड द्वारा इसके ब्रांड काडू के तहत कर्नाटक में बनाई और बेची जाती है।' 2019 का साल अंगूर उगाने की परिस्थितियों के लिए बहुत अच्छा था। यह मौसम जलवायु परिवर्तन के परिणामस्वरूप था। इस साल फसल में कुछ विलम्ब हो गया, जो दिसंबर के मध्य से चलकर अप्रैल के पहले हफ्ते तक चला।

 

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