निराश्रित पशुधन का प्रबंधन करें - श्री यादव

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ग्वालियर संभाग के अधिकारियों की बैठक

भोपाल। प्रदेश सरकार निराश्रित गौवंश के बेहतर प्रबंधन के लिये कटिबद्ध है। निराश्रित जानवरों को पकड़ कर उचित स्थान पर रखने की कार्य-योजना पर एक सप्ताह के भीतर अमल शुरू करें। पशुपालन, मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विकास मंत्री श्री लाखन सिंह यादव ने ग्वालियर में संभाग के सभी जिलों के कलेक्टर और विभागीय अधिकारियों को यह निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि पुरानी गौशालाओं और गौ सदनों की क्षमताओं का पूरा इस्तेमाल करें। साथ ही, स्थान निर्धारित करें, जहाँ पकड़े गए निराश्रित गौवंश को बेहतर ढंग से  रखा जा सके।

पशुपालन मंत्री श्री यादव ने कहा कि निराश्रित घूमने वाले पशुओं का प्रबंधन पूरी संजीदगी के साथ करें। उन्होंने कहा सड़कों पर आए दिन निराश्रित पशुओं की वजह से दुर्घटनाएं होती हैं। जिनमें पशुओं के साथ-साथ मनुष्य भी घायल होते हैं। उन्होंने कहा कि प्रथम चरण में पकड़े गए जानवरों को रखने के लिये पुरानी गौशालाओं, बंद पड़े सरकारी कृषि फार्म और अधोसंरचना का उपयोग करें। साथ ही 10 से 15 ग्राम पंचायतों के बीच उचित जमीन चिन्हित कर वहाँ गौशालाएं स्थापित की जाएँ। उन्होंने निर्देश दिये कि यथासंभव राष्ट्रीय राजमार्ग और प्रमुख मार्गों के किनारे गौशालायें स्थापित करने का प्रयास करें।
अपर मुख्य सचिव श्री मनोज श्रीवास्तव ने कहा कि गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने की जरूरत है। उन्होंने जिला कलेक्टरों से कहा कि गौशालाओं के लिये जमीन चिन्हित करने के साथ-साथ यह भी तय करें कि इनका संचालन किस प्रकार किया जायेगा। उन्होंने उद्यमी भावना के साथ गौशालाएं स्थापित करने पर बल दिया। गौशालाओं के संचालन में जनभागीदारी बढ़ाने के लिये भी कहा।

पशुपालन को आय का प्रमुख जरिया बनाएं

उन्नत पशुपालन किसानों की आय का प्रमुख जरिया बन सकता है। बहुत से प्रगतिशील किसानों ने इसे साबित भी किया है। इसलिये किसान भाई अपने पशुओं को सड़कों पर निराश्रित भटकने के लिये न छोड़ें। उन्हें अपनाएँ और अपनी आय बढ़ाएँ। यह बात पशुपालन, मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विकास मंत्री श्री लाखन सिंह यादव ने ग्वालियर मेला स्थित पशु चिकित्सालय परिसर में जिला स्तरीय गोपाल पुरस्कार वितरण समारोह में कही। मंत्री श्री यादव ने सर्वाधिक दूध दे रही गाय और भैंस के पालकों को गोपाल पुरस्कार प्रदान किए। उन्होंने गौपूजन और भैंस पूजन करने के बाद इन पशुपालकों को प्रथम पुरस्कार 50 हजार, द्वितीय 25 हजार  और तृतीय पुरस्कार 15 हजार रूपए भी दिए। इसके अलावा, पशुपालकों को पाँच - पाँच हजार रूपए के 7 - 7 सांत्वना पुरस्कार भी दिए गए।


 

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