मछलियों को - चेतना शून्य करने वाली दवाईयां

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यह असंवेदन दवाइयां कुछ समय तक असर करने के बाद पुन: मछलियों को उसके प्राथमिक स्थिति की तरह ला देती है जिससे मछलियों को कोई हानि नहीं होती है। इसको उपयोग करने का  तरीका भी बहुत ही असान है जिससे मछली पालक इन औषधियों को आसानी से उपयोग कर सकते हैं परंतु इन औषधियों के उपयोग के लिए, यह औषधियां कितने मात्र में एवं कितने समय के लिए उपयोग किया गया है यह भी बहुत ही महत्वपूर्ण तथ्य है क्योंकि इन औषधियों को अधिक मात्र में एवं अधिक समय के लिए उपयोग किये जाने पर मछलियों की मृत्यु भी हो जाती है 

असंवेदन औषधियों के प्रक्रम: प्रमुख चेतन शून्य करने वाली औषधियां के प्रक्रम 
प्रक्रम स्थिति व्यवहार 
शांत अवस्था  मछलियों की  तैरने एवं श्वसन क्रिया  की गति धीमी हो जाती है।
संवेदन  थोड़े देर के लिए मछलियांं अपनी शारीरिक संतुलन खो देती हैं एवं छूने में बहुत कम ही प्रतिक्रिया दिखाती हंै।
शल्यचिकित्सा/  ऑपरेशन इस स्तिथि में मछलियों को छूने में कोई प्रतिक्रिया नहीं दर्शाती है एवं अपर कुलम को गति धीमी और रुक जाती है मछलियां अपना शारीरिक संतुलन भी खो देती हैं।
मृत्यु  श्वसन एवं धड़कन की गति रुक जाती है इस स्तिथि में मछलियां मर जाती हंै यह प्रमुखता दवाइयों को अधिक मात्र में उपयोग करने के कारण से होता है।

बेहोश करने वाली (असंवेदन) औषधियों के प्रकार- यह दवाइयां दो प्रकार की होती हैं।

सामान्य असंवेदनता : इस औषधियों को मछलियों के शरीर के अन्दरूनी भाग में डाली जाती है। इस दवाई को मछलियों के दिमाग के हिस्सों में भी लगाया जा सकता है इसके प्रयोग से पुरा शारीर शून्य हो जाता है  मुख्यत: इसे इंजेक्शन के द्वारा मछलियों के शरीर में डाला जाता है इस प्रकार के असंवेदन औषधियों को शल्य चिकित्सा के समय उपयोग में लाया जाता है  इसके उदाहरण के रूप में केटामाइन है।

संकुचित असवेंदनता: इस प्रकार के असंवेदन औषधियों को मुख्यत: छोटे घावों के लिए उपयोग में लाया जाता है इस दवाई के प्रयोग से सिर्फ शरीर के किसी भी एक अंग को ही जगह को ही शून्य करता है इसके प्रयोग से ऑपरेशन के बाद एवं चोट लगने के बाद दर्द से राहत मिलता है इसके उदाहरण के रूप में प्रीलोकाइन है। 

मछलियों के लिए असंवेदन विधियां: मछलियों में असंवेदन के लिए दो प्रमुख विधि का इस्तेमाल किया जाता है जो इस प्रकार हैं- 

रसायनिक विधि: रसायनिक विधि में बहुत से प्रकार के रसायन दवाइयों का उपयोग किया जाता जो की निम्न है एम एस-222, बेन्जोकैने, क्विनालडाईन, 2-फिनोक्सयेथेनोल, मेटोमिदेत, लौंग का तेल, एक्वी- एस। इन रसायनिक पदार्थों को पानी में घोल कर, मछलियों के भोजन में मिला कर एवं इंजेक्शन के रूप में मछलियों को दिया जा सकता है इनमे से आजकल मछलियों में प्रमुख रूप से संवेदन औषधि के रूप में लौंग के तेल को उपयोग किया जा रहा है इसे जल में मिला कर उपयोग किया जाता है जो बहुत ही प्रभावकारी फल प्रदान कर रहा है।

मछलियां संवेदनशील जीवों में से एक होती हैं इन्हे पकडऩे, यातायात एवं किसी भी बीमारी से बचाव के लिए दवाई दिए जाने के वक्त यह बहुत ही जल्दी तनाव में आ जाती हैं जिसके कारण कई बार मछलियों को शारीरिक चोट पहुंच जाती है तो कई बार मछलियों की इन तनावों के कारण मृत्यु भी हो जाती है। जिससे मछली पालकों को नुकसान होता है। इन सभी हानियों को यह चेतना शून्य करने वाली औषधियों का उपयोग करके कम किया जा सकता है इस औषधि के उपयोग से मछलियों में तिलमिलाहट कम हो जाती है जिससे आसानी से मछलियों को पकड़ा एवं एक जगह से दूसरे जगह तक ले जाया सकता है बिना किसी शारीरिक जख्म एवं मृत्यु के अत: यह औषधियां हार्मोन, किसी बीमारी से बचाने के लिए अन्य दवाइयों को मछलियों के शरीर में डालने के वक्त भी मददगार है।

नीचे दी हुई सारणी में बताया गया है कि कौन सी मछलियों में यह रसायनिक पदार्थ कितनी मात्रा में डालने से यह प्रभावकारी लाभ प्रदान करता है।

अरसायनिक विधि -  इस विधि के अंतर्गत हायपोथरमिया एंड इलेक्ट्रो- असंवेदन विधि आती है जिसमें जल के तापमान को कम करके मछलियों की चेतना शक्ति को शून्य किया जाता है यहां जल के तापमान को धीरे- धीरे घटाया जाता है क्योंकि मछलियों में जल के तापमान को छडि़क घटाने पर मछलियों की मृत्यु हो जाती है जिसका प्रमुख कारण थर्मल शॉक है इस विधि में जल का तापमान एक डिग्री से. से नीचे नहीं होना चाहिए एवं 15 मिनट तक ही ठंडे जल में रखना चाहिए। एवं इलेक्ट्रो संवेदन विधि में इलेक्ट्रिक करेंट का उपयोग करके मछलियों को चेतना का शून्य किया जाता है यह विधि समुद्री मछलियों के लिए कारगर नहीं है यह विधि साफ पानी के मछलियों में उपयोग में लाया जाता है एस विधि में बड़ी मछली ज्ल्दी प्रभाव में आती है छोटी मछलियों की तुलना में 110-115 वोल्ट की बिजली का प्रवाह एक मिनट से कम के लिए किया जाता है इतना करेंट पर्याप्त होता है मछलियों की चेतना को शून्य करने के लिए।

चेतना शून्य करने वाली औषधियां  अटलांटिक सालमोन रेनबो ट्राउट  कॉमन कार्प  चैनल कैटफि़श  नील तिलापिया 
एमएस 222 40-50 मिग्रा/ली.  40-60 मिग्रा/ली. 100-250 मिग्रा/ली. 50-250 मिग्रा/ली. 100-200 मिग्रा/ली.
बेन्जोकाइन 40 मिग्रा/ली. 25-50 मिग्रा/ली. कोई प्रभाव नहीं दिखा  कोई प्रभाव नहीं दिखा 25-100 मिग्रा/ली.
क्विनालडाइन 25-40 मिग्रा/ली. कोई प्रभाव नहीं दिखा 10-40 मिग्रा/ली. 25-60 मिग्रा/ली. 25-50 मिग्रा/ली.
2 फिनोक्सी इथोनाल 100-200 मिग्रा/ली. 100-200 मिग्रा/ली. 400-600 मिग्रा/ली. कोई प्रभाव नहीं दिखा 400-600 मिग्रा/ली.
मेटोमाइडेट 2-10 मिग्रा/ली. 5-6 मिग्रा/ली. कोई प्रभाव नहीं दिखा 4-8 मिग्रा/ली. कोई प्रभाव नहीं दिखा
लौंग का तेल 10-50 मिग्रा/ली. 40-120 मिग्रा/ली. 40-100 मिग्रा/ली. 100 मिग्रा/ली. कोई प्रभाव नहीं दिखा
क्यूई-एस 10-50 मिग्रा/ली. 20 मिग्रा/ली. कोई प्रभाव नहीं दिखा 20-60 मिग्रा/ली. कोई प्रभाव नहीं दिखा

 

  • दिपिका
  • मंगेश म. भोसले, तमिलनाडु जे. जयललिता मात्स्यिकी वि.वि.
  • अजय कुमार
  • केन्द्रीय मात्स्यिकी शिक्षा संस्थान, मुंबई
  • Corresponding author-ajaycofs@gmail.com
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