किसानों को फिर रुला रहा प्याज

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(इंदौर कार्यालय)

इंदौर। वैसे तो प्याज को काटने पर व्यक्ति की आँखों में आंसू आते हैं, लेकिन प्याज उत्पादकों को प्याज की कीमत लागत से भी कम मिलने से उनके आंसू निकल रहे हैं। इसके लिए बाजार की वर्तमान दशा के साथ ही सरकार की नीतियां भी जिम्मेदार हैं।

इन दिनों क्षेत्रीय प्याज उत्पादक किसान प्याज के बढिय़ा उत्पादन के बावजूद निराश हैं,क्योंकि एक बार फिर उनको अपनी प्याज की फसल की उचित कीमत नहीं मिल रही है। ऐसे में  कई किसान प्याज की फसल को खेतों से उखाडऩे में ही कतरा रहे हैं, क्योंकि उसकी मजदूरी और मंडी तक का भाड़ा भी नहीं निकल रहा है। ग्राम अरंडिया के किसान  श्री राजा कुमावत ने बताया कि खरीदी भाव कम होने से अभी प्याज बेचा नहीं है। एक बीघा जमीन में प्याज लगाने की लागत  करीब 50 -60  हजार रु. आती है। लीज पर खेती करने पर यह लागत 90  हजार रु. तक हो जाती है। एक बीघे में करीब 80 क्विंटल उत्पादन होता है। वर्तमान में मंडी  में एमपी के प्याज का खरीदी भाव ढाई -तीन रु. प्रति किलो और नाशिक का 4 रुपए प्रति किलो चल रहा है। ऐसे में यह लागत से भी आधा पड़ रहा है, जो घाटे का सौदा है वहीं ग्राम तिल्लोरखुर्द के किसान श्री सचिन मुकेश पाटीदार ने सुझाव दिया कि सरकार को एक माह तक प्याज की खरीदी कर स्टॉक कर फिर बेचना चाहिए। अभी पुराने प्याज का स्टॉक ही 30 प्रतिशत पड़ा है, जबकि नए प्याज की आवक दो-तीन महीने और रहेगी। ऐसे में आवक बढऩे से भाव ज्यादा नहीं बढ़ेंगे और इसका घाटा किसानों को होगा।

किसानों की इस हालत के लिए सरकारी नीति भी जिम्मेदार है। किसानों का कहना है कि तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह ने न केवल प्याज की समर्थन मूल्य पर खरीदी की थी, बल्कि इसे भावान्तर योजना में भी शामिल किया था। लेकिन राज्य की वर्तमान कांग्रेस सरकार ने किसानों के हित में ऐसी कोई घोषणा नहीं की है। इस कारण भी किसानों को बहुत नुकसान हो रहा है। यदि ऐसे ही हालात रहे तो किसानों का प्याज की खेती से मोहभंग हो जाएगा।

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