उत्पादकता में वृद्धि एक अच्छा संकेत

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देश की आर्थिक व्यवस्था में कृषि का अपना एक महत्वपूर्ण स्थान है।

देश की वर्ष 2011 में की गई जनगणना के अनुसार कुल जनसंख्या के 54.6 प्रतिशत लोग कृषि व्यवसाय से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए हैं। देश के कुल सकल उत्पाद का 17.4 प्रतिशत कृषि से ही प्राप्त होता है, जो वर्ष प्रतिवर्ष गिरता चला जा रहा है। यह वर्ष 2013-14 में 18.6, 2014-15 में 18.0, 2015-16 में 17.5 तथा वर्ष 2016-17 में 17.4 तक गिर गया। परन्तु अच्छी बात यह है कि पिछले कुछ वर्षों से विभिन्न फसलों की उत्पादकता में वृद्धि देखी जा रही है। धान की उत्पादकता जो वर्ष 2014-15 में 2391 किलो प्रति हेक्टेयर थी वह बढ़कर वर्ष 2016-17 में 2550 किलो प्रति हेक्टेयर तक पहुंच गई। दो वर्षों में इसमें 159 किलो प्रति हेक्टेयर की वृद्धि पाई गई। धान का वर्ष 2016-17 में कुल उत्पादन 1001.5 लाख टन पहुंच गया।

देश की दूसरी प्रमुख फसल गेहूं में भी दो वर्षों में 466 किलो ग्राम प्रति हेक्टेयर की वृद्धि देखी गई, जहां वर्ष 2014-15 में गेहूं की उत्पादकता मात्र 2750 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर थी वह बढ़कर वर्ष 2016-17 में 3216 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर हो गई। देश में गेहूं का वर्ष 2016-17 में कुल उत्पादन 983.8 लाख टन तक पहुंच गया, जो एक रिकॉर्ड है।

 

मोटे अनाजों की उत्पादकता में अभी भी उतार-चढ़ाव देखने को मिलते। मोटे अनाजों की उत्पादकता जो वर्ष 2014-15 में 1703 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर थी वह वर्ष 2015-16 में घटकर 1579 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर रह गयी, फिर वर्ष 2016-17 में यह बढ़कर 1784 ग्राम प्रति हेक्टेयर हो गई। मोटे अनाजों का पोषक महत्व जैसे-जैसे उपभोक्ताओं के सामने आयेगा, इनकी मांग स्वत: बढ़ती चली जायेगी। इसलिए यह आवश्यक हो जाता है कि हम मोटे अनाजों की उत्पादकता बढ़ाने के प्रति कार्य को और गति दें।

दलहनी फसलों की उत्पादकता अभी भी एक चिन्ता का विषय है। इसमें भी उतार-चढ़ाव देखने को मिलते हैं। वर्ष 2016-17 में दलहनी फसलों की उत्पादकता 779 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर तक ही पहुंच पाई। दलहन में उत्पादन तकनीक कारगर सिद्ध नहीं हो पा रही है। इसलिए संरक्षण तकनीक पर अधिक जोर देने की आवश्यकता है। तिलहनी फसलों की उत्पादकता में भी उतार-चढ़ाव एक चिन्ता का विषय है। सब प्रयासों के बाद भी तिहलन फसलों की औसत उत्पादकता वर्ष 2016-17 में 1225 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर तक ही पहुंच पाई।

गन्ने की उत्पादकता में पिछले तीन वर्षों से वर्ष प्रति वर्ष कमी देखी गई है। वर्ष 2014-15 में जहां गन्ने की उत्पादकता 715.12 क्विंटल प्रति हेक्टेयर थी वह वर्ष 2016-17 में घटकर 698.86 क्विंटल प्रति हेक्टेयर ही रह गई। कपास की उत्पादकता में बहुत उतार-चढ़ाव देखने को मिलते हैं। जहां वर्ष 2014-15 में कपास की उत्पादकता 462 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर थी वह वर्ष 2015-16 में घटकर 415 किलोग्राम रह गई, फिर वर्ष 2016-17 में बढ़कर 519 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर तक पहुंच गई। कपास की उत्पादकता में वृद्धि व टिकाऊपन लाने की आवश्यकता है।

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