किसान संगठनों द्वारा राजनीतिक मोर्चे की तैयारी

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इंदौर। देश भर में किसानों की बढ़ रही परेशानियों और आत्महत्याओं को देखते हुए  शेतकरी संगठना के एपेक्स निकाय ने आगामी लोक सभा चुनाव 2019 में किसान,जवान ,मजदूर पार्टी के नाम से राजनीतिक मोर्चा खोलने की घोषणा की है। यह जानकारी शेतकरी संगठना द्वारा जारी की गई प्रेस विज्ञप्ति में दी गई।

प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार किसानों की बढ़ती आत्महत्या चिंता का विषय है। कृषि लागत और मूल्य आयोग (सीएसीपी) द्वारा घोषित मूल्य  किसानों  की उत्पादन की वास्तविक लागत से 40 से 60% कम हैं। सीएसीपी को असंवैधानिक बताते हुए उसे  भारतीय संविधान के अनुच्छेद 323 (2-B) (G) के प्रावधान के अनुसार  ट्रिब्यूनल द्वारा प्रतिस्थापित कर देश के सभी किसानों का ऋण माफ किया जाए क्योंकि  स्व. शरद जोशी, टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज और डॉ एम. एस. स्वामीनाथन रिपोर्टों ने भी इसे साबित किया था।

संगठना ने  कृषि वित्तपोषण की कार्यप्रणाली को किसानों के लिए अपर्याप्त बताते हुए कहा कि वर्तमान बैंकिंग प्रणाली फसल पैटर्न में  बैंक किसानों की पूरी संपत्ति और भूमि को गिरवी रख रहे हैं। नेहरू से लेकर मोदी तक की वर्तमान सरकारों द्वारा  अंतर्राष्ट्रीय बाजार से बहुत अधिक दरों पर कृषि उपज का आयात किया गया जिससे घरेलू बाजार नष्ट हो गया। 18 जून 1951 को नेहरू सरकार द्वारा  संविधान के 31 क्च (भाग III) 1 में संशोधन कर  संविधान की  9 वीं  अनुसूची का निर्माण किया था। जिसमें  9वीं अनुसूची में कानून के खिलाफ न्याय के लिए अपील करने के लिए आम आदमी को प्रतिबंधित कर दिया।

इसीलिए गत दिनों दिल्ली में देश भर के किसान संगठनों की एक राष्ट्रीय स्तर की आम सभा आयोजित की गई  सभा की अध्यक्षता श्री रघुनाथदास पाटिल ने की।

उन्होंने कहा कि देश भर के मौजूदा राष्ट्रीय मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल किसान आत्महत्याओं की बुराई  मुद्दे के बारे में नहीं सोच रहे है  इसलिए  देश के किसान संगठन आगामी आम चुनाव 2019 में  किसान , जवान ,मजदूर  पार्टी  के नाम से एक राजनीतिक मोर्चा खोलेंगे.     

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