मशरूम की खेती बनी प्रवीण की अतिरिक्त आय का जरिया

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इंदौर। आत्मा परियोजना इंदौर से एक दिवसीय प्रशिक्षण पश्चात् ग्राम पालकांकरिया तहसील सांवेर निवासी श्री प्रवीण यादव ने मशरूम का उत्पादन आरम्भ कर अतिरिक्त कमाई भी शुरू कर दी है। उनकी इस सफलता से अन्य लोग भी प्रेरित होंगे।

इस बारे में 19  वर्षीय श्री  प्रवीण यादव ने कृषक जगत को बताया कि मशरूम की खेती की प्रेरणा उप संचालक आत्मा परियोजना इंदौर श्रीमती शर्ली थॉमस से मिली। इसके बाद इंदौर आकर आत्मा परियोजना के तहत मशरूम उत्पादन का एक दिवसीय  प्रशिक्षण प्राप्त किया। मशरूम उत्पादन की विधि बताते हुए कहा कि पहले 50 किलो भूसा लिया और ढाई हजार रूपये में 50 किलोग्राम स्पान (मशरूम का बीज) खरीदा। फिर  5 लीटर फर्मलीन लिया और 500 रूपये की पॉलीथिन की बड़ी-बड़ी थैलियाँ भी खरीदी, जिसमें 5 किलो भूसा आ जाये। फिर  शाम को 50 किलो भूसा, पानी में भिगो दिया और दूसरे दिन पानी में भूसे को छानकर प्लास्टिक  पन्नी में भर दिया। इन भूसे से भरी पन्नियों को एक हवादार कमरे में रख दिया गया और बीच-बीच में  मशरूम का बीज पन्नी में डाल दिया और उसमें 10-15 छेद कर दिए। 5 से 7 दिन बाद उन थैलियों  की नमी बनाये रखने के लिए फव्वारे से पानी का छिड़काव किया। एक सप्ताह बाद उसमें मशरूम के बीज अंकुरित होने लगे और 15 दिन बाद सब्जी बनाने लायक मशरूम निकल आए।

श्री प्रवीण ने कहा कि मशरूम की खेती के लिए तापमान का ध्यान रखना जरुरी है। इसलिए तापमान मीटर लगाया गया। कमरे की आर्द्रता 80 डिग्री से नीचे नहीं होना चाहिए.अब तक दो बार फसल ले चुके हैं। पहली बार में 15  किलो बीज में करीब 16 हजार रु.की फसल इंदौर की चोइथराम मंडी में बेची जिसमें 4  हजार रु.का खर्च आया, जबकि दूसरी बार में 50  किलो बीज से अब तक 30  हजार रु.की फसल बेच चुके हैं, जिसमें 12  हजार रु.का खर्च आया है,जबकि अभी और फसल आना बाकी है।

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