सुरक्षित अनाज भंडारण के प्रमुख उपाय

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भारत में अनाज और तिलहन की फसलों में 10 से 20 प्रतिशत तक का नुकसान अनुमानित है। भंडारण के दौरान बीज व अनाज  को क्षति पहुंचाने में कीट अपना अहम किरदार निभाते हैं। भंडार कीटों की लगभग 50 प्रजातियां हैं जिनमें से करीब आधा दर्जन प्रजातियां ही आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। भंडार कीटों में कुछ कीट आंतरिक प्राथमिक तो कुछ बाह्य गौण भक्षी होते हैं। ऐसे कीट जो स्वयं बीज को सर्वप्रथम क्षति पहुंचाने में सक्षम होते हैं वे प्राथमिक कीट कहे जाते हैं। इनमें सूंड वाली सुरसुरी, अनाज का छोटा छिद्रक प्रजातियां प्रमुख हैं। गौण कीट वे हैं जो बाहर रहकर भू्रण या अन्य भाग को क्षति पहुंचाते हैं। 

अनाज संक्रमित कीटों के प्रकार

कवक: कवक एक कोषिकीय बीजाणु है जिनमें जनन स्वत: ही होता है इसलिए इनके बीजाणुओं को पर्यावरण की पहुंच से दूर रखा जाना चाहिए ताकि ये भंडारित अनाज को संक्रमित ना कर सके। भंडाारित अनाजों में कवक संक्रमण की अवस्था को पहचानना मुश्किल है। संक्रमण का फैलाव बीजाणुओं द्वारा होता है जो वातावरण में मौजूद हवा और कीटों द्वारा एक स्थान से दूसरे स्थान फैलते हैं। दाने का कालापन और तीखी गंध,  कवक संक्रमण के कुछ मुख्य लक्षण है ंजिससे अनाज की गुणवता, रंग और स्वाद प्रभावित होते हैं और खाने की वस्तुओं की पौष्टिकता में भी भारी कमी आती है। भण्डारित स्थान पर उमस और नमी का होना कवक संक्रमण का प्रमुख कारण है। अनाज को कवक के संक्रमण से बचाने के लिए पूरी तरह सुखाकर भंडारण करना ही उचित माना जाता है।

कीट : भृंग और पंतग दो मुख्य प्रकार के कीट होते हैं जो भण्डारित दालों और अनाजों को नुकसान पहुंचाते हैं। कीटों को जिंदा रहने के लिए आवश्यक सभी शर्ते भंडारगृह में अच्छी तरह से मौजूद होती हैें। दोनों के बच्चों को पहचानना बहुत ही मुश्किल होता है क्योंकि ये बहुत छोटे बीज के समान आकृति वाले होते हैं जोकि बीजों के अंदर रहकर नुकसान पहुंचाते हंै। टूटे हुए बीजों को भण्डारित करने से कीटों व कीड़ों को बुलावा मिलता है इसलिए कभी भी साबुत बीजों के साथ टूटे हुए बीजों को भण्डारित न करें। इनमें आटे का घुन, खपरा बीटल, चावल का पतंगा आदि प्रमुख हैं।

 

चूहे : भंडारित अनाज को नुकसान पहुंचाने में चूहे भी एक प्रमुख कारण है। चूहे जूट के बने हुए थैलों  में आसानी से छेदकर के बीजों को काफी नुकसान पहुंचा देते हैं जिससे खाद्य पदार्थ की गुणवत्ता में कमी आने से अनेक प्रकार हानिकारक बीमारियां फैलती हैं। चूहों की रोकथाम पिंजरों का प्रयोग कर व रासायनिक उपचार दोनों प्रकार से किया जा सकता है परन्तु पिंजरे का प्रयोग करना अधिक सार्थक माना जाता है।

कीड़ों की संख्या बढऩे के मुख्य कारक 

अनाज में नमी का प्रतिशत: किसान भाई इस बात को अच्छी तरह से जान लें कि खाद्यान्न पदार्थ में कीड़ों की प्रकोप के लिए एक निश्चित प्रतिशत में नमी होना आवश्यक है। अनाज भंडारण के समय 8-10 प्रतिशत या इससे कम नहीं कर देने पर खपरा बीटल को छोड़कर किसी भी अन्य कीट का आक्रमण नहीं हेाता। खपरा बीटल कीट 2 प्रतिशत नमी तक भी जिन्दा रहता है, बड़े गोदामों में नमी रोधी संयंत्र लगाना चाहिए। जिससे बरसात में भी नमी नहीं बढ़े।

उपलब्ध ऑक्सीजन : अनाज वायुरोधी भंडारगृह में रखें। बीज को जीवित रखने के लिए केवल 1 प्रतिशत ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है तथा कीटों को भी श्वसन हेतु ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है। खपरा बीटल 16.8 प्रतिशत से कम ऑक्सीजन होने पर आक्रमण नहीं करता है। अर्थात् भंडारण में ऑक्सीजन कम करके कीड़ों की रोकथाम की जा सकती है। ऑक्सीजन का प्रसार होने पर कीट अधिक लगते हैं।

तापक्रम: नमी की तरह कीटों के विकास के लिए एक निश्चित तापक्रम की आवश्यकता होती है जो कीटों के अधिक विकास के लिए 28 से 32 डिग्री सेन्टीग्रेड होती है। तापक्रम के पूर्ति के लिए कुछ कीट हीट स्पाट निर्माण करते हैं, इसे रोकने के लिए भंडार गृहों में या तो वायु प्रवेश करा दें या फिर अनाज को उलट-पुलट कर दें। कीड़ों को मार कर उनकी संख्या घटाएंं। 

भंडारण से पूर्व

  • सबसे पहले बीज भंडारण के लिए प्रयोग होने वाले कमरे, गोदाम या पात्र जैसे कुठला इत्यादि के सुराखों एवं दरारों को यथोचित गीली मिट्टी या सीमेंट से भर दें।
  • यदि भंडारण कमरे या गोदाम में करना है तो उसे अच्छी तरह साफ करने के पश्चात् चार लीटर मैलाथियान या डीडीवीपी को 100 ली. पानी में 40 मिली कीटनाशी एक ली. पानी में घोलकर हर जगह छिड़काव करें।
  • बीज रखने हेतु नई बोरियों का प्रयोग करें। यदि बोरियां पुरानी हैं तो उन्हें गर्म पानी में 50 सेग्रे पर 15 मिनट तक भिगोएं या फिर उन्हें 40 मिली मैलाथियान 50 ईसी या 40 ग्राम डेल्टामेथ्रिन 2.5 डब्लूपी डेल्टामेथ्रिन 2:8 ईसी की 38.0 मिली प्रति ली. पानी के घोल में 10 से 15 मिनट तक भिगोकर छाया में सुखा लें और इसके बाद उनमें बीज या अनाज भरें।
  • भंडारण करने से पहले यह जांच कर लें कि नये बीज में कीड़ा लगा है या नहीं। यदि लगा है तो भंडार गृह में रखने से पूर्व उसे एल्यूमिनियम फॉस्फाइड द्वारा प्रद्यूमित कर लें।
  • ऐसे बीज जिनकी बुआई अगली फसल के बीजने तक निश्चित होए उनको कीटनाशी जैसे 6 मिली मैलाथियान या 4 मिली डेल्टामेथ्रिन को 500 मिली पानी में घोलकर एक क्विंटल बीज की दर से उपचारित करें एवं छाया में सुखाकर भण्डारण पात्र में रख लें। कीटनाशी द्वारा उपचारित इस प्रकार के बीजों को किसी रंग द्वारा रंग कर भण्डार पात्र के उपर उपचारित लिख देते हैं। इस प्रकार का उपचार कम से कम छ: माह तक काफी प्रभावी होता है। परन्तु ऐसा उपचार खाने वाले अनाज में नहीं करें एवं उपचारित बीज को कभी भी आदमी या जानवर द्वारा नहीं खाना चाहिए।
  • यदि मटके में भंडारण करना है तो पात्र में आवश्यकतानुसार उपले या गोसे डालें और उसके ऊपर 500 ग्राम सूखी नीम की पत्तियां डालकर घुआं करें एवं ऊपर से बन्द करके वायु अवरोधी कर दें। उस पात्र को 4 से 5 घंटे बाद खोलकर ठंडा करने के पश्चात् साफ करके बीज या अनाज का भंडारण करें। यदि मटका अंदर व बाहर से एक्रीलिक पेंट से पुते हों तो 20 मिली मैलाथियान 50 ईसी को एक ली. पानी में मिलाकर बाहर छिड़काव करें एवं छाया में सुखाकर प्रयोग करें। बीज या अनाज भरने के बाद पात्र का मुंह बन्द कर वायु अवरोधी कर दें।
  • बीज भरी बोरियों या थैलों को लकड़ी की चौकियों, फट्टों अथवा पॉलीथिन की चादर या बाँस की चटाई पर रखें ताकि उनमें नमी का प्रवेश न हो सके।

भंडारण के बाद

  • भंडारण के कुछ कीट फसल की कटाई से पहले खेत में ही अपना प्रकोप प्रारम्भ कर देते हैं। ये कीट फसल के दानों पर अपने अंडे देते हैं जो आसानी से भंडार गृह में पहुंचकर हानि पहुंचाते हैं। इस प्रकार के कीटों में अनाज का पतंगा प्रमुख है। ऐसे कीटों से बीजों को बचाने हेतु एल्युमिनियम फॉस्फाइड की दो से तीन गोलियां (प्रत्येक 3 ग्राम) प्रति टन बीज के हिसाब से 7 से 15 दिन के लिए प्रद्यूमित कर देते हैं। ऐसा प्रद्यूमन भण्डार में रखने के तुरंत बाद करें। प्रद्यूमित कक्ष खोलने के बाद जब गैस बाहर निकल जाए तो उसी दिन या अगले दिन 40 मिली मैलाथियान, 38 मिली डेल्टामेथ्रिन या 15 मिली बाइफेंथ्रिन प्रति लीटर पानी के हिसाब से मिलाकर बोरियों के ऊपर छिड़काव कर दें।
  • बीज प्रद्यूमित करते समय एल्यूमिनियम फॉस्फाइड की मात्रा 6.0 से 9.0 ग्राम (2 से 3 गोली) प्रति टन बीज के हिसाब से आवरण प्रद्यूमन (कवर फ्यूमीगेशन) एवं 4.5 से 6.0 ग्राम (1.5 से 2.0 गोली) प्रति घन मीटर स्थान (स्पेस या गोदाम फ्यूमीगेशन) के हिसाब से निर्धारित करते हैं।
  • प्रद्यूमन करते समय ध्यान रखें कि अच्छी गुणवत्ता वाला वायुरोधी कवर ही प्रयोग करें जिसकी मोटाई 700 से 1000 गेज या 200 जी एस एम होनी चाहिए। बहु सतही, मल्टीक्रास लैमिनेटेड, 200 जी एसएम के कवर प्रद्यूमन हेतु अच्छे होते हैं।
  • ज्यादा कीट प्रकोप होने पर प्रद्यूमन दो बार करें। इसमें पहले प्रद्यूमन के बाद कवर 7 से 10 दिन खुला रखने के बाद दूसरा प्रद्यूमन 7 से 10 दिन के लिये पुन: कर दें। इससे कीटों का नियंत्रण अच्छी तरह से हो जाता है।
  • भंडार गृह को 15 दिन में एक बार अवश्य देखें। बीज में कीट की उपस्थिति, फर्श व दीवारों पर जीवित कीट दिखाई देने पर आवश्यकतानुसार कीटनाशी का छिड़काव करें। यदि कीट का प्रकोप शुरूआती है तो 40 मिली डीडीवीपी प्रति ली. पानी के हिसाब से मिलाकर बोरियों के ऊपर एवं अन्य स्थान पर हर जगह छिड़काव करें। कीट नियंत्रण हो जाने के बाद हर पंद्रह दिन बाद ऊपर लिखे कीटनाशकों को अदल-बदल कर छिड़काव करते रहें।
  • मटके या कुठले में रखे जाने वाले बीज को पहले एल्यूमिनियम फास्फाइड की एक गोली द्वारा (एक किग्रा से आधा टन बीज) प्रद्यूमित करके रखें। यदि प्रद्यूमित नहीं किया है तो रखने के कुछ समय पश्चात उस पात्र में कीटों की उपस्थिति देख लें। अगर कीट का प्रकोप नहीं है तो दुबारा बन्द कर दें और यदि है तो बीज को एल्यूमिनियम फॉस्फाइड द्वारा प्रद्यूमित कर रखें।
  • विवेक शर्मा
  • शीतलराज शर्मा
  • email : vsharma2491@gmail.com
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