मानसून का इंतजार, किसान-विक्रेता बेकरार

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इंदौर। प्रदेश के किसानों को खरीफ फसल के लिए मानसून का बेसब्री से इंतजार है। जबकि खाद - बीज विक्रेताओं की स्थिति भिन्न है। निमाड़ क्षेत्र के दुकानदार व्यस्त हैं, तो मालवा क्षेत्र में फिलहाल माहौल सुस्त है। यह खुलासा कृषक जगत द्वारा विक्रेताओं से की गई चर्चा में हुआ। निमाड़ में कपास बीज की मांग है। मिर्च के प्रति रुझान कम है और मक्का बीज की मांग बारिश होने पर बडऩे की सम्भावना है।

मंडलेश्वर जिला खरगोन के मोनिका ट्रेडर्स के श्री महेंद्र कुशवाह के अनुसार  इस साल कपास का रकबा बढ़ गया है। यहां के 90 प्रतिशत किसान कपास की खेती करते हैं। कपास बीज रासी 659 की मांग अधिक होने से पूर्ति नहीं हो पा रही है। इसका 450  ग्राम के पैकेट का मूल्य 730 रु. निर्धारित है। इसके अलावा यूएस 4708, 7067 और धान्या  8255 की भी मांग है। मिर्च में कलश और बीएएसएफ के उत्पाद पसंद किए जा रहे हैं। मक्का बीज की मांग बारिश होने पर निकलेगी। जबकि कृषि कल्याण केंद्र, बड़वाह के सब्जी बीज विक्रेता श्री विकास दो साल से गाँधी नगर (गुजरात) से लाई गई भिंडी, गिलकी, तुरई आदि सब्जियों के विभिन्न किस्में बेचते हैं। उनके अनुसार इन किस्मों से किसानों को अच्छा मुनाफा हो रहा है, इसलिए ये पसंद की जा रही है। सांवरिया कृषि सेवा केंद्र खरगोन के श्री धर्मेंद्र यादव ने भी रासी 659 बीज की भारी मांग के विपरीत कमी को स्वीकारा। हालांकि धान्या, मनीमेटर, मोक्ष, गंगा कावेरी, गोल्डकार्ड ब्रांड भी चल रहा है। मिर्च के प्रति किसानों का रुझान कम है। मुख्यत: सूक्ष्म सिंचाई सामग्री बेचने वाले श्री यादव की शिकायत है कि सरकार ने ड्रिप इरिगेशन के लक्ष्य अब तक तय नहीं किए, जबकि अभी इसकी जरूरत है। बारिश हो जाने पर खेतों में फिटिंग नहीं हो पाएगी। इससे किसानों को नुकसान होगा। यह समस्या हर साल की है। कायदे से मई-जून तक लक्ष्य तय हो जाने चाहिए। स्मरण रहे कि ड्रिप इरिगेशन के प्रकरणों में किसानों को 50 प्रतिशत का अनुदान दिया जाता है।

नाथ सीड्स वाली कपास किस्मों की मांग भी निमाड़ क्षेत्र में जोरों पर है। नाथ की कर्ण-2, द्रोण-2 किसानों में पापुलर है और मांग में तेजी है।

बड़वानी जिले के अंजड़ स्थित बंटी इंटरप्राइजेस के श्री राजेश खंडेलवाल ने कपास का रकबा 15 -20 प्रतिशत बढऩे की संभावना जताई है। रासी 659, मोक्ष, मनीमेटर आदि की अच्छी मांग है। लेकिन बीजों की ऑनलाइन बिक्री शुरू होने से धंधे पर असर पड़ा है। जबकि मंडवाड़ा के श्रीकृष्णा कृषि सेवा केंद्र के श्री मोहित मोगरे के अनुसार सभी किस्मों के कपास बीज उपलब्ध हैं। क्षेत्र में कपास का 80 प्रतिशत  रकबा बड़ा है। इधर मिर्च के प्रति किसानों का रुझान कम है, लेकिन लोनसरा , बालकुंआ की तरफ मिर्च अधिक लगाते हैं। महाशक्ति ट्रेडर्स, मनावर जिला धार के श्री अमृत पाटीदार ने कहा कि रासी 659 कपास बीज की कमी है। नुजीवीडू ,गोल्डकार्ड भी चल रहा है। सिंजेंटा 1240 की भी मांग है। बारिश होने पर मक्का में मांग निकलेगी।

इधर मालवा क्षेत्र में श्री हरि ट्रेडर्स, देपालपुर के श्री जेपी नागर का कहना है कि इस क्षेत्र में मुख्यत: सोयाबीन की फसल ली जाती है। जिसमें कम पानी में 80-85  दिन में पकने वाली पसंदीदा किस्मों में 6124,1244 और 1025 शामिल है, ताकि बाद में रबी की तैयारी भी की जा सके। शुरुआत में खरपतवार नाशक की बिक्री ज्यादा होती है। डीएपी और सुपर फास्फेट की भी मांग रहती है। 10-12  दिन बाद मानसून के आते ही धंधा जोर पकड़ेगा। वहीं म.प्र.बीज एवं कीटनाशक विक्रेता संघ के प्रांतीय सचिव श्री संजय रघुवंशी ने बताया कि अभी तो धंधे का माहौल सुस्त है। मानसून के आने पर 15 जून के बाद स्थितियां बदलेंगी। बीजों की ऑनलाइन बिक्री पर उन्होंने कहा कि ई-फसल के बाद अब ई-काउंटर के जरिए गांवों की दुकानों तक माल पहुंचाए जाने से प्रतिस्पर्धा बड़ी है, इससे छोटे व्यापारी परेशान हैं।

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