शुद्ध बीज बढ़ायेगा खरीफ उत्पादन

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हमारा देश एक कृषि प्रधान देश है। किसान अपने आत्मविश्वास के बल पर धरती मां की गोद को हरा-भरा बनाता है। प्राचीनकाल से ही अच्छी गुणवत्ता वाले बीज को महत्व दिया गया है। यह बात सत्य प्रतीत होती है कि बोने के लिए शुद्ध बीज का उपयोग आवश्यक है तथा इनके उपयोग से फसलों की पैदावार बढ़ती है यह एक महत्वपूर्ण आदान है। आज सरकार की कई योजनाओं के अंतर्गत उन्नत किस्मों के बीज उत्पादन, गुणन व वितरण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। 

बीज व दाने में अंतर

बीज एक वैज्ञानिक विधि द्वारा तैयार किया जाता है। सही ढंग से उपचारित, पैक, चिंहित एवं उचित ढेर प्रदर्शित करता है। वह अपनी जाति व गुणों के मानकों के अनुरूप होता है। जबकि दाना खाने के लिए प्रयोग होता है तथा हाथ से साफ किया गया होता हैे। दाना अपनी जाति व गुणों के मानकों के अनुरूप नहीं होता है। इसकी अंकुरण क्षमता का कोई मानक नहीं होता।  

अच्छे बीज के गुण

अच्छे बीज रोग, कीट, खरपतवार व अन्य फसल के बीज व अन्य बाहरी पदार्थों से मुक्त रहता है। यह भौतिक व आनुवांशिक रूप से शुद्ध होता है। इसका अंकुरण प्रतिशत, नमी प्रतिशत मानकों के अनुरूप होती है। किसान भाई खराब गुणता वाले बीजों का उपयोग कर कृषि के अन्य कार्यों पर जैसे खाद, खरपतवारनाशी, कीट रोग व्याधि नाशी रसायनों आदि पर खर्च करते हैं परंतु यदि किसान खराब बीज न बोकर शुद्ध बीज, अच्छी गुणता वाले बीज बोयें तो कृषि के अन्य खर्चों में कमी कर सकते हैं। आईये हम जाने कि अच्छा बीज कैसा होता है इसके क्या गुण हैं तथा यह उत्पादकता बढ़ाने में कैसे सहायक है।

बीज का आकार, आकृति एवं रंग

उत्कृष्ट बीज आकार, आकृति व रंग में समान होना चाहिए। छोटे आकार के बीजों से उगने वाले पौधे बढ़वार कम करते हैं तथा इनसे पैदा होने वाले पौधे कुछ कमजोर भी होते हैं। बड़े आकार के सुडौल बीज बीजांकुर को अधिक खाद्य पदार्थ देकर स्वस्थ पौधे तैयार करते हैं। बीज टूटा-फूटा नहीं होना चाहिए। 

नमी की मात्रा 

अच्छे बीजों में नमी की निश्चित मात्रा होना आवश्यक है न अधिक और न ही कम होना चाहिए। 

आनुवांशिक शुद्धता

जिस जाति विशेष को हम बो रहे हैं बीज उसी जाति विशेष का होना चाहिए। मिश्रित जाति के बीजों की खेत में केवल एक जाति की ही विभिन्न आवश्यकताओं को ही पूरा किया जा सकता है। दूसरों की नहीं। अत: फसल की दो जातियों के बीज नहीं मिलने चाहिए। वह आनुवंाशिक रूप से शुद्ध होना चाहिए। 

भौतिक शुद्धता

भौतिक शुद्धता से तात्पर्य यह है कि बीज अन्य फसल के बीजों, खरपतवारों के बीजों, कंकड़, पत्थर, मिट्टी, धूल फसल के अवशेष आदि से मुक्त रहें। अत: बीज भौतिक रूप से शुद्ध रहे। 

अंकुरण क्षमता

अच्छे गुणता वाले बीज की अंकुरण क्षमता अधिक होती है। अत: अधिक अंकुरण होने से कृषक को अधिक उत्पादन प्राप्त होता है। 

कीटों व रोगों से मुक्त

बीज विभिन्न प्रकार के रोगों व कीटों से मुक्त हो। बीजों को रोगों व कीटों से बचाव हेतु उपचारित करना आवश्यक है तथा उच्च गुणता का बीज ठीक प्रकार से उपचारित किया गया होता है।

बीज की परिपक्वता

अधिकतम बीज अपरिपक्व होने के कारण सामान्यत: अंकुरित नहीं होते हैं तथा बीज की परिपक्वता वातावरणीय परिस्थितियों के अनुकूल होनी चाहिए। यह अच्छी, प्रकार से परिपक्व साफ तथा गूदेदार हो। 

संवेदनशीलता

उन्नत किस्म का बीज अधिक खाद, पानी का अधिकाधिक उपयोग करके उच्चतम उत्पादन देता है। 

अधिक अनूकूलता

उच्च गुणों वाला बीज अपनी उच्चतम क्षमता का प्रदर्शन करता है। यह विभिन्न जलवायु क्षेत्रों व भूमियों में अधिक उत्पादन देता है।

अधिक उपज

उन्नत किस्म के बीज की उपज अधिक होना चाहिए।

कम लागत

उच्च गुणों वाले बीज की प्रति हेक्टेयर उत्पादन लागत कम होना चाहिए। आजकल खेती से अधिक पैदावार लेने के लिए रसायनिक उर्वरकों, कीट, खरपतवारों व पौधों की रोग नाशक रसायनों का उपयोग कृषि की लागत को बहुत अधिक बढ़ा रहे हैं जिसके कारण खेती करना कठिन हो गया है परंतु उन्नतशील किस्मों का शुद्ध व अच्छे बीजों के उपयोग की लागत कृषि के अन्य कार्यो में लगी लागत से न सिर्फ कम होती है बल्कि खेती से अधिक पैदावार लेने के लिए भी आवश्यक हो गया है।
 

  • डॉ. सर्वेश कुमार
  • डॉ. आर.सी. शर्मा
  • वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केन्द्र, हरदा
  • sarveshkvkharda@gmail.com
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