किसानों की कंपनी धाकड़ आर्गेनिक्स

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नीमच। बढ़ते केमिकल्स रसायनिक युक्त खेती के दुष्प्रभाव अपने परिवार में देख 5 वर्ष पूर्व जैविक खेती की ठानी और धीरे-धीरे समीपस्थ ग्रामों के 110 कृषकों को भी साथ में जोड़ा। सभी कृषक जैविक तरीके से अनाज का उत्पादन कर 'धाकड़ आर्गेनिक्स' के नाम से बाजार में उपलब्ध करा रहे हैं। यह बात है जिला मुख्यालय से 10 कि.मी. दूर ग्राम दासखेड़ा की। यहां के कृषक श्री बाबूलाल धाकड़ ने अपनी 22 वर्ष की अवस्था में 48 वर्षीय पिता की हार्ट अटैक से असमय मृत्यु देखी एवं ग्राम में अन्य कृषकों को भी अल्प समय में गंभीर बीमारियों से जूझते देखा, तभी से श्री धाकड़ ने पता लगाया कि जो अनाज का सेवन कर रहे हैं वहां रसायनिक खेती से प्रदूषित हो गया है। तभी से अपनी 20 बीघा भूमि पर जैविक तरीके से रबी सीजन में गेहूं, अफीम, चना, अजवाइन की एवं खरीफ में सोयाबीन, उड़द, मूंग, मूंगफली, मक्का की खेती करते हैं। इस वर्ष 4 बीघा में वंशी प्रजाति का गेहूं लगाया जिसका 40 क्विंटल उत्पादन होने की संभावना है। श्री धाकड़ ने जैविक प्रमाणीकरण संस्था में पिछले 4 वर्ष पूर्व पंजीयन कराया था। अब वह पूर्ण की एवं जैविक उत्पाद क्रय करने वाली कई संस्थाओं से संपर्क में है। क्षेत्र के लगभग 300 हेक्टर में जैविक खेती हो रही है। वर्मी कम्पोस्ट, गोबर खाद के उपयोग से रसायनिक उर्वरकों पर बचत की है। श्री धाकड़ बताते हैं कि जैविक तरीके से उत्पादित अनाज को अन्य अनाज के दाम से 10 से 15 प्रतिशत अधिक दाम पर उपलब्ध कराते हैं। श्री धाकड़ ने घर पर ही मूंगफली एवं सरसों के शुद्ध तेल निकालने की मशीन भी स्थापित की है। तेल 1 लीटर में अन्य स्थानों पर विक्रय करते हैं। श्री धाकड़ अन्य कृषकों से जैविक तरीके से उत्पादित अनाजों के विक्रय के लिए बाजार तलाश रहे हैं। जिससे आने वाले समय में कृषकों को फसल का बेहतर दाम एवं प्रदूषण से भूमि को मुक्ति मिलेगी। श्री बाबूलाल धाकड़ से अन्य जानकारी उनके मो. : 7354138072 पर ले सकते हैं।
 

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