भावान्तर को लेकर सुगबुगाहट

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इंदौर। किसानों की हितैषी बनकर मध्य प्रदेश में सत्तासीन हुई कांग्रेस किसानों की कर्जमाफी के बाद अब आगामी लोकसभा चुनाव को देखते हुए भावान्तर भुगतान की राशि देने की तैयारी कर रही है इसे लेकर सुगबुगाहट है। योजना से संबंधित आंकड़े एकत्रित किए जा रहे हैं। हालांकि जानकारों ने प्रदेश की वर्तमान आर्थिक स्थिति को देखते हुए इस भुगतान पर संदेह व्यक्त किया है।  पूरे प्रदेश में कृषि विभाग के जरिए भावान्तर भुगतान के आंकड़े एकत्रित किए जाने की खबर है। हालांकि इस बारे में न तो कोई स्पष्ट आदेश जारी हुए हैं और न ही अधिकारी कुछ कह रहे है, लेकिन सुगबुगाहट है। स्मरण रहे कि इसके पूर्व प्रदेश के कृषि मंत्री श्री सचिन यादव ने भावान्तर भुगतान योजना को किसानों के बजाय व्यापारियों के लिए लाभप्रद बताते हुए इसे बंद करने की बात कही थी। लेकिन बाद में मुख्यमंत्री श्री कमलनाथ को स्पष्टीकरण देना पड़ा था कि यह योजना बंद नहीं हुई है। मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद भुगतान किया जा सकता है। यह जानकर किसानों में भावान्तर भुगतान की अटकी हुई राशि मिलने की उम्मीद जगी है। लेकिन जानकारों के अनुसार इस योजना में सरकार पर करोड़ों का भार आने और फिलहाल आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होने से भुगतान होने पर संदेह व्यक्त किया है, क्योंकि अभी तो किसानों की कर्जमाफी की राशि भी सही तरीके से किसानों के खातों में नहीं आई है।

उल्लेखनीय है कि किसानों को उनकी सोयाबीन और मक्का की उपज का उचित मूल्य दिलाने के मकसद से तत्कालीन शिवराज सरकार ने गत वर्ष भावांतर भुगतान योजना शुरू की थी जिसके तहत 20 अक्टूबर 1918 से 19  जनवरी 2019 के बीच किसानों से खरीदी गई सोयाबीन और मक्का की फसल पर 500 रुपए तक प्रति क्विंटल का भावान्तर भुगतान करने के आदेश जारी किए गए थे।

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