जायद फसलों को दें उर्वरक की खुराक

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मूंग- बीज उपचार के बाद 20 किलोग्राम नत्रजन, 140 किलोग्राम फास्फोरस, 33 किलोग्राम पोटाश और 20 किलो ग्राम गंधक प्रति हेक्टेयर की दर से उपयोग करना चाहिए। संपूर्ण उर्वरक की मात्रा बुआई करते समय बीज को कूंड के नीचे 5 सेमी की गहराई पर ड्रिल करके प्रयोग करें। राइजोबियम कल्चर के उपयोग से मूंग की उपज 15 प्रतिशत बढ़ जाती है। फफूंदनाशक दवा से उपचारित मूंग  के बीज को राइजोबियम कल्चर की 10 ग्राम मात्रा प्रति किलोग्राम बीज से उपचारित करें। बीज को उर्वरक के साथ मिलाकर बुआई न करें। उर्वरकों को बीज के 4-5 सेमी नीचे ड्रिल कर प्रयोग करने से खेत में बिखेर कर अंतिम जुताई के समय उर्वरकों को प्रयोग करने की अपेक्षा 22-35 प्रतिशत मूंग की अतिरिक्त उपज मिलती है।

उड़द- भरपूर की पैदावार के लिए उड़द के लिए 30 किलोग्राम यूरिया और 100 किलोग्राम फास्फोरस प्रति हैक्टेयर की सिफारिश की गई है। अनुसंधान प्रयोगों के परिणामों में पाया गया है कि आलू के बाद उड़द की खेती करने में बिना उर्वरक प्रयोग किए भी अच्छी पैदावार ली जा सकती है।

सूरजमुखी- बुआई के 20 से 30 दिन पूर्व 20 टन प्रति हैक्टेयर की दर से नाडेप कम्पोस्ट खाद को मिट्टी में मिलायें। सिंचित भूमि में 40 किलोग्राम नत्रजन, 50 किलोग्राम फास्फोरस और 40 किलोग्राम पोटाश प्रति हैक्टेयर की दर से प्रयोग करें। नाइट्रोजन की आधी मात्रा बुआई के समय तथा शेष आधी मात्रा फूल आते समय देना चाहिए। फास्फोरस और पोटाश की पूरी मात्रा बुआई के समय बीज के नीचे ड्रिल करके प्रयोग करें। उर्वरक को कभी भी बीज में मिलाकर न बोयें। फसल को गंधक और बोरोन दोनों तत्व महत्वपूर्ण है। अत: गंधक की पूर्ति के लिए अमोनियम सल्फेट, सुपर फास्फेट तथा पोटेशियम सल्फेट आदि उर्वरकों का प्रयोग करें जिसमें गंधक की मात्रा काफी रहती है। बोरोन की पूर्ति के लिए बोरेक्स 10 से 12 किलोग्राम प्रति हैक्टेयर की दर से बुआई से समय मिट्टी में अन्य उर्वरकों के साथ मिलाकर डालना चाहिए जिंक की कमी वाली मिट्टियों में 20 से 25 किलोग्राम जिंक सल्फेट प्रति हैक्टेयर का प्रयोग अवश्य करना चाहिए। गंधक की पूर्ति जिप्सम 200 किलोग्राम/ हैक्टेयर सेमी की जानी चाहिए।

जायद की फसल में उर्वरक की मात्रा रबी फसल में दी गई उर्वरक की मात्रा पर निर्भर करती है। जायद फसलों की उपज बढ़ाने के लिए खाद व पर्याप्त मात्रा में उर्वरक की संतुलित मात्रा में सही समय व विधि अनुसार उपयोग किया जाए। उत्तम किस्म के बीजों व उर्वरकों के संतुलित उपयोग से फसलोत्पादन में वृद्धि होती है। रसायनिक उर्वरकों के साथ जैविक खादों का उपयोग लाभप्रद रहता है।

मूूंगफली- जायद में बोई जाने वाली मूंगफली  के लिए 40 किलोग्राम नत्रजन, 60 किलोग्राम फास्फोरस, 30 किलोग्राम पोटाश प्रति हैक्टेयर देना पर्याप्त होता है। ग्रीष्मकालीन मूंगफली के लिए सिंगल सुपर फास्फेट, यूरिया और पोटाश के रुप में उर्वरक दिये जाना चाहिए क्योंकि सिंगल सुपर फास्फेट से पौधे के लिए कैल्शियम और गंधक अतिरिक्त रुप से मिल जाता है। उर्वरक की संपूर्ण मात्रा बुआई के समय कतारों में बीज 2-3 सेमी की गहराई पर  देना चाहिए। बुआई के 20-30 दिन बाद 20 किलोग्राम यूरिया प्रति हेक्टेयर की टॉप ड्रेसिंग करने से फसल की प्रारंभिक वृद्धि अच्छी आ जाती है तथा उत्पादन अधिक प्राप्त होता है। प्रयोगों द्वारा देखा गया है कि मूंगफली की जड़ों के समुचित विकास के लिए फास्फोरस आवश्यक एवं लाभप्रद है। पोटाश पौधों की सामान्य बढ़वार एवं फलियों के विकास में सहायक होता है। साथ ही कैल्शियम एवं गंधक की उचित मात्रा फलियों के विकास एवं गुणों को बढ़ाने का कार्य करती है। कैल्शियम की अनुपस्थिति या कमी से फलियां छोटी, सिकुड़ी या बिना बीज की बनती है।

ग्वार- इस फसल की अपनी नाइट्रोजन की आवश्यकता को नाइट्रोजन यौगिकीकरण नामक क्रिया से पूरा हो जाता है। इस पौधों की जड़ों में उपयोगी ग्रंथिकाएं पर्याप्त मात्रा में बन जाती हैं। जिससे नाइट्रोजन का यौगिकीकरण होता है। आधार खाद में 60 किलोग्राम फास्फोरस व 30 किलोग्राम पोटाश प्रति हे की दर से बीज से 5 से 7 सेमी गहराई में बुआई के समय में प्रयोग करें।

 

 

 

मक्का- चारे के लिए बोई गई मक्का को प्रति हेक्टर 60 किलोग्राम नत्रजन एवं 50 किलोग्राम फास्फोरस की आवश्यकता होती है। इन तत्वों को क्रमश: अमोनियम सल्फेट तथा सिंगल सुपर फास्फेट के रुप में दिया जा सकता है। नाईट्रोजन की दो तिहाई मात्रा और फास्फोरस की पूरी मात्रा बुआई से पूर्व अंतिम हैरो करते समय मिलानी चाहिए। नाईट्रोजन की शेष मात्रा बुआई के 30 से 35 दिन बाद प्रयोग करें। देशी मक्का के लिए नाइट्रोजन की कम मात्रा (40 से 50 किलोग्राम प्रति हेक्टर) प्रयोग करें। जहां मक्का को बरसीम जैसी फलीदार फसल के बाद बोया जाता है, वहां नाइट्रोजन की एक तिहाई मात्रा की कमी कर देनी चाहिए।
 

  • डॉ. विजय कुमार जैन
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