रिलायंस फाउण्डेशन की किसानों को सलाह

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  • मूंग, उड़द में रसचूसक कीट के नियंत्रण हेतु थायोमिथाक्सिन दवा 0.3 ग्राम प्रति लीटर का घोल बनाकर छिड़काव करें।
  • रबी फसल की कटाई के उपरांत खेत की रिवर्सिवल प्लाऊ (मिट्टी पलटने वाला हल) से 10 इंच गहरी जुताई करें।
  • रबी की कटाई के पश्चात, सिंचाई की उचित व्यवस्था होने पर मक्का की जायद फसल लगा सकते हंै। 
  • ग्रीष्मकालीन मूँगफली की फसल फली बनने/दाना भरने की अवस्था में है। यह अवस्था पानी के लिए क्रांतिक अवस्था है अत: फसल में निश्चित अंतराल में सिंचाई करें। 
  • रबी फसलों की गहाई के बाद विशेषकर चना, मसूर एवं गेहंू को तरपोलीन या प्लास्टिक की चादरों पर फैलकर, तेज धूप में 2 से 3 दिन तक अच्छी तरह सुखा लें, ताकि दानों में नमी की मात्रा 12 प्रतिशत से कम हो जाए। दानों को दांत से दबाने पर कट की आवाज आये तब भंडारण करें। 

उद्यानिकी 

  • करेला की फसल में रसचूसक कीट के नियंत्रण के लिए नीम तेल 5 मिली प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। 
  • आम, अनार, नींबू आदि फलदार पेड़ों में सिंचाई की टपक पद्धति का उपयोग कर जल की उपयोगिता बढ़ा सकते हैं 
  • ग्रीष्मकालीन सब्जीवाली फसलों जैसे भिंडी एवं मिर्च फसल में सफेद मक्खी के नियंत्रण हेतु डाइमिथिएट 30 ई. सी. 700-750 एम. एल. प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें।

पशुपालन 

  • पशुओं की किलनी/जूँ से रक्षा हेतु क्लीनर/ब्यूटॉक्स 2 मिली प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर उपयोग करें।
  • पशुओं एवं मुर्गियों के निवास स्थल में बोरे लगाकर लू एवं गर्म हवा से बचाव करना आवश्यक है।

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संपर्क करें सुबह 9.30 से शाम 7.30 बजे तक

 

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