नरवाई जलाने से होने वाले नुकसान

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इंदौर। गेहूं फसल की कटाई  के बाद बचे हुए फसल अवशेष यानी नरवाई जिसे पराली भी कहा जाता है, को देश के कई राज्यों के किसान खेत में ही जला देते हैं। नरवाई के जलने से फसल अवशेषों में उपलब्ध पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं। ऐसा करना किसानों द्वारा खुद के पांव पर कुल्हाड़ी मारने जैसा है।

इस बारे में भारतीय कृषि अनुसन्धान संस्थान क्षेत्रीय केंद्र इंदौर के कृषि विशेषज्ञ श्री नंदन सिंह राजपूत, डॉ. कैलाशचंद्र शर्मा, डॉ. अनिल कुमार सिंह और श्री आदित्य तिवारी के अनुसार नरवाई जलाने से भूमि की ऊपरी सतह में अरबों की संख्या में पाये जाने वाले मित्र जीव-केंचुआ, बैक्टीरिया और फफूंद आदि भी आग लगाने से अक्रियाशील हो जाते हैं तथा भूमि की उर्वराशक्ति बुरी तरह से प्रभावित होती है, जो कि आगे बोई जाने वाली फसल के लिए बहुत जरुरी होते हैं। हम जिस रूप में पोषक तत्वों को जमीन में डालते हैं, पौधे उसी रूप में पोषक तत्वों को प्राप्त नहीं करते। 

भूमि की ऊपरी सतह में स्थित लाभदायक सूक्ष्मजीवों के द्वारा इन पोषक तत्वों को एक निश्चित वातावरण एवं प्रक्रिया के तहत बदला जाता है। खेतों में आग लगाने से इन लाभदायक सूक्ष्मजीवों की संख्या कम होती जाती है। जिससे अगली फसलों में महत्वपूर्ण उर्वरकों की अधिक मात्रा खेतों में डालनी पड़ती है। रसायनिक उर्वरकों का आवश्यकता से अधिक मात्रा में प्रयोग करने से मिट्टी की प्रकृति बदल जाती है तथा सूक्ष्मजीवों की संख्या कम होने पर मिट्टी की उर्वराशक्ति एवं उत्पादक क्षमता धीरे-धीरे कम होने लगती है।

पर्यावरण को नुकसान : फसल अवशेष जलाने से पर्यावरण को भी नुकसान पहुँचता है। वायुमंडल और भूमि का तापमान बढ़ जाता है। वायुमंडल एवं भूमि में आक्सीजन की कमी तथा कार्बन डाईआक्साइड जैसी गैसों की वृद्धि हो जाती है, जो पर्यावरण के लिए नुकसानदायक होती है। नरवाई जलाने से कम से कम 10 क्विंटल भूसा प्रति एकड़ नष्ट हो जाता है जिससे पशु चारे की भी कमी हो जाती है। इसके अलावा नरवाई जलाने से आग लगने की भी आशंका रहती है , जिसके अन्य खेतों तक पहुँचने से जान -माल का भी खतरा बना रहता है। 

फसल अवशेष प्रबंधन : हार्वेस्टर द्वारा छोड़े गये फसल अवशेष एवं डंठल की कटाई ट्रैक्टर  चलित स्ट्रारीपर से एक घंटे में एक एकड़ क्षेत्र के डंठलों से लगभग 10 क्विंटल तक भूसा प्राप्त किया जा सकता है। फसल अवशेष से जैविक खाद भी बनाया जा सकता है। नरवाई को जल्दी सड़ाने के लिए बाजार में कल्चर भी उपलब्ध है। इस जैविक खाद का खेतो में डालकर अथवा बाजार में बेच कर किसान अतिरिक्त आय भी प्राप्त कर सकते हैं। अतएव कृषि विशेषज्ञों की किसानों को सलाह है कि नरवाई को नहीं जलाएं.इसके बहुत नुकसान हैं। नरवाई जलाना अपराध भी घोषित हो चुका है। अत: इससे बचें तथा खेत को बर्बाद होने से बचाते हुए भूमि की उर्वराशक्ति बढ़ाएं।

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