स्मार्ट खेती के लिए चाहिए स्मार्ट तकनीक

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  • 10 लाख नए बेरोजगार हर महीने
  • 57 प्रतिशत जनसंख्या 30 वर्ष की उम्र से कम
  • 50 करोड़ से ज्यादा ग्रामीण युवा रोजगार की तलाश में
  • 12 करोड़ किसान भारत में 
  • 10 करोड़ छात्र केवल शिक्षा अर्जन कर रहे

आज भारत में डिजिटल तकनीकी का प्रयोग काफी मात्रा में बढ़ रहा है। देश के बड़े व्यक्ति के साथ छोटे से छोटे व्यक्ति के हाथ में भी आपको मोबाइल दिखाई देगा और मोबाइल पर बात ही नहीं करते बल्कि फेसबुक, व्हाट्सएप का भी प्रयोग करते हैं। अपनी मनपसंद फि़ल्में भी देखते मिल जायेंगे। ऐसी परिस्थिति में इस डिजिटल तकनीकी को कृषि एवं किसान के लिए प्रयोग करने की आज देश में अपार संभावना है। आज देश में 12 करोड़ किसान सीधे कृषि एवं कृषि आधारित अन्य व्यवसायों से जुड़े हुए हैं। 50 करोड़ से ज्यादा ग्रामीण युवा गांव मे रोजगार की राह खोज रहे हैं। अभी हाल में अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक संस्थान ने भारत में लगभग 30 प्रतिशत यूथ इक्विटी कही है, जिसका मतलब है कि लगभग 30 प्रतिशत युवाओं को न तो शिक्षा के कोई अवसर प्राप्त हो रहे हैं और न ही रोजगार के अवसर मिल रहे हैं। हमारे देश की लगभग 57 प्रतिशत जनसंख्या 30 वर्ष आयु से कम है जो कि करीब 75 करोड़ के आस पास है जिनमें से केवल 10 करोड़ छात्र शिक्षा तथा रोजगार प्राप्त कर रहे हैं। यदि इन ग्रामीण युवाओं को डिजिटल तकनीकी को कृषि में प्रयोग करने का प्रशिक्षण दिया जाये तो इससे युवा को एक और नया रोजगार मिलेगा वहीं दूसरी और हमारी कृषि की उत्पादन क्षमता बढ़ेगी तथा किसान की आमदनी बढऩा भी सुनिश्चित होगा। आज हम डिजिटल तकनीकी का कृषि क्षेत्र में प्रयोग बढ़ाते हैं वहां हमें युवाओं को रोजगार तो मिलेगा ही वहीं कृषि में उत्पादन लागत कम करने में भी सहायता मिलेगी। हर माह हमारे देश में लगभग 10 लाख नए बेरोजगार पैदा हो रहे हैं जो कि ग्रामीण परिप्रेक्ष्य से आते हैं। इन्हे रोजगार देकर उत्पादन बढ़ाना ही हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। कृषि के उत्पादन में वैल्यू एडिशन करने की प्रक्रिया सरल होने के साथ उत्पादन की गुणवत्ता बनाये रखने में सहायता मिलेगी एवं समय की बचत होगी।

डिजिटल तकनीकी के प्रयोग से व्यक्ति के कार्य करने की क्षमता बढ़ाने में सहयोग मिलेगा। अधिकतम उत्पादन मिलने के साथ प्रोसेसिंग की प्रक्रिया में सरलता आने से उत्पादन लागत कम होगी तथा हमारे किसान आर्थिक, सामाजिक एवं पर्यावरण की दृष्टि से मजबूत होंगे। जहां किसान की उत्पादन क्षमता बढ़ेगी एवं लागत कम होगी वहीं दूसरी ओर बाजारीकरण की संभावनाओं को तलाशने में सक्षम होंगे।

रोबोट से स्पे्र

आज दुनिया के अनेक प्रगतिशील देशों में इस तकनीकी का प्रयोग बढ़ा है। खेती में रोबोट के प्रयोग की संभावना बढ़ी है। यदि बढ़े क्षेत्र में किसी बीमारी या कीट का प्रकोप आया है तो हम रोबोट के माध्यम से विभिन्न तरह की दवाइयों का एक साथ स्प्रे करके इन बीमारियों एवं कीटों के प्रकोप पर नियंत्रण कर सकते हैं। चीन में बड़े स्तर पर रोबोट द्वारा खरपतवार हटाने का कार्य किया जा रहा है। आज रोबोट के माध्यम से खेती में स्वचालित क्रियाएं की जा सकती हैं जैसे दवाओं का स्प्रे, खरपतवारों को निकालना, पके फलों को सही समय पर तोडऩा और उसकी पैकिंग करना आदि । 

 

मुख्य डिजिटल तकनीक

आज अनेक उद्हारण ऐसे प्रस्तुत हुए हैं जिससे यह सुनिश्चित हो गया है कि डिजिटल तकनीकी प्रयोग को बढ़ाने से कृषि के क्षेत्र में उत्पादन (लगभग 10 प्रतिशत) एवं उत्पादकता (लगभग 5 प्रतिशत) बढ़ाने में सफलता मिली है जिससे उत्पादन में गुणवत्ता सुधार हुआ और किसान को नगद लाभ भी बढ़ा है। डिजिटल तकनीकी के प्रयोग से पूर्वोत्तर भारत के राज्यों मे जीरो टिलेज सरसों की खेती करने के लिए जीरो टिलेज तकनीक का प्रयोग किया गया तो किसानों की लागत कई गुना बढ़ गई। डिजिटल तकनीकी में 10 मुख्य तकनीकें आती हैं जिसके द्वारा नए रोजगार एवं कृषक को उद्यमी बनाया जा सकता है, जो मुख्यतया हैं - आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (मशीन लर्निंग, डीप लर्निंग एवं रोबोट तकनीकी), इंटरनेट ऑफ थिंग (नेट वर्किंग जोन), कम्युनिकेशन प्रोटोकॉल (बारकोड, क्यू आर कोड, आरएफआईडी, एनएफसी एवं ब्लूटूथ), ब्लॉकचैन तकनीक, क्लाउड एवं कंप्यूटिंग, बिग डाटा मैनेजमेंट, इमेज सेन्सिंग एवं जियोस्पेशल (जीआईएस , जीपीएस एवं  रिमोट सेन्सिंग), अगुमेंटेड एवं वर्चुअल रियलिटी (एआर एवं वीआर) इत्यादि ।

मौसम की जानकारी

किसान को इस डिजिटल तकनीकी के द्वारा समय पर मौसम की ताजा जानकारी दी सकती है। किस प्रजाति का प्रयोग किया जाए यह भी बताया जा सकता है। आज देश को भूमि जलस्तर गिरने की एक बहुत बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। इस डिजिटल तकनीकी के माध्यम से हम किसानों को जागरूक कर सकते हैं कि उसके राज्य, जिले एवं तालुका में जलस्तर कैसा है  जिससे जल के दुरुपयोग को रोका जा सके। फसलों को विभिन्न कीटों एवं बीमारियों के प्रकोप से भी बचने दे लिए जागरूक किया जा सकता है। भूमि के गुणवत्ता स्तर की जानकारी भी किसानों को दी जा सकती है।

सूचना का प्रसार

डिजिटल तकनीकी के माध्यम से आज किसान को समय रहते जागरूक किया जा सकता है की वह जिस फसल को उगाना चाहता है उसको खेत की तैयारी कब और कैसे करनी है। कौन सी वैराइटी का बीज उसके क्षेत्र दे लिए उपयोगी है। बुवाई का उचित समय कौन सा होगा, बुवाई के समय जमीन में नमी का प्रतिशत क्या होगा, सिंचाई किस समय करना उचित होगा तथा यदि किसी भी तरह प्राकृतिक आपदा आने की संभावना है तो किसान को समय रहते जागरूक कर उससे बचने के उपायों से भी जागरूक किया जा सकता है। यदि किसान अपने उत्पादन को बेचना चाहता है तो इस डिजिटल तकनीक से देश की मंडियों की भी जानकारी देकर बताया जा सकता है कि किसान को अपने उत्पाद के अच्छे दाम कहां मिल सकते है ।

स्मार्टफोन और कैमरा 

स्मार्टफोन के प्रयोग से खेती को भी स्मार्ट बनाया जा सकता है। आज स्मार्ट मोबाइल में इंटरनेट एवं रंगीन कैमरा उपलब्ध होता है। इंटरनेट के प्रयोग से अपनी फसल के बारे में सम्पूर्ण जानकारी ली जा सकती है तथा उसका प्रयोग भी कर सकते हैं। वहीं कैमरे के माध्यम से अपनी फसल के फोटो लेकर निकटतम अनुसंधान केंद्र को भेजने से फसल की स्थिति, पौधों की सघनता एवं पत्तियों के रंग से पौधों में उपलब्ध पोषक तत्वों की उपलब्धता एवं आवश्यकता की जानकारी दी जा सकती है। वहीं यदि फसल एवं पशुओं में यदि किसी तरह के रोग का प्रकोप हुआ है तो स्मार्टफोन के माध्यम से फोटो भेजकर विशेषज्ञ से जानकारी ली जा सकती है।

आज डिजिटल तकनीक एवं स्मार्टफोन की कृषि की हालत सुधारने के लिए इसके प्रयोग की अपार संभावना है।  आवश्यकता है की सरकार इस क्षेत्र में आवश्यक तकनीकी उपलब्ध कराये एवं किसानों एवं ग्रामीण युवाओं को प्रशिक्षण दिया जाए जिससे प्रभावशाली ढंग से इसका प्रयोग किया जा सके। डिजिटल तकनीकी के प्रयोग से भारतीय कृषि एवं किसानों की हालत में सुधार आएगा। देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी तथा ग्रामीण युवाओं को रोजगार की अपार संभावनाएं होंगी। 

  • डॉ. एन. एस. राठौर 
  • उप महानिदेशक (शिक्षा)
  • आईसीएआर, नईदिल्ली
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