वर्षा जल संग्रहण एवं सिंचाई का वैकल्पिक स्त्रोत

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खेत तालाब 

खेत तालाब होता क्या है ? 

खेत तालाब किसान के खेत से बहकर जाने वाले पानी को खेत में ही रोकने के लिए बनाई गई जल संग्रहण संरचना है। गांव के समतल क्षेत्रों में नाले की गहराई नहीं मिल पाती है और न ही ऊंचे किनारे मिल पाते हैं। इस कारण समतल क्षेत्र में नाला बंड जैसी जल संग्रहण संरचनाएं बनाना कठिन होता है अत: समतल जगह पर खेतों में खेत तालाब सबसे अच्छा उपाय है। इस संरचना का मुख्य उपयोग खरीफ की फसल को सुरक्षा सिंचाई देना होता है। इसके आलावा कहीं-कहीं खेत तालाब से रबी की फसल भी उगाई जाती है और मछली पालन भी किया जाता है। इस तरह की संरचना पश्चिम बंगाल, आसाम, छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड और उड़ीसा में पारम्परिक तौर पर बनाई जाती है।

खेत तालाब क्यों बनाया जाता है ?

खेत तालाब बनाने का मुख्य कारण खेतों में से बहकर जाने वाले वर्षा के जल को इकठ्ठा करना है। वर्षा ऋतु में भी कई बार कई दिनों तक पानी नहीं बरसता जिसके कारण फसल को भारी नुकसान हो जाता है। फसल को इस नुकसान से बचाने के लिए खेत तालाब का उपयोग किया जाता है।

खेत तालाब कैसे निर्माण करें ?

  • ऊपर दर्शाये बिन्दुओं के आधार पर जगह तय करें। 
  • चयनित स्थान पर खेत तालाब की खुदाई का ले-आउट डालें। 
  • खुली हुई मिट्टी और तालाब के बीच 2 से 3 मी. का फासला अवश्य रखें ताकि मिट्टी फिर से खोदे हुए हिस्से में न भर जाए। इस फासले को बर्म कहते हैं। बर्म छोड़कर मिट्टी डालने के स्थान को चिन्हाकित करें। जहां मिट्टी डालना है, उस जगह की सफाई करा दें। 
  • तालाब खुदाई में यदि ऊपरी सतह की मिट्टी उपजाऊ हो तो उसे खेत में फैला दें। 
  • तालाब पूर्ण होने पर, तालाब के चारों किनारों को 1:1 से 1:2 के ढाल से काटें। 
  • यदि मिट्टी धसने की संभावना हो तो तालाब के अन्दर पिंचिंग करें। 
  • आवश्यकता होने पर निकासी में भी पिंचिंग की जा सकती है। 
  • खेत तालाब के आगे एक खंती (10& 1&1 मी.) खोदें।

डबरी निर्माण हेतु जगह का चुनाव 

  • खेत तालाब का निर्माण हर खेत में किया जा सकता है। खेत से बहकर आने वाले पानी की मात्रा के अनुसार खेत तालाब की क्षमता निर्धारित करें। 
  • खेत तालाब खेत में या खेत के आसपास बनायें ताकि सुरक्षा सिंचाई आसानी से की जा सके। 
  • जिस जगह खेत तालाब का निर्माण किया जाना है, वहां की ढलान 2 प्रतिशत से अधिक नहीं हो। आमतौर पर यह पाया गया है कि 2 प्रतिशत से अधिक ढलान में जब खेत तालाब में पानी एक तरफ इकठ्ठा हो जायेगा और दूसरी तरफ खाली रह जायेगा। इससे तालाब पर खर्च की तुलना में पानी कम रूकेगा। 
  • जिस जगह या नाली पर खेत तालाब बनाना है उसका जलग्रहण क्षेत्र 5 हेक्टेयर से अधिक न हो। 
  • जिस जगह डबरी बनानी हो वहां 3 मी. की गहराई तक अपारगम्य सतह हो। अन्यथा तुरन्त सारे पानी का रिसन हो जायेगा और खेत तालाब का मुख्य उद्देश्य सुरक्षा सिंचाई पूरा नहीं होगा।
  • डबरी निर्माण स्थल पर कम से कम 2 मीटर गहराई तक कड़क चट्टान नहीं हो, अन्यथा डबरी की लागत बहुत अधिक हो जाएगी। 
  • एक हेक्टर भूमि को सुरक्षा सिंचाई हेतु 1000 घन मीटर गहराई (10 सेमी. गहराई प्रति सिंचाई) की आवश्यकता होती है। 25& 20& 2.5 मीटर की डबरी में इतना पानी मिल जाता है। 1 हेक्टेयर (10 हजार वर्ग मीटर) के खेत में इस नाप की डबरी 5 प्रतिशत हिस्से (25&20 मी. = 500 वर्ग मी.) में बन जाती है। 
  • खेत तालाब ऐसे स्थान पर बनायें जहां अन्य कोई जल संग्रहण संरचना जैसे नाला बंड बनाने की उपयुक्त जगह न हो। खेत तालाब की प्रति घन मीटर पानी रोकने की लागत नालाबंड से अधिक होती है। 
  • विशेष परिस्तिथियों में खेत तालाब का निर्माण कुंआ और नलकूप रिचार्ज के लिए भी किया जा सकता है। ऐसे स्थान पर खेत तालाब का तल पारगम्य होना ज्यादा उपयोगी हो सकता है। 
  • ऐसे में डबरी कुएं के ऊपरी तरफ बनायें, जिससे कुएं को रिसन का लाभ मिल सके। 

 

विशेष सावधानियां

  • जिस नाली पर डबरी प्रस्तावित है, उसी नाले के ऊपर के पूरे जलग्रहण क्षेत्र का भूमि संरक्षण किया जाना चाहिए, अन्यथा डबरी में गाद जल्दी भर जाएगी। 
  • प्रथम श्रेणी की नाली या उससे भी छोटी नालियों पर डबरी बनाना अधिक उपयोगी होता है। 
  • खेत तालाब मुख्य जल निकास रेखा पर कभी भी नहीं बनायें। 
  • यदि डबरी का उपयोग निस्तार तालाब के रूप में भी हो सकता है तो डबरी के किनारे सीढ़ीनुमा रखें। 
  • ऐसे किसानों का चयन करें जिनके पास वर्तमान में सिंचाई का कोई साधन नहीं है। 
  • उथली डबरी की अपेक्षा गहरी डबरी ज्यादा उपयोगी होती है क्योंकि वाष्पीकरण कम होता है। 
  • 3 मी. से अधिक गहरी डबरी बनाने पर लागत बढ़ जाती है। इसलिए इससे ज्यादा गहरी डबरी नहीं बनायें। 
  • डबरी की निकासी जमीन की सतह पर ही रखें, तथा निकासी के तल व किनारों पर पत्थरों की पिंचिंग करें। जिससे पानी से निकास की मिट्टी कट के बह न जाए। 
  • खुदी हुई मिट्टी को 2-3 मीटर का बर्म देकर डालें। 
  • डबरी की मेड़ों की मजबूती हेतु घास तथा वृक्ष लगायें। 

 

  • परमानन्द साहू
  • प्रभाकर शुक्ला द्य विकास पगारे

    आईसीएआर, सीआईएई, भोपाल (म.प्र.)
    email : param89sahu@gmail.com

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