फसल ऋण माफी के बाद - अब किसानों को भावांतर की आस बंधी

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इंदौर। मप्र में श्री कमलनाथ की कांग्रेस सरकार ने किसानों की ऋण माफी का वादा पूरा करते हुए 31 मार्च 2018 की स्थिति में किसानों के बकाया ऋण की अवधि को बढ़ाते हुए 12 दिसंबर 2018  तक किसानों के ऋण खाते में चालू बकाया को भी शामिल कर लिया है। इसके बाद किसानों को अब अपनी फसल के भावांतर भुगतान की राशि मिलने की आस बंधी है।

बता दें कि पिछली श्री शिवराज सिंह सरकार ने खरीफ सीजन 2018 के लिए मक्का और सोयाबीन हेतु फ्लैट भावांतर योजना के तहत 5 अक्टूबर को आदेश जारी किए थे। जिसमें सोयाबीन और मक्का पर 500 रुपए प्रति क्विंटल तक फ्लैट भावान्तर राशि देने के जिक्र किया गया था। इसमें विक्रय अवधि 20 अक्टूबर से 19  जनवरी 2019  तय की गई थी। कुछ दिन बाद यह अवधि समाप्त हो रही है। इसीलिए  किसान भावांतर भुगतान की राशि जल्द भुगतान करने की मांग कर रहे हैं। स्मरण रहे कि सोयाबीन और मक्का का इस वर्ष न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी ) क्रमश: 3399  और 1700 रुपए क्विंटल निर्धारित किया गया है। तत्कालीन श्री शिवराज सिंह चौहान सरकार के फ़्लैट भावान्तर भुगतान वाले पूर्ववर्ती आदेश में 500  रुपए तक  शब्द का इस्तेमाल किया गया है। इसलिए  किसानों को यह भय है कि कहीं नई कांग्रेस सरकार आदेश के मुताबिक 100 से लेकर 500 रुपए के बीच की कोई राशि तय कर भुगतान न कर दें। हालांकि किसानों को  विश्वास है कि जिस तरह मुख्यमंत्री श्री कमलनाथ ने कर्ज माफी के दायरे को बढ़ाकर 12  दिसंबर 2018  तक की अवधि के ऋण खाते में चालू बकाया को भी ऋण माफ़ी में शामिल किया है, उससे उम्मीद बंधी है कि नई कांग्रेस सरकार किसानों का नुकसान न करते हुए फ्लैट भावान्तर भुगतान 500  रुपए प्रति क्विंटल की दर से करते हुए जल्द ही उनके बैंक खातों में राशि जमा कर देगी। 

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