देश में 6 जून को आएगा मानसून पूर्वानुमान

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भारतीय मौसम विभाग का अनुमान

मानसून में देरी का मतलब वर्षा में कमी नहीं

नई दिल्ली। भारतीय मौसम विभाग ने दक्षिण-पश्चिम मानसून केरल के तट पर 6 जून को पहुंचने का पूर्वानुमान जताया है। इसका मतलब है कि मानसून देश में दस्तक देने की सामान्य तिथि से थोड़ी देरी से पहुंचेगा। हालांकि विभाग ने यह माना है कि उसके अनुमान में 4 दिन की घटत-बढ़त हो सकती है, इसलिए मानसून भारत में 2 जून से 10 जून के बीच किसी भी दिन पहुंच सकता है। वहीं मौसम का पूर्वानुमान जारी करने वाली निजी एजेंसी स्काईमेट ने 4 जून को मानसून केरल तट पर पहुंचने का अनुमान जताया है। मानसून की देरी से किसानों को चिंतित होने की जरूरत नहीं। देर से आएगा परन्तु बारिश कम नहीं होगी।

उल्लेखनीय है कि भारत में चार महीने के बारिश के मौसम की शुरुआत दक्षिण पश्चिम-मानसून से होती है। यह मानसून भारत में हर साल सामान्यत: एक जून को केरल तट पर दस्तक देता है। विभाग के अनुसार दक्षिण पश्चिम मानसून के लिए अंडमान सागर और निकोबार द्वीप के दक्षिणी इलाकों तथा बंगाल की खाड़ी के दक्षिण पूर्वी क्षेत्र में 18 से 19 मई के बीच आगे बढऩे की अनुकूल परिस्थितियां बरकरार हैं। 

स्काईमेट का अनुमान

मौसम का पूर्वानुमान व्यक्त करने वाली निजी एजेंसी स्काईमेट ने दावा किया कि दक्षिण-पश्चिम मानसून सामान्य तिथि से 3 दिन बाद 4 जून को केरल तट पर पहुंचेगा। एजेंसी ने अपने पहले पूर्वानुमान को बरकरार रखते हुए मानसून के दौरान सामान्य से 7 फीसदी यानी 93 फीसदी बारिश की भविष्यवाणी की है। 

 

अनुमान के मापदंड 

  • उत्तर-पश्चिमी भारत में न्यूनतम तापमान
  • दक्षिण प्रायद्वीप पर मानसून से पहले की अधिकतम बारिश
  • दक्षिण चीन सागर पर गुजरने वाली लॉन्ग वेव रेडिएशन (ओएलआर)
  • दक्षिण-पूर्व हिंद महासागर पर निचली क्षोभमंडलीय जोनल वायु
  • पूर्वी भूमध्यरेखीय हिंद महासागर पर ऊपरी क्षोभमंडलीय जोनल हवा और दक्षिण-पश्चिम प्रशांत क्षेत्र पर ओएलआर। 

स्वतंत्र मौसम पर्यवेक्षक भी इस बार देरी से मानसून आने का अनुमान जता रहे हैं। पिछले पांच वर्षों में मानसून का प्रदर्शन यह दर्शाता है कि देरी से मॉनसून आने का यह मतलब नहीं है कि बारिश भी कम होगी। पिछले पांच वर्षों में सबसे अच्छी बारिश 2016 में हुई थी, जबकि उस साल मानसून 8 जून को आया था। वर्ष 2016 में बारिश सामान्य की 97 फीसदी रही थी। हालांकि इसका सभी क्षेत्रों में वितरण ठीक नहीं रहा। 

प्रमुख बिन्दु

  • 96 फीसदी बारिश का अनुमान
  • एक की जगह 6 जून को केरल में देगा दस्तक
  • 6 मापदंडों का इस्तेमाल कर लगाया अनुमान
  • अनुमान में 4 दिन घट-बढ़ सकते हैं

विभाग के अनुसार अगर पूवार्नुमान के मुताबिक मानसून इस साल भी देरी से आता है, तो 2014 के बाद मानसून के विलंबित होने का यह तीसरा साल होगा। इससे पहले में पांच जून और 2016 में आठ जून को मानसून ने केरल तट पर दस्तक दी थी। पिछले साल मानसून, नियत समय से तीन दिन पहले, 29 मई को केरल तट पर आ गया था। इसके बावजूद देश में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई थी। इसी तरह 2017 में 30 मई को मानसून की दस्तक के बाद भी बारिश की मात्रा औसत स्तर की 95 प्रतिशत ही रही थी। विभाग ने अप्रैल में जारी पूर्वानुमान में दक्षिण पश्चिम मानसून में लगभग सामान्य बारिश होने का अनुमान व्यक्त करते हुए इसके 96 प्रतिशत तक रहने की संभावना जताई थी जबकि स्काईमेट ने इसके सामान्य से कम 93 प्रतिशत रहने का अनुमान व्यक्त किया है। अभी तक मौसम विभाग मानसून आने के अनुमान में काफी सटीक रहा है। पिछले 14 वर्षों के दौरान मानसून आने की तारीख का अनुमान केवल एक बार गलत साबित हुआ है। 

  पूर्वानुमान वास्तविक बारिश
वर्ष तिथि तिथि फीसदी
2014 5 जून 6 जून 88
2015 30 मई 5 जून 86
2016 7 जून 8 जून 97
2017 30 मई 30 मई 95
2018 20 मई 29 मई 91
2019 6 जून - 96
ोत- आईएमडी    

मौसम विभाग के विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों ने कहा कि मानसून के देरी से आने का उसके पूरे देश में फैलने या सभी क्षेत्रों में फैलने पर कोई असर नहीं पड़ता है। मानसून आने की तारीख से बुआई या कृषि उत्पादन को लेकर कोई अनुमान नहीं लगाया जा सकता है। मौसम विभाग वर्ष 2005 से केरल में मानसून पहुंचने के अनुमान जारी कर रहा है। इसके लिए स्वदेशी स्तर पर विकसित सांख्यिकी मॉडल का इस्तेमाल किया जाता है। इस मॉडल में गलती का मार्जिन चार दिन है यानी चार दिन की घटत या बढ़त हो सकती है। इस मॉडल में मानसून आने की संभावित तारीख का पता लगाने के लिए छह मापदंडों का इस्तेमाल किया जाता है। 
 

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