मक्के पर फॉल आर्मी वर्म का खतरा बरकरार

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प्रकोप से बचाने वैज्ञानिक दल गठित

जबलपुर। मक्का फसल को फॉल आर्मी वर्म के प्रकोप से बचाने के लिये जनेकृविवि जबलपुर ने 7 सदस्यीय वैज्ञानिक दल का गठन किया गया है। इस दल में जनेकृविवि के डॉं. राजेश पचौरी प्रोफेसर कीटशास्त्र, डॉ. अमित कुमार शर्मा एसोसिएट प्रोफेसर कीटशास्त्र, डॉ. विजय पराडकर प्रमुख वैज्ञानिक शस्य विज्ञान, डॉ. ए.पी. भण्डारकर वरिष्ठ वैज्ञानिक कीटशास्त्र, डॉ. आर.डी. बारपेटे वैज्ञानिक पौध रोग, डॉ. पी.एम. अम्बुलकर वैज्ञानिक कीटशास्त्र एवं प्रदेश शासन उपसंचालक कृषि श्री जी.आर. हेडाऊ शामिल हैं। दल ने छिन्दवाड़ा जिले में ग्रीष्म कालीन मक्का फसल का खेतों में सघन निरीक्षण किया। भ्रमण के दौरान फॉल आर्मी वर्म का प्रकोप देखा गया। वैज्ञानिक दल के अनुसार ग्रीष्म मौसम में इस कीट के प्रकोप की स्थिति को देखते हुये खरीफ मौसम में प्रकोप बढऩे की पूरी संभावना है।

वैज्ञानिकों के अनुसार मक्का उत्पादन में अग्रणी छिन्दवाड़ा जिले में आगामी खरीफ मौसम में भी मक्का फसल पर फॉल आर्मी वर्म नामक कीट के आक्रमण की संभावना बनी रहेगी। देश के विभिन्न भागों- तेलंगाना, कर्नाटक, आंध्रप्रदेश, राजस्थान एवं मध्यप्रदेश में इस कीट का प्रकोप खरीफ 2018 में देखा गया। वर्तमान में कुछ क्षेत्रों में ग्रीष्म कालीन मक्का की फसल किसानों द्वारा लगाई गई है। जिसमें फॉल आर्मी वर्म का प्रकोप अधिक देखा जा रहा है। 

विशेष उल्लेखनीय है कि दल द्वारा निरीक्षित कृषक श्री नवीन सिंह रघुवंशी, ग्राम बांकानागनपुर विकासखंड चौराई के खेत में लगभग 10-12 एकड़ क्षेत्र में दो से तीन संकर मक्का किस्मों की बुआई फरवरी माह में की गई थी वहां फॉल आर्मी वर्म की प्रकोप अधिक देखा गया तथा माह दिसम्बर की बुआई वाली मक्का फसल प्रकोप कम देखा गया।

फॉल आर्मी वर्म का प्रकोप विगत खरीफ मौसम 2018 में मध्यप्रदेश के अनेक मक्का उत्पादन जिलों को प्रभावित कर चुका है। 

किसान भाई बचाव के लिए क्या करें ?

इस कीट के प्रबंधन हेतु वैज्ञानिकों ने सलाह दी है कि ग्रीष्म कालीन गहरी जुताई कर  शंखी अवस्था को नष्ट करें। समय पर बुआई करें। मानसून वर्षा के साथ बुआई करें, विलंब ना करें।  नत्रजन की मात्रा का प्रयोग अधिक ना करें। जिन क्षेत्रों में खरीफ की मक्का ली जाती है उन क्षेत्रों में ग्रीष्म कालीन मक्का ना लें तथा अनुशंसित फसल चक्र अपनायें। अन्तरवर्तीय फसल के रूप में दलहनी फसल मूंग उड़द लगायें एवं प्रारंभिक अवस्था में लकड़ी का बुरादा, राख एवं बारीक रेत पौधे की पोंगली में डालें।

जैविक उपाय

जैविक कीटनाशक के रूप में बी.टी. 1 किग्रा प्रति हेक्टयर अथवा बिवेरिया बेसियाना 1.5 ली प्रति हेक्टेयर की छिड़काव सुबह अथवा शाम के समय करें। 

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