भारत के किसानों को हायटेक खेती की राह दिखाता इजराईल

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`इजराईल विश्व में कृषि मानचित्र में एक विशेष ओहदा रखता है। कृषि क्षेत्र में इजराईल की खेती की श्रेष्ठ तकनीक पद्धतियां, अनुसंधान दूसरे देशों में अपनाई जा रही हैं, कॉपी - पेस्ट की जा रही है। इजराईल द्वारा भारतीय किसानों को किस प्रकार सहयोग किया जा रहा है, इजरायली सरकार, अधिकारी, किसान, अनुसंधान केन्द्र किस प्रकार समन्वय से काम करते हैं, बाजार को लक्ष्य कर फसल लगाते हैं, इन सब विभिन्न पहलुओं पर चर्चा के लिए भारत में इजराईल दूतावास में कृषि काउंसलर श्री डैन अल्फ से कृषक जगत के निदेशक निमिष गंगराड़े ने मुलाकात की। सुधी पाठकों के लिए भेंटवार्ता यहां प्रस्तुत है |'

कृषक जगत : इजराईल ने अपने सीमित संसाधनों के साथ कृषि में दुनिया को रोल मॉडल बनाकर दिखाया। खेती से जुड़े नियम-कानून के संदर्भ में सरकार ने क्या कदम उठाए और किसानों ने इसका पालन कैसे किया ?

डैन अल्फ : इजराईल एक छोटा राज्य है जिसमें विभिन्न जलवायु, क्षेत्रों के साथ ज्यादातर विपरीत जलवायु परिस्थितियां हैं। इजराईल में अधिकांशत: रेगिस्तान, शून्य वर्षा और बहुत चरम तापमान है। वहीं इजराईल की केवल 3 प्रतिशत आबादी खेती से जुड़ी है। सरकार द्वारा स्थानीय लोगों के लिए खाद्य सुरक्षा पहला लक्ष्य था, और सरप्लस उत्पादन के लिए बाजार खोजना दूसरा लक्ष्य था। हमारे अधिकांश उत्पादों के लिए यूरोप, उत्तरी अमेरिका के प्रीमियम बाजार और इसके लिए हमने काम करना शुरू किया। जब एक तरफ आपके पास खेती करने के लिए बहुत चुनौतीपूर्ण परिस्थितियां होती हैं, और दूसरी तरफ आप अधिकतम लाभ के लिए सबसे अधिक प्रीमियम बाजारों तक पहुंचाना चाहते हैं, तो आपको वास्तव में खेती के सभी पहलुओं में विशेषज्ञ बनने की आवश्यकता है। इजराईली सरकार ने कृषि में अनुसंधान और विकास में विशिष्ट किस्मों और खेती की पद्धतियों के विकास और विस्तार चैनल के माध्यम से इसके कार्यान्वयन में भारी निवेश किया है।

ड्रिप सिंचाई इस बात का एक प्रमुख उदाहरण है कि कैसे इजऱाईल ने पानी की कमी का सामना किया है। संसाधनों का अधिकतम उपयोग और लाभ कमाना ही किसानों के लिए एकमात्र समाधान था। सरकार ने बुनियादी ढाँचे को बनाने में मदद की, जिससे किसान को खेती में उपयोग के लिए उपकरण उपलब्ध हुए। किसानों को पता होना चाहिए कि कैसे यंत्रों- उपकरणों एवं अवसरों का उपयोग करना है। वे मुद्दों को कैसे आगे बढ़ाएं और न केवल अधिक बुनियादी ढांचे और अधिक समाधानों और सुविधाओं के लिए सरकार से मांग न करें बल्कि कमियों की पहचान करें और सरकार, निजी क्षेत्र, विस्तार अधिकारियों के साथ मिलकर काम करके दूर करें और अंत में खेत पर क्या होता है, इसकी जिम्मेदारी भी लें।

इजऱाइल के किसान हमेशा समाधान की तलाश में रहते हैं और हमेशा कृषि व्यवसाय से धन कमाने की तलाश में रहते हैं। प्रत्येक किसान अपने खेत को व्यवसाय के रूप में देखता है। यह नहीं, कि मैं एक खेत में पैदा हुआ तो मैं एक किसान बनूँगा। परन्तु अगर मैं खेत में पैदा हुआ हूं या खेती करने लगा हूं तो यह जरूर है कि मैं खेती से पैसा बनाना चाहता हूं। इस बुनियादी विचार को ध्यान में रखते हुए इजराईली किसान खेती में क्या उगाना है, उगाने का श्रेष्ठ तरीका क्या होगा, और फसल आने पर वहीं तक नहीं रुक जाना है, उसके आगे की रूपरेखा और बाजार के बारे में भी कार्य योजना बनाता है।


इजऱाईल के एक छोटे से देश होने और कम आबादी होने का फायदा, हर कोई जानता है, आप मंत्रालय में किसी भी विस्तार अधिकारी से मुलाकात और बात कर सकते हैं, आप अपनी समस्याओं के संबंध में प्रमुख निजी क्षेत्र की कंपनियों से संपर्क कर सकते हैं क्योंकि आप उन्हें जानते हैं, हम प्रगतिशील किसानों से विभिन्न मसलों पर चर्चा कर सकते हैं क्योंकि वे उन्हें व्यक्तिगत रूप से पहचानता है और वे हमें जानते हैं। यह इजराईल की बहुत मजबूत और अद्भुत विशेषता है।

कृषक जगत : इजराईल के रिसर्च एंड डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट, एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटीज और कंपनियां किसानों के साथ किस प्रकार काम करती हैं और क्या यह तकनीक को अपनाने के समय को भी कम करती है ?

डैन अल्फ : जब आप इजराईल के विश्वविद्यालयों में जाते हैं, तो वे व्यावहारिक शोध एवं उस तरह के अनुसंधान में संलग्न होते हैं जो जमीन पर उतारे जा सकते हैं। इजऱाईल में वॉल्केनी शोध संस्थान कृषि अनुसंधान में विश्व में अग्रणी हैं। वे यहां बहुत सी किस्मों का विकास करते हैं और इसमें 10-20 साल लगते हैं और केवल सरकार ही इस तरह के शोध में खर्च की जाने वाली धनराशि का प्रबंधन कर सकती है। जैसे बीज की 400 किस्म का परीक्षण चल रहा है और उसमें से केवल 2 ही किस्में सूचीबद्ध होंगी। यह सब अनुसंधान विस्तार कार्यक्रमों की मदद से खेतों में रूपांतरित हो जाता है।

इजराईल की विशिष्टता

  • किसान समूह में काम करते हैं, प्लांटिंग मटेरियल से लेकर उपज ब्रांडिंग भी एक साथ करते हैं।
  • खेती के संभावित जोखिम को लाभ में बदलते हैं।
  • कई फसलें लगाकर जोखिम को कम करते हैं।

इजराईल एक्सटेंशन में अद्भुत है, यह कृषि मंत्रालय का हिस्सा है। इजरायल के सर्वश्रेष्ठ विस्तार अधिकारी अपने विषय में पारंगत होते हैं और ये अधिकांश समय किसान के खेत में ही होते हैं। पूर्व में एक स्थिति यह आई थी कि मंत्रालय को इन विस्तार अधिकारियों को निर्देश देना पड़ा कि सप्ताह में कम से कम एक बार कार्यालय जरूर आएं। और अगर सरकार उन्हें इस तरह से निर्देश नहीं देती तो वे किसान के साथ कंधे से कंधा मिलाकर 7 दिन खेत में ही रहते थे।

कृषि के चार स्तंभ

सभी चार स्तंभ अर्थात् शोध संस्थान, निजी कंपनियां, विस्तार और किसान एक-दूसरे के साथ मिलकर काम करते हैं और जो भी कमियां पाई जाती हैं उसकी पहचान की जाती है और किसानों की समस्याओं को दूर करने के लिए समाधान दिया जाता है।

श्री डैन अल्फ को कृषक जगत डायरी 
भेंट करते हुए निमिष गंगराड़े।

कृषक जगत : इजराईल में किसान किस प्रकार नियम कानून के दायरे में है? उदाहरण के लिए भारत में लैंड सीलिंग एक्ट है, किसानों को एपीएमसी में अपनी उपज बेचना पड़ती है, सामुदायिक खेती इजराईल के किसानों को कैसे मदद करती है ?

डैन अल्फ : इजरायल के कृषि उपज बाजार को सरकार द्वारा सब्सिडी के मामले में कुछ हद तक समर्थन दिया जाता है। जब आप नई तकनीक को लागू करते हैं या प्रमुख नकदी फसलों को लगाते हैं, तो सरकार प्रोत्साहित करना चाहती है। लेकिन किसान को क्या बोना है, क्या लगाना है, इस विषय में सरकार की भागीदारी सीमित है। अंत में एक पूंजीवादी अर्थव्यवस्था और किसान दोनों मिलकर वही एजेंडा या व्यापार मॉडल को आगे ले जाएंगे जो उनके लिए फायदेमंद होगा। इस लिहाज से इजऱाईल अद्वितीय है क्योंकि इजराईल में अधिकांश खेती दो प्रकार के समूह द्वारा की जाती है, एक मोशाव और दूसरा किबुत्ज़। मोशाव याने एक गाँव है, हर परिवार के पास उनके खेत हैं। मैं मोशाव से हूँ। वहीं किबुत्ज एक कम्यून गांव है और वे सभी समुदाय के सभी लोग जमीनों को मिलाकर, 3 या 5 हेक्टेयर में खेती करने के बजाय 200 या 2000 हेक्टेयर में खेती करते हैं। चूंकि इजराईल एक मुक्त बाजार है, कुबुत्ज़ उत्पादन और विपणन में एक प्रमुख भूमिका निभाता है।

मोशाव कम हो रहे हैं

मोशाव जैसे गाँवों में, किसान कम होते जा रहे हैं क्योंकि आप 5 हेक्टेयर या 3 हेक्टेयर वाले व्यवसाय मॉडल को सही नहीं ठहरा सकते हैं। किसान आमतौर पर किराए पर छोटे भूमि धारकों से जमीन लेते हैं और 200-300 हेक्टेयर की बड़ी भूमि जोत और गठबंधन करते हैं और इसके भीतर उत्पादकता बढ़ रही है। इजऱाइल अद्भुत है और तेजी से आगे बढ़ रहा है। इजऱाइल की 3 प्रतिशत आबादी कृषि में लगी हुई है और संसाधनों की सटीक और इष्टतम उपयोग के कारण, हम अपनी खाद्य सुरक्षा के लिए पर्याप्त उत्पादन करते हैं और विश्व स्तर पर बड़ी मात्रा में निर्यात भी करते हैं।

कृषक जगत : MASHAV और IIAP क्या है ? पूरे भारत में IIAP केंद्र स्थापित करने का रोडमैप क्या है और वे भारतीय किसानों की मदद कैसे करेंगे?

डैन अल्फ : MASHAV अंतर्राष्ट्रीय विकास और सहयोग के लिए इजऱाईल एजेंसी है। इसके तहत भारत और इजराईली सरकार की भागीदारी है। और यह भारत-इजऱाईल कृषि परियोजना (IIAP) में विकसित हुआ है। इस संबंध में हम मूल्य श्रृंखला (वैल्यू चेन) को दर्शाने वाले उत्कृष्टता केंद्र (सीओई) की स्थापना करके किसानों को लाभान्वित करना चाहते हैं। इसमें मूल्य श्रृंखला प्रमुख फसलों पर है। हमारे द्वारा ज्ञान साझा करने के तरीकों में से एक यह है कि हम भारत में अपने समकक्ष के साथ चर्चाकर मार्गदर्शन लेते हैं कि वे कौन सी प्रमुख फसलें हैं जिन पर इजराईल ध्यान केंद्रित कर सकता है और फिर एक टीम के रूप में, हम मूल्य श्रृंखला के विभिन्न घटकों पर काम करते हैं। इसके मूल में सोच यह है कि भविष्य की संभावनाओं और काम के पैमाने को देखते हुए बाजारों का विकास करें और अंतिम छोर तक पहुंचे। 

भारत की खासियत

  • भारतीय किसान को अवसरों की पहचान हो।
  • भारत में विशाल घरेलू बाजार है और निर्यात बाजार भी।
  • विविधता पूर्ण देश।

सीओई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस याने उत्कृष्टता केन्द्र नर्सरी प्रबंधन से लेकर फसल की खेती, फसलों की खेती का मतलब है कि हम किस तरह से सिंचाई करते हैं, कैसे उर्वरक देते हैं, किस प्रकार पौधे की सुरक्षा करते हैं, उसकी बढ़वार प्रबंधन करते हैं और फसल कटाई के बाद स्थिति अनुसार विपणन भी देखते हैं।

हम ग्रीन हाउस में अनार, नींबू, सब्जियों पर काम करेंगे और प्रत्येक चरण के लिए समाधान भी अलग-अलग होंगे। इन केन्द्रों के माध्यम से हम यह दिखाना चाहते हंै कि प्रत्येक खंड के लिए सबसे अच्छी कृषि प्रौद्योगिकियां क्या हैं। किसान इस प्रदर्शन को किस तरह से उसके खेत में कर सकता है और बड़ी संख्या में इन प्रयोगों का हम अधिक से अधिक प्रभाव देखना चाहते हैं।

वर्तमान में प्रत्येक केंद्र में हर साल लगभग 10,000 किसानों को प्रशिक्षित किया जाता है और भारत के 11 राज्यों में हमारे 25 केंद्र हैं। हमने तय किया है कि भारत के हर राज्य में कम से कम एक केंद्र होगा। 

अभी हम 2018-2020 की योजना पर काम कर रहे हैं। इन तीन वर्षों में इन केंद्रों में अधिक इजराईली किस्मों को लगाना चाहते हैं। हम सिंचाई का कुशल प्रबंधन करना चाहते हैं। सैटेलाइट इमेजिंग हमें सिंचाई में सटीकता रखने में मदद करता है और बताता है जमीन के किस हिस्से को कितना पानी चाहिए। उर्वरकों, पौधों की सुरक्षा, खरपतवार नियंत्रण के लिए भी यही किया जाता है। पैसे की बचत, पर्यावरण को नुकसान न पहुंचाने वाले कुशल तरीके से हर पहलू नियंत्रित किया जाता है। सीआई रोपण सामग्री पैदा कर रहा है, प्रशिक्षण खेतों पर दिया जा रहा है और खास बात ये है कि विस्तार तंत्र विकसित किया जा रहा है जिससे तकनीक किसानों के खेतों में पहुंच रही है।

कृषक जगत : इंडो इजऱाईल भागीदारी में भारतीय किसानों का कैसा रुझान है, क्या वे तकनीक के प्रति उत्साहित हैं या  उदासीन हैं ?

डैन अल्फ : हम एक लक्ष्य से काम कर रहे हैं कि हम बदलाव लाना चाहते हैं। हम एक विश्वविद्यालय नहीं हैं और कोई शोध भी नहीं कर रहे हैं। मुझे पता है कि क्या काम करना है और मैं उस काम को खेत में लाना चाहता हूं। इसलिए जब हम प्रशिक्षण दे रहे होते हैं - हम वास्तव में सुबह 5.30 बजे उठते हैं और हम खेत में काम करना शुरू करते हैं। जब हम आम में कैनोपी प्रबंधन को दिखाते हैं तो हम पूरे भारत में 30 अधिकारियों को लेते हैं, हमारे पास आम के लिए 7 केंद्र हैं, हम कैंची लेते हैं और आरी लेते हैं और छांटना शुरू करते हैं, इसे काटते हैं लेकिन 10 घंटे के लिए। आधे- एक घंटे के लिए नहीं। हम काम करते हैं और यही हम दिखाने की कोशिश करते हैं। बहुत ऊर्जा के साथ काम करते हैं और किसानों को यह काम दिखाना चाहते हैं और हम आम के पेड़ों को इस तरह से काटना चाहते हैं कि वे अधिक और बेहतर गुणवत्ता का उत्पादन करें। और इस तरह एक वर्ष के बाद वे किसान हमारे साथ जुड़ते हैं।

हम कर्नाटक, महाराष्ट्र, यूपी में परिवर्तन देख रहे हैं कि किसान अपने बागों की छंटाई कर रहे हैं और उन्हें 14 मीटर से 5 मीटर तक नीचे ला रहे हैं और वे 10 मीटर के स्थान पर 4 मीटर की दूरी पौधों के बीच रख रहे हैं। यह देखकर हम किसानों के पास सम्मानपूर्वक जाते हैं। मैं उनके काम की आलोचना नहीं करता हूं। हम कहते हैं चलो देखते हैं कि हम इस काम को मिल कर कैसे कर सकते हैं, चलो एक साथ सीखें। क्योंकि जब हमने इसे उत्तर प्रदेश में बस्ती में या महाराष्ट्र के दापोली में किया था, कर्नाटक के कोलार में किया और हमने इसे किसान के खेत के पास किया, उन्होंने कहा कि ठीक है अब मैं समझता हूं। कहने का आशय यह है कि हम ङ्घशह्वञ्जह्वड्ढद्ग पर मूवी नहीं दिखाते हैं, इस तरह से हम व्यावहारिक रूप से और सफल होने की कोशिश करते हैं।

कृषक जगत : क्या कुछ चीजें जो IIAP की संपूर्ण स्थापना से पूरी तरह से बदल जाएंगी और भारत में कृषक समुदाय के भीतर अपनी पहुंच भी पूर्व से बना चुकी हैं ?

डैन अल्फ : रोपण सामग्री से लेकर विपणन तक की चीजें पूरी तरह से बदल जाएंगी। हम 7 सेगमेंट पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं; याने अनार, खजूर, नींबूवर्गीय, ग्रीन हाउस में सब्जियाँ, ग्रीन हाउस में फूलों की खेती, आम और मधुमक्खी पालन। यह सब मांग अनुसार है। ये नर्सरी लाखों की संख्या में रोपण सामग्री का उत्पादन कर रही हैं क्योंकि ये हायटेक ग्रीनहाउस में की गई है। जो हम किसानों को दे रही है और उनके खेतों पर उगाई जा रही है। इसमें किसानों की आजीविका में आज एक बदलाव हो रहा है क्योंकि एक किसान मजबूत, स्वस्थ पौधे के साथ सीजन की शुरुआत करता है तो, सफलता की सारी संभावनाएं होती हैं। 

कृषक जगत: किसानों के लिए सलाह।

डैन अल्फ : भारत और इजराईल किस प्रकार मिलकर काम कर रहे हैं, इसका आम फल एक बड़ा उदाहरण है, इसलिए जब इजराईल को कृषि के मामले में भारत आने, साथ काम करने और आम की अधिक गहन खेती की दिशा में काम करने के लिए कहा गया, तो हमारे मन में भारत के लिए बहुत सम्मान था। हम इजरायल में पिछले 40 वर्षों से आम की पैदावार करते हैं, लेकिन भारत में आम की खेती हजार वर्षों से हो रही है। इस संबंध में, हमने भारत को बताया कि हम आम के बागान बहुत सघन तरीके से करते हैं, आप इसे अपने पारंपरिक तरीके से लगाते हैं। हम इसे बदलने और इजऱाईल तकनीक को भारत में कॉपी पेस्ट करने का नहीं कह रहे हैं। हमें इन तकनीकों को अपने केंद्रों और केंद्रों से प्रगतिशील किसानों तक पहुंचाने की जरूरत है।

भारत की जरूरतों के अनुरूप अधिक से अधिक समाधान देना है। यह वही है जो हम कर रहे हैं, हम एक साथ काम करते हैं। और समर्पण के साथ मिलकर और अधिक से अधिक  काम करना चाहते हैं। हम भारत के अच्छे दोस्त हैं। किसानों को बताना चाहेंगे कि हम दो देश हैं, लेकिन टीम एक है।

21 साल पहले भारत से प्यार हो गया

कृषक जगत : जब आप भारत-इजराईल कृषि परियोजना (ढ्ढढ्ढ्रक्क) का नेतृत्व करते हुए मोशाव गतिविधि का दायित्व संभालने भारत आये, तो भारतीय किसानों के बारे में आपका दृष्टिकोण क्या था और पिछले चार वर्षों में क्या बदलाव हुआ ?

डैन अल्फ : पहली बार मैं भारत आया था 1998 में, सेना की सेवा करने के बाद और जब भारत में यात्राएं कर रहा था तो मुझे इस देश से प्यार हो गया। भारत से वापस आने के बाद मैं इजऱाईल में कृषि में स्नातक की डिग्री लेने गया। कक्षा में पहले ही दिन मेरे पास एक भारतीय बैठा था। यह वर्ष 2000 में था। वह महाराष्ट्र से था और गुजरात में भी उसकी खेती थी। वह स्थानीय भाषा हिब्रू नहीं जानता था, जिसमें व्याख्यान होते हैं इसलिए वह 6 महीने पूर्व भाषा की पढ़ाई के लिए जल्दी आया और इजऱाईल में स्नातक की उपाधि प्राप्त की। वह कक्षा में सर्वश्रेष्ठ छात्रों में से एक था। और आज वह भारत में एक प्रगतिशील किसान है इसलिए मेरा कनेक्शन भारत के साथ 21 साल पहले से है। 

स्नातक की पढ़ाई के बाद, मैंने महाराष्ट्र के नासिक में 2008 में कुछ कंपनियों के साथ विटीकल्चर (वाइन बनाने) में काम किया है। 2014 में भारत में इजराईली दूतावास में एग्रीकल्चर काउंसलर के पद पर नियुक्त होने से और भारतीय कृषि का निकट से अध्ययन करने के लिए मैं बहुत उत्साहित था।

विविध संस्कृति, भिन्न-भिन्न भूमि, भांति-भांति की जरूरत

जब मैं भारत के नक्शे को देखता हूं, तो पाता हूं कि भारत विविध है। तमिलनाडु के किसान, हरियाणा के किसानों से अलग हैं, इस संबंध में आपको संस्कृति को समझने और उसका सम्मान करने की आवश्यकता है।  यदि आप किसानों का विश्वास हासिल नहीं करते हैं, तो आप उनके साथ कभी भी बातचीत नहीं कर सकते हैं और हम ज्ञान साझा करने के लिए आते हैं, और अभी भी सीख रहा हूं।

 

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