दलहन उत्पादकता में सुधार जरूरी

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कृषि विश्वविद्यालय उपज बढ़ाने के अनुसंधानों में तेजी लायें 

हैदराबाद। उपराष्ट्रपति श्री एम वैंकया नायडू ने आत्मनिर्भरता अर्जित करने के लिए दलहन का रकबा और उत्पादकता बढ़ाने की अपील की है तथा कृषि विश्वविद्यालयों से उनकी उपज में सुधार लाने पर अनुसंधानों में तेजी लाने का आग्रह किया है। उपराष्ट्रपति ने गतदिनों आंध्र प्रदेश के गुंटूर में मुलार्प एवं शुष्क फली कार्यशाला पर अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान समूह की वार्षिक समूह बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि उच्च उपज वाली, रोग एवं कीटनाशक अनुकूलन बीज किस्मों के उपयोग की जरूरत है। उन्होंने कहा कि फसल उत्पादन तकनीकों में भी सुधार लाने एवं दलहन उत्पादन के तहत अतिरिक्त पड़त भूमि को लाने की जरूरत है।

यह बताते हुए कि दलहन लोगों के लिए पादप आधारित प्रोटीनों, विटामिनों एवं खनिज अवयवों का एक सस्ता स्रोत है, श्री नायडू ने कहा कि वे पशुओं के लिए हरित, पोषक चारा उपलब्ध कराते हैं और जैवकीय नाइट्रोजन निर्धारण के जरिए मृदा को भी समृद्ध बनाते हैं। 

उप राष्ट्रपति ने कहा कि हालांकि दलहन की औसत उत्पादकता बढ़कर 841 किलो/हेक्टेयर तक पहुंच गई है, फिर भी वैश्विक औसत की तुलना में यह काफी कम है और कुछ राज्यों में अन्य राज्यों की अपेक्षा उपज काफी अधिक है। उन्होंने कहा कि उत्पादकता में सुधार लाने के लिए दुनियाभर से और देश के भीतर से भी सर्वश्रेष्ठ प्रचलनों से सीखने की जरूरत है।

श्री नायडू ने कहा कि ''कृषि विश्वविद्यालयों को दलहनों की उपज में सुधार लाने पर अधिक फोकस करने की आवश्यकता है, जबकि केवीके को वैज्ञानिकों, सरकारों एवं किसानों के बीच एक सत्य के रूप में कार्य करना चाहिए।''  उन्होंने कहा कि केवीके को किसानों के मित्र और परामर्शदाता के रूप में कार्य करना चाहिए।

इस तीन दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन संयुक्त रूप से आचार्य एनजी रंगा कृषि विश्वविद्यालय एवं भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) द्वारा किया गया। इस अवसर पर आईसीएआर के डीडीजी (सीएस) डॉ. ए के सिंह, एएनजीआरएयू के कुलपति डॉ. वी दामोदर नायडू, आईसीएआर-भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान, कानपुर के निदेशक डॉ. एन पी सिंह, एएनजीआरएयू के अनुसंधान के निदेशक डॉ. वी एन नायडू एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे।  

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