बागवानी फसलें सुधार सकती हैं किसान की आर्थिक दशा

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पिछले कुछ वर्षों में किसानों का बागवानी फसलों की तरफ रुझान बढ़ता चला जा रहा है। इन फसलों में फल, सब्जी, जड़ व कन्द फसलों, फूल, सुगंधित तथा औषधि फसलें, मसाला तथा शोषण फसलें प्रमुख हैं। ये किसान को परम्परागत फसलों की तुलना में प्रति इकाई क्षेत्र में अधिक लाभ कमाने का अवसर देती है। वर्ष 2004-05 में जहां इन सभी फसलों का सम्मिलित क्षेत्र 184.45 लाख हेक्टेयर था वहीं वर्ष 2017-18 में यह बढ़कर 249.16 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया। पिछले 13 वर्षों में इसमें 64.71 लाख हेक्टेयर की वृद्धि हुई है। यदि प्रति वर्ष औसत वृद्धि देखें तो यह लगभग 5 लाख हेक्टेयर प्रति वर्ष की दर से हुई है। देश में सबसे अधिक क्षेत्र में सब्जियों की खेती होती है। वर्ष 2004-05 में जहां सब्जियां 67.44 लाख हेक्टेयर में होती थीं वहीं इनका क्षेत्र वर्ष 2017-18 में बढ़कर 101.72 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया। तेरह वर्षों में सब्जियों के क्षेत्र में 34.28 लाख हेक्टेयर की वृद्धि हुई है। इनकी उत्पादकता भी तेरह वर्षों में 15.01 टन से बढ़कर 17.8 टन प्रति हेक्टेयर तक बढ़ गई है। सब्जियों के बाद देश में फलों का क्षेत्र आता है। फलों के क्षेत्र में भी वृद्धि तो हुई है, परन्तु सब्जियों के अनुपात में नहीं। जहां वर्ष 2004-05 में फल 50.49 लाख हेक्टेयर में उगाये जाते थे वहां वर्ष 2017-18 तक इनका क्षेत्र 64.28 लाख हेक्टेयर तक ही पहुंच पाया। पिछले 13 वर्षों में इसमें 13.79 लाख हेक्टेयर की ही वृद्धि हुई, लगभग 1 लाख हेक्टेयर प्रति वर्ष के मान से फसलों की उत्पादकता जो वर्ष 2017-18 में बढ़कर 14.8 टन प्रति हेक्टेयर हो गई। लगभग 4 टन प्रति हेक्टेयर की वृद्धि एक सार्थक वृद्धि है जिसके और बढ़ाये जाने की सम्भावनाएं हैं। उद्यान फसलों में फूलों की खेती न पिछले 13 वर्षों में एक उल्लेखनीय प्रगति की है, जहां वर्ष 2004-05 में फूलों की खेती मात्र 1.18 लाख हेक्टेयर में होती थी वह वर्ष 2017-18 में 3.08 लाख हेक्टेयर में होती थी वह वर्ष 2017-18 में 3.08 लाख हेक्टेयर में की जाने लगी। इसमें पिछले 13 वर्षों में दुगने से भी ज्यादा 1.90 लाख हेक्टेयर की वृद्धि देखी गई। फूलों के प्रति हेक्टेयर उत्पादन में भी सार्थक वृद्धि देखी गई। जहां वर्ष 2004-05 में प्रति हेक्टेयर 4.93 टन फूल उत्पादित किये जाते थे वहां वर्ष 2017-18 तक इनका प्रति हेक्टेयर उत्पादन बढ़कर 8.1 टन तक पहुंच गया। सुगंधित तथा औषधि फसलों की खेती में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्ष 2004-05 में जहां इनकी खेती मात्र 1.31 लाख हेक्टेयर में की जाती थी वहीं वर्ष 2017-18 तक यह बढ़कर 65 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गई। पिछले 13 वर्षों में इसके क्षेत्र में पांच गुनी वृद्धि हुई है। इनकी उत्पाकता भी 1.21 टन से बढ़कर 1.6 टन प्रति हेक्टेयर तक पहुंच गई। इसके और बढऩे की अपार सम्भावनाएं हैं। मसालों की खेती में उल्लेखनीय वृद्धि नहीं हुई। वर्ष 2004-05 में जहां मसाले 31.5 लाख हेक्टेयर में लिये जाते थे वहां इनका क्षेत्र वर्ष 2017-18 तक 36.98 लाख हेक्टेयर तक ही पहुंच पाया, परन्तु इनकी औसत उत्पादकता जो वर्ष 2004-05 में 1.27 टन प्रति हेक्टेयर थी वह बढ़कर वर्ष 2017-18 में 2.2 टन प्रति हेक्टेयर तक पहुंच गई। बागवानी फसलें किसान की आर्थिक दशा सुधारने में एक बड़ा योगदान दे सकती है इसके लिए किसानों को प्रेरित करना आवश्यक है। इन फसलों के निर्यात की भी अपार संभावनायें हैं। अधिक उत्पादन की दशा में भाव गिरने का जोखिम भी इन फसलों के लेने में है।

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