मध्य प्रदेश में मक्का में फाल आर्मी वर्म का प्रकोप शुरू

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जबलपुर। जिले में पहली बार मक्का फसल में फाल आर्मी वर्म कीट का प्रकोप जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के फार्म में देखा गया। यह कीट बहुभक्षीय कीट है जो कि 80 से अधिक प्रकार की फसलों पर क्षति करता है। इस कीट की सबसे पसंदीदा फसल मक्का है। भारत में पहली बार कर्नाटक राज्य में जुलाई 2018 में प्रकोप देखा गया। इस कीट का प्रकोप आंध्रप्रदेश, तमिलनाडु, उड़ीसा, गुजरात, बंगाल, बिहार एवं छत्तीसगढ़ राज्यों में पाया गया। मध्यप्रदेश में प्रथम बार देखा गया।

कीटशास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष  डॉ. ए.के. भौमिक ने बताया कि इल्ली अवस्था वातावरण के अनुसार 12 से 20 दिनों की होती है। इल्लियां पौधों के पोंगली के अन्दर छुपी होती है। बड़ी इल्लियॉं पत्तियां खाकर उसमें छोटे से लेकर बड़े-बड़े गोल छेद कर नुकसान पहुंचाती हैं। इल्लियों की विष्टा भी पत्तियों में साफ दिखाई देती है। बड़ी अवस्था की इल्लियां मंजरियों को भी खाकर नुकसान पहुंचाती हैं। नियंत्रण- वर्तमान में खड़ी फसल में बुस्ट रसायनिक नियंत्रण अपनाना चाहिए अन्यथा भारी क्षति होने की प्रबल संभावना है।

 

ग्रसित फसल की पोंगली में बारीक सूखी रेत, राख अथवा बुरादा डालें।

खड़ी फसल पर थायोडीर्काप 75 डब्लू जी का 7 किलो या फ्लूवैन्डामाइट 480 एस.सी. का 150 मि.ली. या फ्लोरेन्टनीलीप्रोली 18.5 एस.सी. का 150 मि.ली. या बेन्जोयेट 5 एस.सी. का 200 ग्राम प्रति हेक्टेयर में उपयोग करें। कीटनाशकों को पौधे की पोंगली में अवश्य ड़ालें। कीटनाशकों का उपयोग बदल-बदल कर करें।

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