वैज्ञानिकों द्वारा कृषक प्रक्षेत्र का निरीक्षण

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रीवा। कृषि विज्ञान केन्द्र रीवा के पौध संरक्षण वैज्ञानिक डॉ. अखिलेश कुमार ने पिछले दिनों रीवा के कई गांवों में भ्रमण किया। इस दौरान गर्मी की मुख्य फसलों मूँग, उर्द, प्याज, कददूवर्गीय सब्जियाँ आदि फसलों का निरीक्षण किया। 

जिनके साथ मौसम वैज्ञानिक श्री भीरेन्द्र कुमार भी उपस्थित रहे। इस दौरान मूँग एवं उर्द में चूसने व काटने वाले कीट के प्रबंधन के लिए थायोमेथोम्जाम+लैम्बडा सायहलोथ्रिन की मिश्रित दवा की 10 मिली मात्रा प्रति टंकी (15 लीटर पानी में), कद्दूवर्गीय सब्जियों में फलमक्खी प्रबंधन के लिए फूल की अवस्था पर 15 मिली मैलाथियान 200 ग्राम देशी गुड़ मिलाकर प्रति टंकी डालकर छिड़काव एवं प्याज में रोग जिसमें ऊपर से पत्ती सूखने पर क्लोरोथैलोनिल की 25 मिली मात्रा 10 मिली चिपकने वाला पदार्थ के छिड़काव के उपरांत (7 दिन बाद) प्याज की पत्ती मुडऩे पर जिसमें कीट का प्रकोप होता है के प्रबंधन के लिए इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एस.एल. की 8 मिली मात्रा 10 मिली चिपको मिलाकर छिड़काव करने से कीट एवं रोग से फसलों को बचाया जा सकता है। फसलों की कटाई उपरांत भण्डारण के लिए नये बोरों का प्रयोग व पुराने बोरों (काटन बैग) को मैलाथियान 50 ई. सी. की 3 मिली दवा प्रति लीटर पानी में मिलाकर उपचारित कर लें।
 

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