नेट हाउस में उपजायें खीरा

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साधारणत: खीरा उष्ण मौसम की फसल है। वृद्धि की अवस्था के समय पाले से इसको अत्यधिक हानि होती है। फलों की उचित वृद्धि व विकास के लिए 20-25 डिग्री से.ग्रे. का तापक्रम उचित होता है। प्राकृतिक वायु संवाहित नेट हाउस में एक वर्ष में खीरे की तीन फसलें पैदा करके अत्यधिक लाभ लिया जा सकता है। यह तकनीकी बड़ी व मध्यम जनसंख्या वाले शहरों के चारों ओर खेती करने वाले कृषकों के लिये बहुत लाभकारी व उपयोगी हो सकती है।

भूमि व उसकी तैयारी 

नेट हॉउस के अन्दर बीज की बुआई से एक माह पहले खेत की गहरी जुताई करके भूमि को अच्छी प्रकार तैयार करें तथा भूमि से विभिन्न प्रकार के रोगाणुओं व कीटाणुओं के निदान के लिए मिट्टी को फार्मेल्डीहाइड के घोल से उपचारित करें। नेटहाउस की मिट्टी को पारदर्शी पॉलीथिन (25 माइक्रान मोटाई) से लगभग 15 दिन तक ढककर खुली धूप आने दें जिससे पॉलीथिन चादर के अंदर का तापक्रम बढ़े और गैस सरलता से कवक आदि को मार सके। इस प्रकार उपचारित मिट्टी को लगभग एक सप्ताह के लिए खुला छोड़ देें तथा उसको उलटते-पलटते रहें जिससे उसमें उपस्थित दवा (गैस) का अंश मिट्टी से निकल जाये तथा जब बीज की बुआई की जायें ताकि दवा का विपरीत प्रभाव पौधे की वृद्धि व विकास पर न पड़े। 

रोपाई व उसका समय 

ठीक प्रकार से बनी हुई बेड्स पर ड्रिप पाइप डालकर बीज की बुआई करें। बुआई करते समय यह ध्यान रखें कि प्रत्येक पौध को उचित दूरी पर एवं ड्रिप लाइन में उपलब्ध छिद्र के पास ही बीज को बोया जाये ताकि छिद्र से निकला हुआ जल व जल मिश्रित उर्वरक पौधों की जड़ों को पूर्ण रूप से तथा आसानी से उपलब्ध हो सके। खीरा विभिन्न मौसम के लिए उपलब्ध किस्मों के अनुसार पूरे वर्ष उगाया जा सकता है। दो उठी हुई बेड्स के बीच से दूरी 4 फीट हो तथा इसको एक ही कतार पर 30 से 40 से.मी. की दूरी पर बीज बोते है। जिससे 1000 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में 2000-2800 तक बीज लगाये जा सकते हैं। हाथ से बुवाई के बाद बूंद-बूंद सिंचाई से इसे सींचा जाता है। चार से पांच दिन में बीज अंकुरण होता है। इसके बाद पखवाड़े में तंतु निकलने शुरू होते हैं। इन तंतु को धागे (डोरी) से ऊपर लगे तार से बांधना पड़ता है, जिससे बेल सीधी ऊपर की ओर बढ़े। इसके बढऩे व फूल- फल लगने पर तीन-चार स्थानों पर क्लिप लगाने पड़ते हैं।

किस्मों का चुनाव

साधारणतया नेटहाउस में ऐसी किस्मों का चुनाव किया जाता है जो कि गाइनोसियस हो (बीज रहित) तथा फल कोमल एवं मुलायम एवं उपज अच्छी हो। इन किस्मों का विकास मुख्यत: यूरोपीय देशों व इजराइल में किया गया है। कई बड़ी-बडी बीज कम्पनियां भी हमारे देश में इस प्रकार की किस्मों को उपलब्ध करा रही है। 

खीरा की संकर किस्में नेट हाउस/पाली हाउस के लिए 

काफ्का (सिंजेंटा), इंफिनिटी (नूनहेम्स), किंग स्टार, मल्टीस्टार (रिज़्क़ जवान), फारिया (इंजा जेड़ान), रिका (युकसेल) ।

पौधों की छंटाई व सहारा देना 

खीरे के पौधों को एक प्लास्टिक की रस्सी के सहारे लपेटकर ऊपर की ओर चढ़ाया जाता है। इस प्रक्रिया से प्लास्टिक की रस्सियों को एक सिरे की पौधों के आधार से तथा दूसरे सिरे को ग्रीनहाउस में क्यारियों के ऊपर 9-10 फीट ऊँचाई पर बंधे लोहे के तारों पर बांध देते हैं तथा अन्त में जब पौधा उस तार के बराबर जिस तार पर रस्सी का दूसरा सिरा बंधा होता है, तो पौधो को नीचे की ओर चलने दिया जाता हैं। तथा साथ-साथ विभिन्न दिशाओं से निकली शाखाओं की निरन्तर काट-छांट करेें। कटाई-छंटाई करते समय इस बात का अवश्य ध्यान रखें कि हमने किस किस्म को उगाया है।

पानी व उर्वरक देना

पौधों की उर्वरक व जल की मात्रा मौसम एवं जलवायु पर निर्भर करती है। आमतौर पर गर्मी में प्रतिदिन तथा सर्दी में 2-3 दिन के अंतराल पर दिया जाता है। उर्वरक पानी के साथ मिलाकर ड्रिप सिंचाई प्रणाली द्वारा दिये जाते है। नत्रजन 80 से 100 पीपीएम, फास्फोरस 60 से 70 पीपीएम तथा पोटाश 100 से 120 पीपीएम तक दिये जाते है। इनकी मात्रा को फसल की अवस्था, भूमि के प्रकार व मौसम के अनुसार घटाया व बढ़ाया जा सकता है।

उपज व तुड़ाई 

बुआई के 40 दिन बाद फसल तुड़ाई के लिए तैयार हो जाती है। ग्रीष्मकालीन व वर्षाकालीन फसल की अवधि 2.5 से 3.0 माह तक होती है जबकि सर्दी की सल की अवधि 3.0-3.5 माह की होती है। इस प्रकार के खीरे को 8 से 10 से.मी. लम्बाई व कम मोटाई में तोड़कर ग्रेडिंग करके उच्च बाजार में अधिक भाव पर बेचा जा सकता है। इस प्रकार 1000 वर्ग मीटर क्षेत्र में खीरे की बीज रहित किस्मों की तीन फसल लेकर 120 से 150 क्ंिवटल उच्च गुणवत्ता वाले फलों की उपज ली जा सकती है।
 

  • एस. के. त्यागी, वैज्ञानिक
  • कृषि विज्ञान केंद्र, खरगोन
  • मो. : 8770083621
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