बकरियों में प्रजनन व नस्ल सुधार

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  • जलवायु के अनुरूप उपयुक्त नस्ल का चुनाव करें।
  • बकरियों में नियंत्रित गर्भधारण करनी चाहिए। उसके लिए नर और मादा को अलग-अलग रखें। 
  • हर सुबह बकरियों के झुंड में बकरा छोड़ें और जो बकरी गर्मी में हो उसे अलग करके बकरा लगायें। प्रतिदिन एक बकरे से दो से तीन बकरियां लगवायें। 
  • बकरा लगाने के बाद नियमित रूप से बकरी गाभिन है या नहीं इसकी जांच करें।
  • गाभिन बकरी को 300 ग्राम प्रतिदिन के हिसाब से दाना खिलायें। ये दाना बाजार में मिलता है। उससे बच्चे स्वस्थ और सुदृढ़ होते हैं। 
  • जब तक सबेरे बकरे का इस्तेमाल प्रजनन के लिए होता है। जब तक उसे प्रतिदिन 300 ग्राम  दाना खिलाये। 
  • हर तीसरे साल प्रजनन के लिए प्रयोग किया गया बकरा बदलें। 
  • प्रसव पश्चात् दो माह के अंदर बकरी गर्मी पर आ जाती है। इसकी नियमित रूप से जांच करें। 
  • जिन बकरियों का वजन कम हो ऐसी बकरियों को गाभिन न करवायें। 
  • एक बकरे से 45-50 बकरियों का रेतन करना उचित होता है, इसी अनुपात में बकरा-बकरी रखें।
  • बकरी डेढ़ वर्ष में दो बार बच्चे देती है। 
  • प्रजनन योग्य क्षमता की आयु बकरियों में 12 माह तथा बकरों में 1-2 वर्ष होती है। पर बकरी व मेमनों की स्वास्थ्य की दृष्टि से बकरी को 15 माह के पहले गर्भधारण नहीं करवाना चाहिए।
  • बकरियों के लिए गर्भावस्था का समय चैत्र-जेठ (अप्रैल-जून) एवं भादो-कार्तिक (सितम्बर-नवम्बर) उचित माना जाता है। किन्तु पौष्टिक आहार देने पर बकरी वर्ष भर गर्मी में आती रहती है। 
  • नियमित ऋतु काल 18-20 दिन का होता है। ऋतुकाल में गर्मी के लक्षण कुछ घंटे से लेकर 2-3 दिन तक दिखाई देते है। 
  • फलदायी समागम समय 6-20 घंटे तक ही होता है। 

नस्ल सुधार -

  • देशी नस्ल - तीस किलो वजन 

    आधा किलो दूध - देशी नर & देशी मादा 
    तीस किलो वजन, आधा किलो दूध - 
    एक बच्चा

  • उन्नत नस्ल दर - पचास किलो वजन

    देशी मादा - आधा किलो दूध -एक बच्चा
    उन्नत नस्ल - नर & देशी मादा 
    पचास किलो वजन, 1.5 किलो दूध - 2 बच्चे 

तरीके -

  • निकृष्ट बकरों का बधियाकरण करवायें। 
  • उन्नत नस्ल के बकरों से प्रजनन करवायें। 
  • हष्ट-पुष्ट, स्वस्थ तथा ज्यादा दूध देेने वाली बकरियों का उन्नत नस्ल के बकरों से प्रजनन करवायें। 
  • एक बार में एक से अधिक बच्चे देने वाली बकरियों को प्रजनन हेतु उपयोग में लाये। 

बधियाकरण 

  • नर बकरों  को बरडिजो कैस्ट्रेटर से नसबंदी करवाना बधियाकरण कहलाता है। 
  • बकरी पालन में तीस बकरियों के पीछे एक नर बकरा रखा जाना चाहिए।

बधियाकरण से लाभ -

  • झुंड में अनावश्यक प्रजनन को रोकता है। 
  • पशु के मांस में बढ़ोत्तरी होती है। जिससे अधिक कीमत प्राप्त होती है। 
  • नर बकरों की खास गंध से छुटकारा मिलता है।
  • मांस की गुणवत्ता में वृद्धि होती है। 
  • चमड़ी का अधिक दाम मिलता है। 
  • बधियाकृत नर झुंड से अलग नहीं भागते। 

बरडिजो कैस्ट्रेटर से छह माह के ऊपर के नर बकरों का बधियाकरण करना चाहिये एवं बधियाकरण करने के उपरांत टिंचर आयोडीन लगाना चाहिए। इससे संक्रमण कम होता है।

बकरी में गर्मी के लक्षण -

  • बकरी सुस्त, बैचेन रहती है पूंछ उठाकर विशेष प्रकार की आवाज करती है, खाना-पीना कम कर देती है। 
  • अचानक दूध में कमी आ जाती है। दूसरी बकरियों पर चढऩे की कोशिश करती है। 
  • योनि द्वार गुलाबी तथा सूजा लगता है। 
  • बकरा गर्मी के लक्षणों वाली बकरी की पहचान जल्दी कर लेता है। 
  • डॉ. दीपक लाल कुम्हार द्य डॉ. ब्रजेश सिंह
  • डॉ. पी.सी. शुक्ला द्य डॉ. शशि प्रधान
  • email : rekhash10@gmail.com
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