हारवेस्टरों से होती है गेहूं की कटाई नरवाई से भूसा बनाने किसान उदासीन

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(भगवानदास राठी )

बरेली। प्रतिवर्ष फसल अवशेष नरवाई में आग लगने पर प्रतिबंध की घोषणा की जाती है, इसके बाद भी गेहूं की कटाई के बाद खेतों की शीघ्र सफाई के लिए किसानों द्वारा नरवाई में आग लगा दी जाती है। नरवाई में आग लगाने के बाद हवा के साथ अनियंत्रित आग से क्षेत्र में अनेक घटनाएं दुर्घटनायें हो चुकी है। 

गर्मी का सीजन शुरू होते ही खेतों में अन्य स्थानों पर आग लगने की घटनाएं होने लगती है।  बरेली एवं बाड़ी नप. के पास एक-एक ही फायर बिगे्रड है जिन्हें आग लगने की सूचना पर तत्काल घटना स्थल पर पहुंचना होता है। नरवाई में आग गांव-गांव में किसानों द्वारा लगाई जाती है। विभिन्न स्थानों पर एक ही समय पर फायर बिगे्रड का पहुंचना कठिन बना रहता है। फायर बिगे्रड पर प्रशिक्षित फायरमेन न होने से भी आग पर काबू पाने में समस्याएं बनी रहती है। 

बेअसर प्रतिबंध - जिला प्रशासन द्वारा नरवाई में आग लगाने पर प्रतिबंध तो लगाया जाता है, परंतु प्रतिबंध का पालन, क्र्रियान्वयन कैसे हो समस्या बनी रहती है। दूर-दराज  के ग्रामों उनके सूने पड़े खेतों में कौन कब आग लगा गया पता ही नहीं चलता है। ग्रामीण स्तर पर जब नरवाई में लगी आग फसलों का नुकसान करती है, उसके बाद भी नरवाई में आग कहां से शुरु हुई पता लगना कठिन और आग लगाने वालों के विरूद्ध प्रभावी कार्यवाही का अभाव बना रहता है। 

भूसा बनाने में उपयोग - निचले स्तर पर किसानों में जागरुकता लाने के प्रति उदासीनता नरवाई में आग लगाने से होने वाले नुकसान के संबंध में जानकारियों का अभाव बना रहने से ही आग लगाने किसान सक्रिय हो पाए हैं। एक-दो वर्षों से नरवाई में आग लगाने से पूर्व हारवेस्टर के अवशेष से भूसा बनाने कुछ ही किसान सक्रिय हो पाए हैं। यदि वृहद स्तर पर अभियान चलाया जाए तो नरवाई में आग लगाने के स्थान पर भूसा बनाने से मवेशियों की चारा संबंधी समस्या का निदान आसानी से हो सकता है। ऐसे किसानों को प्रोत्साहित करने के साथ बनाए गये भूसा का व्यवसायिक करने भूसा गोदामों का निर्माण भी जरूरी है।

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