सल्फर मिल्स के उत्पादों का 80 देशों में निर्यात - श्री शाह

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इंदौर।  सल्फर मिल्स के चैनल पार्टनर्स की  कम्युनिकेशन मीट में शामिल होने गत दिनों इंदौर आए कम्पनी के चेयरमैन और एमडी श्री दीपक शाह से कृषक जगत के निदेशक श्री सचिन बोन्द्रिया ने विशेष बातचीत की, जिसमें श्री शाह ने कम्पनी की आगामी कार्ययोजना, नए उत्पाद, आयात और बाजार की वर्तमान स्थिति पर रोशनी डाली। इसके पूर्व मीट में  टेक्नोजेड  नामक नया उत्पाद लांच किया गया, जिसका गत वर्ष ट्रायल लांच किया गया था।

श्री शाह ने बताया कि  कम्पनी के उत्पाद मुख्यत: सल्फर अथवा सल्फर आधारित होते हैं। सल्फर मिल्स के उत्पादों का दुनिया के 80 देशों में निर्यात होता है। इनमें ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, यूएस, यूरोप और ब्राजील शामिल हैं। अंतिम तीन देशों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया है। उच्च सुरक्षा मानकों के साथ पेटेंटेड उत्पाद भेजे जाते हैं। करीब 18 साल पहले डब्ल्यूडीजी में पहली बार उत्पाद बनाने का श्रेय भी इसी कम्पनी को जाता है। डब्ल्यूडीजी में सल्फर की उत्पादन क्षमता अब एक लाख टन तक पहुँच गई है। भारत में सल्फर का मार्केट शेयर करीब 50 प्रतिशत है।

गत वर्ष 12 प्रतिशत की ग्रोथ करने वाली सल्फर कम्पनी का टर्न ओवर 1450 करोड़ रु. रहा था। सल्फर की दोनों कंपनियों के 8 उत्पादन संयंत्र हैं जिनमें  पांच पानोली अंकलेश्वर में, एक महाराष्ट्र में न्यू बॉम्बे के ग्राम तुरबे में, एक वापी गुजरात में और एक जम्मू के साम्बा में है। भारत में 11वां स्थान हासिल करने वाली इस कम्पनी का  रिसर्च एंड डेवलपमेंट का केंद्र नेरुल (मुंबई) में है। नए फार्मुलेशन में शत-प्रतिशत निर्यात करने वाली सल्फर का करीब 60 प्रतिशत देश से निर्यात होता है।

 माइक्रो एंड केप्सुलेशन के बारे में एमडी श्री शाह ने बताया कि इसका टेक्निकल अंदर रहता है इस कारण वह दिखता नहीं है। उसका कोटिंग करने से पौधा सुरक्षित रहता है। गंध अच्छी होने से कीट इसे खाता है, लेकिन तुरंत नहीं मरता है। इसके  पेट के अंदर जाने पर पीएच 9 के खुलते ही कीट मर जाता है। माइक्रो एंड केप्सुलेशन में सल्फर कम्पनी डिले रिलीज, इंस्टेंट रिलीज और कंटिन्युअस रिलीज जैसे अलग -अलग टाइप के प्रोडक्ट भी बना सकती है। इससे स्प्रे का अंतराल बढ़ जाता है और लागत कम आती है।

इस क्षेत्र में चाइना के सस्ते उत्पाद की चुनौतियों पर श्री शाह ने कहा कि भारत की कंपनियां धीमी गति से ही सही, लेकिन अच्छा विकास कर रही है। सरकार को रजिस्ट्रेशन देने की प्रक्रिया को सरल करने की जरूरत है। यदि सरकार की नीतियां सही रही तो कुछ नए निर्देश मिल सकते हैं। भारत में अवसर की बहुलता का कारण बताते हुए श्री शाह ने यह नई जानकारी दी कि स्विट्रलैंड जैसा 8 -9 मिलियन की जनसंख्या वाला छोटा सा देश 100 बिलियन डॉलर का अलग -अलग केमिकल्स  बनाता है, जबकि भारत जैसा बड़ा देश सिर्फ 43 बिलियन डॉलर का निर्यात कर रहा है। जबकि चीन का निर्यात करीब 80 बिलियन डॉलर है। डब्ल्यूडीजी की भारत में पूर्ण स्वीकार्यता नहीं होने को स्वीकारते हुए श्री शाह ने इस विषय पर और कार्य करने की बात कही।

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