सोयाबीन में पोषक तत्वों की फसल को आपूर्ति क्या डीएपी देने से ही हो जाती है।

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समाधान-

  • सोयाबीन में डीएपी से सभी पोषक तत्वों की आपूर्ति नहीं होती है। डीएपी में 18 प्रतिशत नत्रजन व 46 प्रतिशत स्फुर (फास्फोरस) रहता है और वह इन्हीं दो तत्वों की आपूर्ति करता है।
  • सोयाबीन के बीजों में 40 प्रतिशत प्रोटीन रहता है जिसको बनाने के लिए नत्रजन एक आवश्यक तत्व है। इसके लिए फसल को लगभग 250 किलो प्रति हे. नत्रजन की आवश्यकता होती है। 20 किलो प्रति हे. नत्रजन उर्वरक के रूप में देते हैं। इसकी शेष मात्रा लगभग 230 किलो प्रति हे. सोयाबीन के पौधों की जड़ों की गांठों में स्थित राइजोबियम बैक्टीरिया वातावरण से अवशोषित कर पौधों को उपलब्ध कराते हैं।
  • नत्रजन व स्फुर के अतिरिक्त अब सोयाबीन में कहीं - कहीं पोटाश की कमी भी नजर आ रही है। इसकी कमी के कारण पौधों की पत्तियों के बाहरी किनारों पर पीलापन दिखाई देता है। इसकी आपूर्ति के लिए आप 20 किलो म्यूरेट ऑफ पोटाश प्रति हेक्टेयर के मान से अवश्य दें।
  • सोयाबीन व अन्य तिलहनी फसलों में इन तत्वों के अतिरिक्त गंधक (सल्फर) को भी आवश्यकता होती है क्योंकि गंधक तेल बनाने की प्रक्रिया का एक आवश्यक तत्व है। इसकी आपूर्ति आप बिना अतिरिक्त खर्च के स्फुर की आपूर्ति डीएपी के स्थान पर सिंगल सुपर फास्फेट से करने लगे। इसमें 16 प्रतिशत स्फुर के साथ 12 प्रतिशत गंधक भी रहता है जो सोयाबीन में गंधक की आवश्यकता के लिए पर्याप्त है।

- समर सिंह, सीहोर

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