जैविक से जीवन संवारते ब्रजराज

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सफलता की कहानी

(प्रकाश दुबे)

बांरा (राजस्थान)। आराम की जिंदगी जिसमें खाना खाओ और दिन भर मस्त रहो, की जिन्दगी जीने से शरीर में गतिशीलता नहीं रहती, जिससे बीमारियों का प्रकोप भी होता है। व्यक्ति पैदल भी एक किलोमीटर नहीं चल सकता। यह एक सत्य है और इसके गवाह ग्राम कटावर जिला-बांरा राजस्थान के श्री ब्रजराज गौड़ हैं। 12 वर्ष पूर्व अपनी पुस्तैनी 19 हेक्टेयर भूमि को लीज पर देकर आरामदायक जीवन जी रहे श्री ब्रजराज को 38 वर्ष की आयु में ब्लड प्रेशर की बीमारी हुई तो ज्ञात हुआ रसायनिक खाद्यान्न सेवन, आरामदायक जीवन इसका कारण है। तभी से इन्होंने स्वयं अपनी खेती की भूमि संभाली। 4 भैंस, 6 गायों के साथ जैविक तरीकों से खेती प्रारंभ की। धीरे-धीरे जैविक खेती को आगे बढ़ाते आज अर्धशतक पार कर रहे श्री ब्रजराज 5 किलोमीटर भी पैदल चलने से नहीं थकते। अपने साथ ही समीपस्थ ग्रामों के लगभग 50 कृषकों का समूह बनाकर 150 एकड़ क्षेत्र में जैविक खेती करते हैं। जैविक तरीके से उगाये अनाज को जयपुर, कोटा आदि स्थानों के बाजारों में 30 प्रतिशत प्रीमियम भावों पर श्री महाकाल आर्गेनिक इंडिया के नाम से उपलब्ध कराते हैं। मुख्यत: ग्राम में भी अच्छी कीमत अनाजों की मिलती है। उत्पादन भी भरपूर होता है। जैविक तरीकों में वर्मी कम्पोस्ट, डी- कम्पोस्ट, जीवा अमृत, घना अमृत, जैविक कीटनाशक, जैविक ग्रोथ प्रमोटर आदि उपलब्ध गौमूत्र से तैयार कर फसलों में उपयोग करते हैं। इन फसलों में खरीफ की सोयाबीन, मूंग, उड़द, धान, मक्का, मूंगफली लगाते हैं। रबी की गेहूं, चना, मटर, अलसी, सरसों, किनोवा आदि लगाते हैं। शहर के ग्राहकों के लिए सब्जियों में टमाटर, भिंडी, करेला, टिंडा, गिलकी, कद्दू, तरककड़ी, ग्वारफली की खेती करते हैं एवं मल्चिंग तकनीक का प्रयोग भी सब्जी उत्पादन में करते हैं। श्री ब्रजराज को कृषक संगोष्ठियों में मार्गदर्शक, सलाहकार के तौर पर भी आमंत्रित किया जाता है। कृषक जगत के पाठक अन्य जानकारी के लिए श्री ब्रजराज गौड़ के मो. 9829629125 पर सम्पर्क कर सकते हैं।

राजस्थान सरकार ने पुरस्कृत किया

श्री ब्रजराज को जैविक खेती में उल्लेखीय कार्य के लिए राजस्थान सरकार ने सम्मान भी दिया है। आपने बताया कि जीवा अमृत बनाने में 200 लीटर पानी में 12 किलो गोबर, 12 लीटर गौमूत्र, 2 किलो गुड़, 2 किलो बेसन, बड़ या पीपल पेड़ के नीचे की 1 किलो मिट्टी सभी को 5 दिन मिलाकर बाद में अगले 10 दिनों के लिए खड़ी फसल में छिड़काव के अच्छे परिणाम मिलते हैं।

 

जैविक पौध संरक्षण

सोयाबीन फसल में तम्बाखू इल्ली नियंत्रण हेतु गौमूत्र, लहसुन, हरी मिर्च, तम्बाखू का घोल बनाकर छिड़काव किया जाता है। श्री ब्रजराज ने जैविक खेती अपनाकर सेहत, शरीर तो ठीक किया साथ ही उत्पादित अनाज से समाज को भी स्वस्थ कर रहे हैं। जैविक खेती से लगी लगन और दिखी आशा की किरण ने इनका जीवन की धारा ही बदल दी। 

 

सौर ऊर्जा का किया उपयोग

खेत में सभी आधुनिक संसाधन जिनमें सौर ऊर्जा से 5 एचपी की मोटर दिन भर चलाना, ड्रिप स्प्रिंकलर प्रणाली का उपयोग, उद्यानिकी फसलों का उत्पादन आदि के साथ खेती से एक वर्ष में 15 से 20 लाख की आमदनी 4 से 5 लाख व्यय कर करते हैं। 

 

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