सोयाबीन का बीज कैसे बनाएं

Share On :

how-to-make-soyabean-seed

खेती की तैयारी 

अच्छे जल निकास वाली चिकनी दोमट भूमि सोयाबीन की खेती के लिये अधिक उपयुक्त होती है। दो-तीन हेरो या कल्टीवेटर को विपरीत दिशा में चलाकर  खेत को समतल कर लें, जिससे कीट बीमारी एवं खरपतवार कम होते है। खेत में 20-25 लाइनों के बाद नाली का निर्माण अवश्य करें ऐसा करने पर सिंचाई व जल निकास में सुविधा होती है।

बोआई 

जून के अंतिम सप्ताह से 10 जुलाई तक का समय सोयाबीन की बोनी के लिये सबसे उपयुक्त है। बोआई कतार में सीडड्रिल या हल से करेें। खेत में लाईन से लाईन के बीच की दूरी 45 सेमी. रखें पर बुवाई में देर हो जाये तो 30 सेमी. की दूरी पर बोवाई करें।  पौधे से पौधे की दूरी 5 सेमी. रखें। 

बीजोपचार

बीज की मृदा जनित फफूंदों से सुरक्षा हेतु कार्बेन्डाजिम 2 ग्राम अथवा ट्राईकोडर्मा विरडी 6-10 ग्राम प्रति किग्रा बीज के हिसाब से उपचारित करें। 

बीज दर

छोटे दाने वाली किस्मों की 60-70 किग्रा. मध्यम दाने वाली किस्मों की 70-75 व बड़े दाने वाली किस्मों की 90-100 कि.ग्रा. मात्रा उपयोग करें।

रसायनिक उर्वरको का उपयोग

खेत में प्रति है. 5-8 टन पकी हुई गोबर खाद अवश्य डालें। सोयाबीन हेतु 20 किग्रा. नाइट्रोजन, 60 किग्रा. फास्फोरस, 20 किग्रा. पोटाश एवं 20 किग्रा. सल्फर प्रति हे. मात्रा अनुसंशित है। 

सोयाबीन में उर्वरकों की सम्पूर्ण मात्रा बोने के पूर्व दें। उर्वरक कूंड में 5 से 6 सेमी. गहराई पर बीज के नीचे दें। छिटकवां विधि से खाद देने पर पोषक तत्वों का सही लाभ फसल को कम होता है क्योंकि इस विधि से खरपतवार पोषक तत्व ग्रहण कर लेते हंै। कुछ भाग जल के साथ वह जाता है कुछ भाग लीचिंग द्वारा नष्ट हो जाता है।

पृथक्करण दूरी 

जिस खेत में बीज उत्पादन कार्यक्रम हेतु सोयाबीन बोई जावे, उसमें सोयाबीन की अन्य किस्मों से तीन मीटर की पृथक्करण दूरी रखी जावे। आनुवांशिक रूप से शुद्व बीज व उच्च गुणवत्ता वाले बीज उत्पादन में पृथक्करण की दूरी का निर्धारण करना अति आवश्यक है। 

विभिन्नता दिखाने वाले पौधों को पहचानना व निकालना

सोयाबीन के अन्य किस्मों के पौधों व विभिन्नता दिखाने वाले पौधो को किस्म के विशेष गुणों के आधार पर पहचानते है। इन पौधों को फूल आने के पूर्व या फूल आते ही खेत से निकाल दें। बैंगनी नीले रंग के फूल वाली किस्म को पौध अवस्था में बीजोधर पर बैंगनी रंग व फूल आने के पूर्व तने पर बैगनी रंग के आधार पर भी पहचाना जा सकता है। सफेद रंग के फूल वाली किस्मों का बीजोधर व तना दोनों ही हरे रंग के होते है। किस्मों के विशेष गुण जिनके आधार पर उन्हें पहचाना जा सकता है। और खेत में विभिन्नता दिखा रहे पौधों को खेत से जल्द से जल्द निकाल दें। 

कटाई

फसल की कटाई जब 90 प्रतिशत पत्तियाँ गिर जाने के बाद तथा फलियां भूरे रंग की हो जाने के बाद ही कटाई करें। यह स्थिति जब बीज में 15.17 प्रतिशत नमी रह जाने पर होती है।

गहाई

पौधों के बंडल को भली भांति सूख जाने के बाद थ्रेसर की सहायता से करें। लेकिन थ्रेसर के पंखे की गति 1400-1500 आरपीएम होना चाहिए।

 

  • डॉ. आशीष त्रिपाठी 
  • डॉ. ए.के. सिंह 
  • डॉ. के. एस. यादव 

  कृषि विज्ञान केन्द्र,सागर  (म.प्र.)
  मो. : 9826241232

Share On :

Follow us on

Subscribe Here

For More Articles

Releated Articles