सामान्य के करीब रहेगा मानसून

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श्री के.जे. रमेश

भारतीय मौसम विभाग का पहला अनुमान

नई दिल्ली। इस साल मानसून में झमाझम बारिश हो सकती है। भारतीय मौसम विभाग ने अपने अनुमान में कहा कि जून-सितंबर के दौरान दक्षिण-पश्चिम मानसून सामान्य के करीब रह सकता है। इसके साथ ही कहा गया है कि मानसून के दौरान देश भर में बारिश का वितरण भी अच्छा रह सकता है, जिससे खरीफ सत्र में पैदावार अच्छी रहने की उम्मीद बढ़ी है। मानसूनी बारिश अच्छी होने से अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलता है और मुद्रास्फीति को भी काबू में रखने में मदद मिलेगी। मौसम विभाग ने अपना अनुमान निजी क्षेत्र की एजेंसी स्काईमेट के अनुमान जाहिर करने के कुछ दिनों बाद जारी किया है। स्काईमेट ने अनुमान लगाया था कि इस बार मानसूनी बारिश सामान्य से कम रह सकती है।

मानसून का अनुमान
श्रेणी बारिश का दायरा (एलपीेए का प्रतिशत) अनुमान (प्रतिशत)
अत्यधिक कम 90 से कम 17
सामान्य से कम 90 से 96 32
सामान्य के करीब 90 से 104 39
सामान्य से अधिक 104 से 110 10
अत्यधिक बारिश 110 से अधिक 2

नोट : एलपीए का मतलब 50 साल की अवधि के दौरान देश भर में हुई औसत बारिश से है।

- स्त्रोत : भारतीय मौसम विभाग

 मौसम विभाग के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मानसून के लंबी अवधि की औसत (एलपीए) के 96 फीसदी रहने की संभावना करीब 36 फीसदी है। एलपीए के 96 से 104 फीसदी बारिश को सामान्य माना जाता है। हालांकि मौसम विभाग ने यह भी अनुमान लगाया है कि मानसून के सामान्य से कम रहने की आशंका करीब 32 फीसदी है। मानसून के सामान्य के करीब रहने के बारे में मौसम विभाग के महानिदेशक श्री केजे रमेश ने कहा कि बारिश सामान्य के निचले दायरे में रहने का अनुमान है। 

एलपीए का तात्पर्य 50 साल के दौरान मानसून सीजन में देश भर में औसत बारिश से है। औसत बारिश पर आधारित वर्तमान एलपीए 89 सेंटीमीटर है। मानसून की तीव्रता को कम करने वाले अलनीनो की आशंका तो है लेकिन मानसून के बढऩे के साथ इसकी तीव्रता भी कम हो जाएगी। मौसम विभाग के मुताबिक मॉनसूनी बारिश के एलपीए के 90 फीसदी से कम रहने की आशंका 17 फीसदी है। इसी तरह सामान्य से अधिक बारिश की संभावना भी बहुत कम है। 

मुख्य बिन्दु

  • बेहतर खरीफ की उम्मीद बढ़ी
  • 96 फीसदी बारिश का अनुमान
  • अलनीनो का असर नहीं
  • दूसरा पूर्वानुमान मई के अंत में
  •  बारिश का वितरण अच्छा होगा

 

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