बीज उद्योग एवं बीज अभिलेख रिकॉर्ड

Share On :

seed-industry-and-seed-record

रिकॉर्ड बनाने के लाभ 

(क) रिकॉर्ड बनाने से आत्मविश्वास बढ़ता है और कार्य पद्धति में मौलिकता झलकती है।
(ख) बीज निरीक्षक, कृषक, बीज विक्रेता से विवाद होने की स्थिति में विधिक मामलों में साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किए जा सकते हैं।
(ग) विगत के अभिलेखों का अध्ययन कर भविष्य की योजनाएं बनाई जा सकती है।
(घ) रिकॉर्ड को देखकर विगत में की गई गलतियों को सुधारा जा सकता है।

सम्पूर्ण रिकॉर्ड 

सम्पूर्ण रिकॉर्ड शब्द को बीज नियम 1968 के नियम 2 (जी) में परिभाषित किया गया है कि बीज की उत्पत्ति, किस्म अंकुरण एवं शुद्धता का रिकॉर्ड। बीज नियम 2 (i) के द्वारा उत्पत्ति से तात्पर्य बीज किस देश, राज्य या केन्द्र शासित राज्य में उत्पन्न किया गया। कृषि विभाग कई बार बीज उत्पत्ति से अर्थ लगता है कि बीज किस कृषक के यहां उत्पन्न किया गया। ऐसी सूचना या रिकॉर्ड मांगना तर्कसंगत नहीं है क्योंकि यह रिकॉर्ड बीज उत्पादकों का ट्रेड सिक्रेट है। इसी प्रकार किसी किस्म के विकसित करने के बारे में रिकॉर्ड मांगते हैं वह भी असंगत है क्योंकि यह बौद्धिक संपदा अधिकार में संरक्षित है।

माननीय राष्ट्रपति राम कोविंद जी ने 'निपटान' के दीक्षांत समारोह में कहा कि कृषि कार्य जीविकोपार्जन का साधन ही नहीं है बल्कि यह तपस्या है। बीज उत्पादन एवं उसका व्यापार भी कठिन तपस्या है। बीज का उत्पादन एवं विक्रय विभिन्न कानूनों का पालन करते हुए किया जाता है बिना रिकॉर्ड बनाए बीज उत्पादन एवं विक्रय ऐसा है जैसे बिना पतवार एवं कम्पास के जहाज चलाना अत: अभिलेख बनाना आवश्यक है जो निम्न प्रकार है :-

रिकॉर्ड रखने का दायित्व 

बीज नियम 1968 के नियम 17 (iv) में बीज उत्पादक पर उत्पादन संबंधी रिकॉर्ड रखने का दायित्व डाला गया है। बीज उत्पादक को उत्पादित बीज, उसकी बिक्री एवं कंडेमनेशन का रिकॉर्ड ऐसे तरीके से रखें कि निरीक्षण में सही संदर्भ मिले। बीज पर लगने वाले टैग, लेबल आदि का विवरण रखें। प्रमाणित बीजों का रिकॉर्ड राज्य बीज प्रमाणीकरण संस्थाएं रखती हैं परन्तु बीज उत्पादकों को भी अपना समानान्तर रिकॉर्ड बनाना चाहिए। बीज उत्पादकों को टी.एल. बीज उत्पादन ब्रीडर या प्रमाणित से लेकर प्रोसेस तथा लेबलिंग का पूरा रिकॉर्ड रखना आवश्यक है अन्यथा बीज निरीक्षक के कोप का भोजन बनना पड़ेगा। निजी बीज उत्पादक अपना रिकॉर्ड बनाने से डरते हैं जो स्वस्थ परंपरा नहीं है। नियम 17 (iv) के अनुसार यह रिकॉर्ड लॉट का बीज विक्रय होने पर 2 साल तक रखना आवश्यक है।

सैंपल का रिकॉर्ड एवं प्रमाणीकरण 

(क) भारतीय न्यूनतम बीज प्रमाणीकरण मानक 2013 के साधारण बीज मानक के बिन्दु XXI ‘Sampies and Sampling’ तथा बिन्दु VI ‘Phases of Seed Certification’ के बिन्दु (द्ग) के प्रमाणित बीजों का सैंपल लेने का उत्तरदायित्व बीज प्रमाणीकरण अधिकारी पर डाला गया है। साधारणतया राज्य बीज प्रमाणीकरण संस्थाएं सैंपल तीन भागों में नहीं बनाती और एक भाग उत्पादक को नहीं दिया जाता है और यदि दिया भी जाता है तो वह भली विधि सील बंद करके नहीं दिया जाता जिससे बीज उत्पादक विवाद होने पर उसे साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत नहीं कर पाता है।

(ख) भारतीय न्यूनतम बीज प्रमाणीकरण मानक 2013 में साधारण बीज प्रमाणीकरण के बिन्दु 33 के अनुसार प्रमाणीकरण का रिकॉर्ड जिसमें गार्ड सैंपल भी है, प्रमाण पत्र जारी होने की तिथि 1 से वर्ष और लॉट निरस्त होने की तिथि से 2 वर्ष तक रखना आवश्यक है। विदित हो कि भारतीय न्यूनतम बीज प्रमाणीकरण मानक 1988 के अनुसार रिकॉर्ड रखने की समय अवधि 2 वर्ष एवं 4 वर्ष थी। यह समय अवधि संगत है क्योंकि बीज का लॉट कई बार रिवैलिडेट होने पर बेचा जाता है। इसके अलावा अब अंकीय युग digital Era है जिसमें पहले की अपेक्षा अधिक काल का रिकॉर्ड रखा जाना चाहिए और बीज लॉट विवादित होने पर रिकॉर्ड साक्ष्य के रूप में न्यायालय में प्रस्तुत किया जा सकें।

(ग) बीज संशोधित नियम 1981 के द्वारा बीज नियम 1968 में नियम 17 ए जोड़कर न्यूनतम बीज प्रमाणीकरण मानकों को बीज नियम का अंग बनाया गया है। न्यूनतम बीज प्रमाणीकरण मानक 2013 में रिकॉर्ड रखने की समय अवधि 1 वर्ष तथा नियम 17 (iv) के बीज नियम 1968 में 2 वर्ष होना स्वयं में विरोधाभास है और सुधार की आवश्यकता है।

(घ) यहां यह उल्लेख करना भी आवश्यक है कि राज्य बीज प्रमाणीकरण संस्थाओं के साथ ही बीज उत्पादकों के लिए भी रिकॉर्ड रखने की समय सीमा निश्चित करनी चाहिए थी।

बीज निरीक्षक एवं बीज के अभिलेख 

(क) बीज नियम 1968 के नियम 37 के द्वारा बीज निरीक्षक भार डाला गया है कि उसमें जो सैंपल लिए हैं उन्हें चूहों, भंडार कीटों से सुरक्षित रखने हेतु आवश्यक कदम उठाए और बीज सैंपल में अंकुरण प्रभावित न हो उसे शुष्क वातावरण में रखें परन्तु सैंपल और रिकॉर्ड रखने का समय निर्धारित नहीं है। सैंपल भंडारण के लिए शुष्क वातावरण अर्थात् 18 डिग्री तापमान एवं 50% RH-Relative Humidity सापेक्ष आद्र्रता नहीं मिल पाती। सैंपल भंडार कीट मुक्त हो यह अपेक्षा नहीं की जा सकती और नमूने को सीएसटीएल से टेस्ट कराया जाए तो उसमें सफलता नहीं मिलेगी।

(ख) बीज निरीक्षक द्वारा रिकॉर्ड रखने की समय सीमा नहीं रखी गई है अत: उसके लिए गए सैंपल, उनके परिणाम न्यायालय में किए गए वादों का रिकॉर्ड रखना चाहिए। 

बीज अभिलेख एवं बीज विक्रेता 

बीज विक्रेता को बीज नियंत्रण आदेश 1983 के बिन्दु 2 (c) में परिभाषित किया गया है कि वह व्यक्ति जो स्वयं या अभिकर्ता के द्वारा बीज बेचने, आयात करने या निर्यात करने का कार्य करता हो विक्रेता कहलायेगा। इसी प्रकार बीज उत्पादक भी बीज बेचने, निर्यात आयात करने के कारण विक्रेता की परिभाषा में आ जाते हैं। 

लेबल बीज उत्पादन के रिकॉर्ड 

निजी बीज उद्योगी लेबल बीज उत्पादन के रिकॉर्ड नहीं बनाते। ब्रीडर फाउंडेशन बीज के स्त्रोत, बीज उत्पादकों का रिकॉर्ड, रा सीड की आवक, उसका प्रोसेसिंग, पैकिंग, बीज की टेस्टिंग का पूर्ण एवं क्रमबद्ध रिकॉर्ड नहीं रखा जाता। यह रिकॉर्ड अभियोजन एवं उपभोक्ता संरक्षण न्यायालय में साक्ष्य के रूप में काम आता है। अभी तक बीज उत्पादक लेबल बीज की गुणवत्ता एवं रिकॉर्ड बनाने को प्रमाणित बीजों से कमतर आंकते हैं परन्तु अनुवांशिक शुद्धता एवं अन्य बीज प्रमाणीकरण मानक 2006 से समान है अत: बीज उद्योगी को लेबल बीज का पक्का रिकॉर्ड बनाना चाहिए। 90 प्रतिशत लेबल बीज बिना सीड टेस्टिंग लैब में टेस्ट कराए विक्रय होता है जो खतरे की घंटी है। बीज उद्योग में रिकॉर्ड बनाना एक सुरक्षा कवच है जैसे दो पहिया वाहन चलाते समय हेलमेट पहनना आवश्यक है वास्तव में बिना रिपोर्ट बनाएं या आधे-अधूरे रिकॉर्ड बनाकर व्यापार करना ऐसा है मानों बिना पतवार एवं बिना दिशा सूचक के जहाज चलाना।

Seed business without proper record is like
sailing of ship without compass and rudder.

  • आर.बी. सिंह, एरिया मैनेजर (सेवानिवृत्त)
  • नेशनल सीड्स कार्पोरेशन, 70 ई, गली नं.  11, जवाहर नगर, हिसार (हरि.)
  • मो.: 9466746625 
  • rbsinghhiffdc@gmail.com
Share On :

Follow us on

Subscribe Here

For More Articles

Releated Articles