साल भर हरा चारा

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पशुओं का स्वास्थ्य समय से प्रजनन एवं सस्ते दुग्ध उत्पादन की दृष्टि से हरे चारे का बड़ा महत्व है। 

हरे एवं रसीले चारे- हरे चारे वे चारे हैं जिनमें पानी की मात्रा अधिक पाई जाती है। सामान्यत: इनमें पानी (नमी) की मात्रा 70-80 प्रतिशत होती है। इसी प्रकार इन चारों में शुष्क पदार्थ (ड्राई मेटर) की मात्रा 20-30 प्रतिशत तक होती है। यह चारे स्वादिष्ट, रसदार, सुपाच्य, पौष्टिक तथा दुर्गन्ध रहित होने के साथ-साथ चारे की फसल थोड़े समय में पैदा होने वाली अधिक, अधिक पैदावार देने वाली तथा अधिक कटाई देने वाली होती है। इन चारे की फसलें ऐसी होंं जिससे उनसे साइलेज तथा हे आसानी से बनाया जा सके। इस प्रकार जिस मौसम में हरा चारा उपलब्ध न हो तो साइलेज खिलाकर पशुओं की आवश्यकता पूरी हो सके।

चारे की मुख्य फसलें

दो दाल बाली फसलों में मुख्यत: रबी में बरसीम, खरीफ में लोबिया व ग्वार तथा एक दाल वाली फसलों में रबी में जई, खरीफ में मक्का, ज्वार, बाजरा, मकचरी आदि होती है। सर्दियों में शलजम, तिलहन, सरसों तथा बहुवर्षीय दलहनी फसलों में रिजका, स्टाईलो, राइसबीन आदि तथा घासों में हाथीघास, पाराघास, दीनानाथघास, सुडान घास, रोड घास, नन्दी घास, राई घास आदि हरे चारे के रुप में प्रयोग होने वाली घासें होती है। चारे की अच्छी पैदावार के लिए निम्र बातों पर ध्यान देने की आवश्यकता होती है।

उपज कैसे बढ़ाएं 

चारे की उपज बढ़ाने के लिए निम्रलिखित सुझाव ध्यान देने योग्य हैं-

  • चारे की प्रजातियों का चुनाव उनकी अधिक उपज करने की क्षमता पर की जाए।
  •  चारा पशुओं को कीड़ों तथा बीमारियों से बचाया जाए।
  • जलवायु एवं भूमि की खराब परिस्थितियों को सहने की क्षमता रखने वाली प्रजाति का चुनाव करें।
  • प्रति एकड़ अधिक पोषक तत्व देने वाली प्रजाति का चुनाव करें।  
  • चारा फसलें पशुओं के लिए स्वादिष्ट, पाचक और रसीली होनी चाहिए। द्य पर्याप्त तकनीकी निवेश जैसे- उत्तम बीज, सिंचाई, खाद के प्रयोग करने पर अधिक उत्पादन देने वाली प्रजाति होनी चाहिए। 
  • कम समय में चारे की अधिक फसल देने वाली प्रजाति का चुनाव करें। 
  • चारा प्रजाति में अधिक बीज पैदा करने की क्षमता भी होनी चाहिए।

सालभर चारा

दूध वाले व गर्भित पशुओं को वर्ष भर कुछ ना कुछ मात्रा में हरे चारे की जरुरत अवश्य होती है। वर्ष भर हरे चारे की उपलब्धता के सुझाव -

  • अनाज की खेती के साथ-साथ हरे चारे के उत्पादन में मिश्रित खेती को बढ़ावा दिया जाए। जिससे किसानों को अनाज एवं चारा दोनों मिल सके । 
  • बहुवर्षीय घासों एवं मौसमी चारे की मिश्रित खेती को बढ़ावा दिया जाए।
  • सिंचाई, बीज एवं खाद के साथ-साथ आधुनिक तकनीकी का उपयोग कर पूरे वर्ष हरे चारे का उत्पादन लिया जाए।
  • सघन चारा उत्पादन हेतु (1) ओवर लैपिंग विधि तथा (2) रिले क्रोपिंग विधि को अपनाया जाए।

 

  • शिवमूरत मीणा
  • मो. : 09549473344

 

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