कृषि, बागवानी और पशुपालन की मिश्रित खेती अपनाएं

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बीकानेर। भाकृअनुप-केंद्रीय भेड़ और ऊन अनुसंधान संस्थान, बीकानेर के शुष्क क्षेत्र परिसर (एआरसी) ने गत दिनों 46वाँ स्थापना दिवस मनाया।

प्रो. (डॉ.) विष्णु शर्मा, कुलपति, राजुवास और एसकेआरएयू ने मुख्य अतिथि के तौर पर भेड़ किसानों से कृषि, बागवानी और पशुपालन की मिश्रित कृषि प्रणाली को अपनाने का आग्रह किया। डॉ. शर्मा ने भेड़ किसानों की आय को दोगुना करने के लिए वैज्ञानिक भेड़ पालन प्रबंधन संबंधी मूल्यवान प्रथाओं को भी साझा किया।

डॉ. अशोक कुमार, सहायक महानिदेशक (पशु स्वास्थ्य), विशिष्ट अतिथि के तौर पर उपस्थित रहे। उन्होंने रेगिस्तानी क्षेत्र में भेड़ की नस्लों को उन्नत करने और भेड़ों को बीमारियों से बचाने के लिए संस्थान की भूमिका की सराहना की। डॉ. अरुण कुमार तोमर, निदेशक, सीएसडब्ल्यूआरआई, अविकानगर ने विभिन्न भेड़ नस्लों की उपयोगिता पर प्रकाश डाला।  

डॉ. पी. एल. सरोज, निदेशक, केंद्रीय शुष्क बागवानी संस्थान, बीकानेर ने किसानों को अनार और बेर जैसी विभिन्न बागवानी फसलों की जानकारी दी।

डॉ. एच. के. नरुला, प्रमुख, शुष्क क्षेत्र परिसर (एआरसी) सीएसडब्ल्यूआरआई, बीकानेर ने पिछले 45 वर्षों से शुष्क क्षेत्र के विकास में संस्थान के योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने किसानों के बीच वैज्ञानिक प्रौद्योगिकी का प्रसार करने और शुष्क क्षेत्र में भेड़ किसानों की आजीविका की स्थिति को बेहतर करने के लिए भी एआरसी परिसर की भूमिका को रेखांकित किया।

डॉ. गोपाल लाल, निदेशक, एनएसएसआर, अजमेर; डॉ. आर. के. सांवल, निदेशक, एनआरसीसी, बीकानेर, ग्रुप कैप्टन के. एस. शेखावत, कार्यकारी निदेशक, सीडब्ल्यूडीबी; डॉ. एस. दहिया, निदेशक, सीआईआरबी, हिसार; डॉ. एन. वी. पाटिल, निदेशक सीआईआरसी, मेरठ और डॉ. विनीत भसीन, प्रमुख वैज्ञानिक, भी इस अवसर पर उपस्थित थे।
 

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