सामने खड़ी है किसानों की आय दोगुना करने की चुनौती

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इंदौर। यदि अतीत पर नजर डालें तो पाएंगे कि 1960 के दशक की भुखमरी को पीछे छोड़कर भारत ने आज खाद्य उत्पादन में अधिशेष की स्थिति हासिल कर ली है। प्रौद्योगिकी के कारण कृषि अब मानव संचालन से आगे निकल कर वैज्ञानिक तरीकों में तब्दील हो गई है। कृषि क्षेत्र में रोजगार सृजन के साथ ही विदेशी मुद्रा अर्जित कर सर्वांगीण विकास हुआ है। निजी और सार्वजनिक भागीदारी के द्वारा खाद्य उत्पादन को 285 मिलियन टन के उच्च स्तर पर पहुंचाया है। बागवानी फसलों में भी बढिय़ा सुधार हुआ है।

इतना होने के बाद भी कृषि के बुनियादी आधार बीज, उर्वरक, सिंचाई, रसायन, फसल सुरक्षा और कृषि मशीनरी के लिए पर्याप्त निवेश की जरूरत होती है। इसके अलावा गांव में परिवहन सुविधाएं और उपयुक्त भंडारण की सुविधा होना भी जरुरी है, जिसमें निजी क्षेत्र के साथ सार्वजनिक क्षेत्र से अब तक मिले सहयोग के साथ भविष्य में भी अपेक्षित है।

कृषि निर्यात नीति 2018 को मंजूरी

उल्लेखनीय है कि इसी क्रम में गत 7 दिसंबर को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कृषि निर्यात नीति 2018 को मंजूरी दी थी। इस नीति के क्रियान्वयन की निगरानी के लिए वाणिज्य मंत्रालय को नोडल बनाया गया है। सरकार का यह प्रयास 2022 तक किसानों की आय को दुगुना करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इस नीति के जरिए भारतीय किसानों और कृषि उत्पादों को वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं के साथ एकीकृत करने की कोशिश की जाएगी। वर्तमान में कृषि निर्यात यूएस 30  बिलियन डॉलर है, जिसे 2022 तक 60  बिलियन डॉलर तक करने का लक्ष्य है। लेकिन यह मंजिल अभी दूर लग रही है।

बता दें कि खाद्यान्न, मुर्गीपालन,कपास, दूध और अन्य में दुनिया के दूसरे सबसे बड़े कृषि उत्पादक देश होने के बावजूद किसानों की आय को दुगुना करने की चुनौती सामने खड़ी है। जिसे पूरा करने के लिए बैंक और वित्तीय संस्थान अहम भूमिका निभा सकते हैं। दुनिया के दरवाजे पर दस्तक देने के लिए हमारे पास वैश्विक अवसर हैं। लेकिन इसके पूर्व ग्रामीण क्षेत्र की समस्याओं, असुविधाओं, संचार साधनों के साथ ही  विपणन क्षमता की कमियों को दूरकर आय के नए स्रोत खोजने होंगे। जिसे केवल कृषि उत्पादकता बढ़ाकर ही सुधार किया जा सकता है। इसके लिए सरकार और निजी क्षेत्र विज्ञान और प्रौद्योगिकी के सहयोग से प्रयास करे तो भविष्य में किसानों की आय दुगुनी करने की चुनौती को स्वीकार किया जा सकता है। इसके लिए केंद्र सरकार प्रयत्नशील है।   
 

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