मक्के पर फॉल आर्मी वर्म का खतरा

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बीजोपचार कर फसल बचाएं भारत सरकार ने लिखा राज्यों को पत्र

(विशेष प्रतिनिधि)

नई दिल्ली/भोपाल। देश में मक्के की खेती पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। 6 राज्यों में मक्के की खेती पर एक खतरनाक अफ्रीकी कीड़े फॉल आर्मी वर्म का प्रकोप हो चुका है। फसल बचाने के लिए केन्द्र सरकार सतर्क है। सरकार ने खरीफ के मद्देनजर सभी राज्यों एवं केन्द्र शासित प्रदेशों के कृषि एवं उद्यानिकी संचालकों, बीज प्रमाणीकरण संस्थाओं एवं बीज निगमों को पत्र लिखकर सचेत किया है तथा निर्देश दिए हैं कि बीजोपचार करने के बाद ही बोनी की सलाह दी जाए।

सरकार ने कहा है कि सभी राज्य मक्का फसल पर फॉल आर्मी वर्म की निगरानी, निरीक्षण एवं देखभाल करें। बुवाई के पहले 30 दिन काफी महत्वपूर्ण होते हैं।

मक्का फायदेमंद फसल

मक्का विश्व की एक महत्वपूर्ण फसल है। दुनिया के 160 देशों में 15 करोड़ हेक्टेयर में इसकी खेती होती है। भारत में धान और गेहूं के बाद मक्का एक प्रमुख खाद्यान्न फसल है। भारत में लगभग 93 लाख हेक्टेयर में ये लगाई जाती है। 70 प्रतिशत कारर्बोहाइड्रेट, 15 प्रतिशत प्रोटीन और अच्छी मात्रा में फाइबर मक्का में होता है। सेहत के हिसाब से मक्का काफी फायदेमंद है। मनुष्य के भोजन के साथ पशुओं के चारे, मुर्गीदाना और स्टार्च इंडस्ट्री में भी इसका इस्तेमाल होता है।

मक्के की फसल पर तेजी से फैलने वाले इस कीट की रोकथाम के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने भी बीजोपचार अनिवार्य रूप से करने की अनुशंसा की है। साथ ही कहा है कि अंकुरण होने के 2 से 3 सप्ताह बाद तक विशेष रूप से फसल सुरक्षा की जरूरत है।

मक्के की कीमत बढ़ी

मक्का फसल अत्यधिक उपयोगी होने के साथ-साथ किसानों के लिए बेहतर आय का जरिया बनती जा रही है। अधिक कीमत मिलने के कारण किसानों का रुझान भी मक्का के प्रति बढ़ रहा है। यदि खरीफ में फॉल आर्मी वर्म का नियंत्रण कर किसान बेहतर उत्पादन लेते हैं तो उन्हें अच्छी आमदनी हो सकती है। इस वर्ष मक्के के भाव में तेजी है। अगले एक-दो माह में इसका भाव 2500 रुपए क्विंटल तक पहुंचने की संभावना है। हाल ही में इसके भाव में 455 रुपए क्विंटल की वृद्धि हुई है, जबकि मक्के का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1700 रु. क्विंटल रखा गया है। इधर कृषि मंत्रालय ने भी अपने दूसरे अग्रिम उत्पादन अनुमान में 2.78 करोड़ टन मक्का उत्पादन का अनुमान लगाया है जो सालाना आधार पर लगभग 2 फीसदी अधिक है।

ज्ञातव्य है कि मक्का फसल का खतरनाक कीट, फॉल आर्मी वर्म वर्ष 2018 में देश के आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, राजस्थान, गुजरात एवं मध्य प्रदेश में देखा गया था तभी से इसकी रोकथाम के उपाय किए जा रहे हैं। पूर्व में फॉल आर्मी वर्म के नियंत्रण के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन भी किया गया था जो प्रभावित राज्यों का दौरा कर अपनी रिपोर्ट देती है। वर्ष 2016 से यह अफ्रीकन कीट वियतनाम, म्यांनमार, चीन, थाईलैंड, पाकिस्तान, श्रीलंका एवं बांगलादेश में सक्रिय था।

फॉल आर्मी वर्म का नियंत्रण

  • इस कीट से निपटने के लिए खेतों में गहरी जुताई करें।
  • इल्ली की शंखी अवस्था को नष्ट करें।
  • समय पर बुआई करें। बोने के पहले बीज को थायोमिथाक्सम से जरूर उपचारित करें।
  • मक्के के साथ मूंग-उड़द की फसल भी लगायें ताकि आपकी मक्का बची रहे।
  • आर्मी वर्म पर काबू पाने के लिए जैविक कीटनाशक के रूप में बीटी 1 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर का छिड़काव सुबह या शाम के समय करें।
  • लगभग 5 प्रतिशत प्रकोप होने पर फ्लूबेंडामाईट 20 डब्ल्यूडीजी 250 ग्राम प्रति हेक्टेयर या स्पाइनोसेड 15 ईसी 200 से 250 ग्राम प्रति हेक्टेयर या इथोफेनप्रॉक्स 10 ईसी 1 लीटर प्रति हेक्टेयर का छिड़काव करें या ऐमामेक्टिन बेंजोएट 5 एसजी 200 ग्राम प्रति हेक्टेयर 15 से 20 दिन के अंतराल से दो से तीन छिड़काव करें। अथवा कार्बोफ्यूरान 3जी 2 से 3 कि.ग्रा. प्रति हेक्टेयर का उपयोग करें।
  • मक्के पर पहला छिड़काव बुवाई के बाद 15 दिन में जरूर करें।
  • दानेदार कीटनाशकों का उपयोग याने 5 से 10 दाने पौधे की पोंगली में डालें।
  • इस तरह मक्का की फसल को फॉल आर्मी वर्म से सुरक्षित रखा जा सकता है।

उल्लेखनीय है कि खरीफ की प्रमुख फसल मक्का देश में 93 लाख हेक्टेयर में ली जाती है तथा उत्पादन 2.8 करोड़ टन होता है। देश में इतने बड़े पैमाने पर ली जाने वाली मक्का फसल की फॉल आर्मी वर्म से बचाने के लिए वैज्ञानिक रासायनिक एवं जैविक नियंत्रण के उपाय बता रहे हैं। म.प्र. में मक्के की खेती लगभग 13 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में होती है तथा उत्पादन लगभग 49 लाख टन अनुमानित है। वहीं छत्तीसगढ़ में 2.24 लाख हेक्टेयर में मक्का ली जाती है तथा उत्पादन 5.77 लाख टन होता है। इसी प्रकार राजस्थान में मक्के का क्षेत्र 9.26 लाख हेक्टेयर है तथा उत्पादन 162 लाख क्विंटल अनुमानित है।

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