सोयाबीन में बीजोपचार का क्या कोई लाभ है ?

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समाधान - अधिकांश किसान सोयाबीन की खेती वर्षों से एक ही खेत में करते चले आ रहे हैं। लगातार खेती होने के कारण सोयाबीन के खेतों में सोयाबीन फसल के रोगों के जीवाणु, फफूंद भी भूमि व बीज में स्थापित हो गये हैं। सोयाबीन फसल के रोग भूमि व बीज जनित रहते हैं। फसल को रोगों से बचाने के लिए हमें भूमि तथा बीज जनित रोगों से फसल को बचाना होगा अत: बीजोपचार लाभकारी होगा।

  • पौधों की प्रारम्भिक अवस्था में रोगों से बचाने के लिए बीज उपचार एक कम खर्च का साधन है। इसलिए बीज उपचार आवश्यक है।
  • सोयाबीन के बीज को भूमि जनित रोगों से बचाने के लिए थायरम 2 ग्राम प्रति किलो बीज तथा बीज जनित रोगों से बचाने के लिए कार्बोक्सिन 2 ग्राम प्रति किलो बीज से उपचारित करें। 
  • थायरम तथा कार्बोक्सिन का मिश्रण बाजार में भी उपलब्ध करा रही है। इसका 2 ग्राम प्रति किलो बीज का उपयोग करने से फसल 20-25 दिन तक रोगों से सुरक्षित रहती है और प्रारम्भिक अवस्था में रोग के कारण नहीं मरते। बीजों का अंकुरण भी एक समान होता है। 
  • इससे उपचार 1-2 माह पूर्व भी किया जा सकता है।

- रमेश वर्मा, विदिशा

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