सिंचाई सुविधा होने पर ही गर्मी में मूंग-उड़द की खेती करें

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पन्ना। कृषि विज्ञान केन्द्र, पन्ना के डॉ. बी.एस. किरार, वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख, डॉ. आर.के. जायसवाल, डी.पी. सिंह, रितेश बागोरा ने कृषकों को सलाह दी कि सिंचाई सुविधा होने पर गर्मी में तीसरी फसल के रूप मे मूंग एवं उड़द की खेती करे। जिन किसानों के पास सिंचाई साधन है वे शीघ्र खेतों की जुताई एवं पलेवा कर मूंग-उड़द की बुवाई कर दें। वैज्ञानिकों ने बताया कि किसानों के पास उपलब्ध संसाधनों भूमि, सिचंाई स्त्रोत, मशीनरी का अधिक से अधिक उपयोग एवं परिवार सदस्यों को वर्ष भर अपने खेतों मे फसल उगाने से रोजगार के अवसर और आय दोनों में वृद्धि होगी। गर्मी में मूंग एवं उड़द की फसल कम अवधि में 65 से 70 दिनों मे पककर तैयार हो जाती है गर्मी की मूंग की उन्नत किस्म आई.पी.एम.- 02-03, एम.एच.-4, पैरी मूंग हम-12, हम-16 और उड़द की उन्नत किस्म पी.यू.-31, अजाद-3, शेखर-2 आदि किस्मों का चयन करें। बीज की बुवाई के पूर्व फफूंदनाशक दवा कार्बोक्सिन-थायरम 2 ग्राम या जैव फफूंदनाशक दवा ट्राइकोडर्मा 10 मिली/बीज की दर से उपचारित करें और भूमि मे अघुलनशील फास्फोरस को घुलनशील बनाने के लिये स्फुर घोलक जीवाणु (पीएसबी) से बीजोपचार एवं भूमि उपचार करे। बीज 8 कि.ग्रा./एकड़ प्रयोग करें। खेत को अच्छी तरह तैयार कर उर्वरक मे यूरिया 12-15 कि.ग्रा. सिंगल सुपरफास्फेट 100-125 कि.ग्रा. तथा म्यूरेट ऑफ पोटाश 10 कि.ग्रा./एकड़ बुवाई के समय मिट्टी में मिला दें। मूंग और उड़द की फसल से कृषक को गर्मी मे आय भी मिलेगी तथा भूमि की उर्वरा शक्ति एवं कार्बनिक पदार्थो में भी वृद्धि होगी। इसलिये कृषक शीघ्र मंूग एवं उड़द फसल की बुवाई करें।
 

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