नर्मदा जल बनेगा किसानों के लिए संजीवनी

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क्षेत्र में लगातार घटता जा रहा भूजल स्तर

(जे.पी. नागर)

देपालपुर।  देपालपुर क्षेत्र के आमजनों  और मवेशियों को गर्मियों के दिनों में पीने के पानी की समस्या का सामना करना पड़ता है। इसका कारण यहां और इसके आसपास के इलाके में बेतहाशा खोदे गए बोरिंग से अति जल दोहन के कारण भू जल स्तर का लगातार गिरना है। लेकिन  इन दिनों ऐसे मुश्किल हालातों में नर्मदा-शिप्रा लिंक परियोजना के परीक्षण कार्य के दौरान बह रहे जल का सदुपयोग कर जल संकट का समाधान खोज कर कई किसानों ने तीसरी फसल की तैयारी भी कर ली है।

उल्लेखनीय है कि पहले पेय जल और सिंचाई के स्रोत कुँए या बावड़ी हुआ करते थे। 40-50  फीट की गहराई में अपनी जरूरत का पानी मिल जाता था। लेकिन वक्त बदला तो इनकी जगह हैण्ड पंप और बोरिंग ने ले ली, जिसके कारण भू जल स्तर में गिरावट का दौर शुरू हो गया। चंबल नदी के किनारे वाले गांवों में 300  से 400  फीट और गोकलपुर, बिरगोदा, मुरखेड़ा, फरकोदा, काकवा, काई आदि गांवों में जल स्तर 500 से 700 फीट नीचे जा पहुंचा है। देपालपुर बनेडिया तालाब से लगे गांवों में जल स्तर का 150 -200  फीट नीचे पहुंचना चिंताजनक है। इस तरह तकीपुरा, जलोदियापंथ, बरोदापंथ, खजराया और चांदेर क्षेत्र के बोरिंग भी बढ़ती गर्मी के कारण पानी का साथ छोड़ते जा रहे हैं। ऐसे मुश्किल हालातों में नर्मदा -शिप्रा लिंक परियोजना का परीक्षण कार्य ने यहां के लोगों को जल संकट से मुक्ति दिलाई है।

बता दें कि  देपालपुर क्षेत्र में  नर्मदा-शिप्रा लिंक परियोजना का परीक्षण कार्य जारी है। पाइप लाइन की चेकिंग के दौरान वाल्वों से छोड़े जा रहे पानी का उपयोग किए जाने से लोगों को राहत मिली है। जिन किसानों की कृषि भूमि इन वाल्व के पास है, उन्होंने गेहूं-चने की फसल के बाद फिर से नई फसल लगा दी है। देपालपुर चिमनखेड़ी के किसान विपिन पटेल कहते हैं कि नर्मदा का जल आने के बाद उन्होंने 30  बीघा में पहले आलू और फिर गेहूं लिए। इसके बाद प्याज की फसल भी ले ली है। हालांकि तीन फसल तो पहले भी लेते थे, लेकिन उत्पादन कम रहता था। वहीं मुरखेड़ा के किसान श्री विजय नागर का कहना है कि नर्मदा जल के आने से जल स्तर में वृद्धि हुई है। स्मरण रहे कि खेड़ी रोड पर करीब 10  बीघा क्षेत्र वाली तलाई सामूहिक जन श्रम से बनाई गई नाली के जरिए  नर्मदा जल से पूरी तरह भरी होने के कारण  बोरिंग और कुँओं का जल स्तर बड़ा है। जबकि दूसरी ओर पीएचई के एसडीओ श्री राजेश उपाध्याय के अनुसार देपालपुर क्षेत्र में गिरते भू जल स्तर के कारण करीब 550 हैण्ड पंप अभी बंद पड़े हैं।

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