फल-फूल, सब्जी की खेती से लाखन हुए मालामाल

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(रामस्वरूप लौवंशी)

दतिया। दतिया जिले के सेवढ़ा विकासखंड के ग्राम भरसूला के 74 वर्षीय बुजुर्ग कृषक श्री लाखन सिंह रावत ने अपने 28 बीघा जमीन को स्वर्ग बना रखा है। यहां आपने फल-फूल के हर तरह के पौधे लगाये हैं। आपने अपने लगभग 5 बीघा जमीन पर लगभग 400 फलदार पौधे लगाये हैं, जिनमें कटहल, चन्दन, नींबू, मौसम्बी, संतरा, अनार, नारियल, केला, चीकू, छुआरे, बादाम, पपीता, अंगूर, आंवला, चिली, चकोतरा, सीताफल, इलायची छोटी, इलायची बड़ी, सुपाड़ी के पौधे शामिल हैं। आम के पौधे भी हैं जो लंगड़ा और कल्मी किस्म के हैं इन्हें लखनऊ से लाकर लगाये हैं। कटहल के 50 पेड़ लगभग 20 साल पुराने हैं, जो दस वर्षों से फल दे रहे हैं। कटहल, केला, अमरूद और चन्दन के पौधे मद्रास से खरीद कर लाये। कटहल का अच्छा बड़ा फल लगभग 15 किलोग्राम का होता है। इसके अलावा 1 बीघा में गुलाब एवं 1 बीघा में गेंदा एवं सतरंगी लगे हैं, जिनको डबरा बाजार में विक्रय करते हैं। लोग खेत से भी खरीद ले जाते हैं। केला के पौधे चैन्नई से खरीद कर लाये हैं। केले के पौधे की खासियत यह है कि इनकी उंचाई सिर्फ 5 फीट है एवं एक पौधे से लगभग 20-25 किलो फल प्राप्त होते हैं।

शांत एवं सरल स्वभाव के कृषक श्री लाखन रावत को उनके स्वभाव के कारण ही 1983 में निर्विरोध सरपंच बनाया और आपने 10 वर्षों तक का कार्यकाल निर्विरोध सरपंच के रूप में किया, इसके बाद 2004 से 2009 तक आप सेवढ़ा कृषि उपज मंडी के सदस्य रहे। 10 वर्षों तक आप शुगर मिल डबरा के अध्यक्ष पद पर रहे एवं 5 साल तक सदस्य रहे। वर्तमान में भी आप भरसूला वन मण्डल समिति के अध्यक्ष हैं। बागवानी के उत्कृष्ट कार्य एवं पर्यावरण को बचाए रखने के लिए आपको मध्य प्रदेश शासन द्वारा उद्यानिकी प्रदर्शन प्रतियोगिता में सन् 2014-15 में पपीता, आंवला, अमरूद, गुलाब, अनार, मौसम्बी, धनिया के लिए प्रथम पुरस्कार से सम्मानित किया। मार्च 2015 में ही भिण्डी एवं टमाटर उत्पादन में उद्यानिकी प्रदर्शनी में द्वितीय पुरस्कार मिला।

श्री रावत ने अपने खेत पर फल-फूल के पौधों के साथ-साथ गौवंश का पालन भी किया है, आपके पास चार गाय है, जिनका दूध स्वयं अपने घर के उपयोग में लेते हैं। आपकी 74 वर्ष की उम्र में भी इतनी तंदुरुस्ती  इसीलिए है क्योंकि आप शुद्ध गाय का दूध एवं घी का उपयोग करते हैं, 20 बीघा जमीन पर आप गन्ना लगाते हैं। गन्ने की फसल को एक बार लगा देते हैं फिर चार साल तक फसल काट सकते हैं।

श्री रावत ने बताया कि फल एवं फूल पर साल भर में कुल 50 हजार का खर्च आता है एवं आमदनी लगभग 2 लाख रुपए की होती है। शेष 20 बीघा में गन्ना पर लगभग 50,000 का खर्च आता है एवं गन्ने से लगभग 4 लाख रुपए की आमदनी होती है। यानि श्री रावत अपनी 28 बीघा जमीन से खर्च काटने के बाद लगभग 5 लाख रुपए का शुद्ध लाभ कमाते हैं। 

आपके साथ आपके परिवार के 8-10 सदस्य किसानी कार्य में सहयोग करते हैं। कृषि यंत्रीकरण में आपके पास सन् 1980 में खरीदा एचएमटी ट्रैक्टर 2511 है जिससे आप अपना कृषि कार्य करते हैं। जमीन की सिंचाई के लिए दो ट्यूबवेल, 1 कुआ है और नहर के द्वारा सिंचाई करते हैं। अधिक जानकारी के लिए मो. : 9826655181 पर संपर्क किया जा सकता है।

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