किसानों से नरवाई नहीं जलाने की अपील की

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इंदौर।  जिले के किसानों से अपील की गई है कि वे खेतों में फसलों के अवशेष नरवाई नहीं जलाएं। गेहूं के फसल अवशेष (नरवाई) को जलाने से अग्नि दुर्घटना की आशंका तो रहती ही है, साथ ही मिट्टी की उर्वरता पर भी विपरीत असर पड़ता है। धुएं से उत्पन्न कार्बन डाई ऑक्साईड से वातावरण का तापमान बढ़ता है और प्रदूषण में भी वृद्धि होती है, जिससे पर्यावरण पर प्रतिकूल असर होता है। कृषि विभाग के उपसंचालक श्री विजय चौरसिया ने किसानों को सलाह दी है कि वे नरवाई जलाने की अपेक्षा अवशेषों और डंठलों को एकत्र कर जैविक खाद जैसे भू-नाडेप, वर्मी कम्पोस्ट आदि बनाने में उपयोग करें। इससे पोषक तत्वों से भरपूर जैविक खाद जल्द बना सकते हैं। खेत में कल्टीवेटर, रोटावेटर या डिस्क हेरो आदि की मदद से फसल अवशेषों को भूमि में मिलाने से आने वाली फसलों में जीवांश खाद की बचत की जा सकती है।

गेहूं कटवाने के लिए सामान्य के बजाय स्ट्रारीपर एवं हार्वेस्टर्स का प्रयोग करें तो पशुओं के लिए भूसा और खेत के लिए बहुमूल्य पोषक तत्वों की उपलब्धता बढ़ाने के साथ मिट्टी की संरचना को बिगडऩे से बचाया जा सकता है।
 

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