कीट-रोग से करें सरसों की सुरक्षा

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कीट नियंत्रण

इस समय सरसों में चित्रित कीट व माहू कीट का प्रकोप होने का डर ज्यादा रहता है। इस में शुरू में फसलों के छोटे पौधों पर आरामक्खी की गिडारें (काली गिडार व बालदार गिडार) नुकसान पंहुचाती हैं। गिडारें काले रंग की होती हैं। जो पत्तियों को बहुत तेजी के साथ किनारों से विभिन्न प्रकार के छेद बनाती हुई खाती हैं, जिस के कारण पत्तियां बिल्कुल छलनी हो जाती हैं।

रोकथाम के लिए मैलाथियान (5 फीसदी चूर्ण) 20 से 25 किलोग्राम, मैलाथियान (50 ईसी) डेढ़ लीटर किसी एक रसायन का प्रयोग प्रति हेक्टेयर की दर से करना चाहिए।

सरसों में दूसरा कीट माहू यानी चेपा मुख्य होता है। जो झुंड के रूप में पत्तियों, फूलों, डंठलों, फलियों में डेन नहीं बनते हैं। यह कीट छोटा, कोमल शरीर वाला और हरे मटमैले भूरे रंग का होता है। इस कीट का प्रकोप दिसंबर के मध्य से शुरू होता है और बादल घिरे रहने पर इस का प्रकोप तेजी से होता है।

इसकी रोकथाम के लिए 1 लीटर डाइमिथिएट (30 ईसी) या 1 लीटर मिथाइल डिमेटान (25 ईसी) या 1 लीटर क्लोरोपाईरीफास (20 ईसी) रसायन का प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करने से फसल को कीट से सुरक्षित रखा जा सकता है।

रबी फसलों में गेहूं व सरसों प्रमुख फसलें हैं। प्रदेश में सरसों की बोआई और गेहूं की अगेती प्रजातियों की बोआई हो चुकी है व पिछेती प्रजातियों की बोआई की जा रही है। वहीं दूसरी ओर खेतों में सरसों की फसल लहलहा रही है। इस समय किसानों को चाहिए कि फसल सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सरसों के खेतों में निगरानी रखें।

इस फसल में पेंटेडबग कीट जो नारंगी रंग का धब्बेदार कीट है, के शिशु और वयस्क टहनियों व कलियों से रस चूसते हैं, जिससे पौधा कमजोर हो जाता है व फलियों में दाने नहीं बनते हैं। इसकी रोकथाम के लिए पहले बताए गए कीटनाशकों का प्रयोग करना फायदेमंद होता है।

एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन

माहू यानी चेपा की रोकथाम के लिए सितंबर के आखिरी हफ्ते से अक्टूबर के पहले हफ्ते तक अगेती प्रजातियों की बोआई कर देनी चाहिए, चेपा से प्रभावित टहनियों को दिसंबर के अंत तक तोड़ देना चाहिए। रोगग्रस्त पत्तियों को प्रकोप के शुरूआती अवस्था में ही तोड़ कर नष्ट कर देना चाहिए। झुंड वाले कीड़ों की सुंडियों या अंडों को नष्ट कर देना चाहिए। सरसों के नाशीजीवों के प्राकृतिक शत्रुओं जैसे इन्द्रगोप भृंग, क्राईसोपा, सिरफिडफ्लाई का फसल वातावरण में संरक्षण करें।

रोग नियंत्रण

सरसों में झुलसा रोग का प्रकोप ज्यादा हो सकता है। इस रोग में पत्तियों और फलियों पर गहरे कत्थई रंग के धब्बे बन जाते हैं, जिन में गोल छल्ले केवल पत्तियों पर दिखाई देते हैं। इस रोग पर नियंत्रण करने के लिए 2 किलोग्राम मैंकोजेब (75 फीसदी) या 2 किलोग्राम जीरम (80 फीसदी) या ढाई किलोग्राम जिनेब (75 फीसदी) या 3.7 लीटर जीरम (25 फीसदी) या 3 किलोग्राम कापर ऑक्सीक्लोराइड (80 फीसदी) का 1000 लीटर पानी में घोल बना कर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें। पहला छिड़काव रोग के लक्षण दिखाई देने पर और दूसरा छिड़काव पहले छिड़काव के 15 से 20 दिनों के अंतर पर करें। अधिकतम 4 से 5 बार छिड़काव करने से फसल को सुरक्षित रखा जा सकता है।

 

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